नाथ की बेफिक्री और दुर्दशा कांग्रेस की



एक सोते हुए शख्स को किसी ने झकझोर कर जगाया। कहा, 'तू सो रहा है और घर में आग लग गयी है।' नींद से उठे आदमी ने अलसाये स्वर में जवाब दिया, 'तो, मुझे क्या?' अगला चिल्लाया, 'आग तेरे घर में लगी है।' आलसी ने पूरे इत्मीनान से कहा, ' तो तुझे क्या!'और वह पलटकर फिर सो गया। ये लतीफा पुराना है। लेकिन इसमें आलस से भरे शख्स के चेहरे के रूप में इस समय कमलनाथ की कल्पना बहुत आसानी के साथ बेहद सम-सामयिक तौर पर की जा सकती है। कांग्रेस में दलबदल की घुन पसरती ही जा रही है। शुक्रवार को ही बुरहानपुर से कांग्रेस की विधायक ने भाजपा का दामन थाम लिया। मुख्य विपक्ष का कोई विधायक किस समय कूदकर भाजपा में आ जाएगा, ये लगता है अब खुद कमलनाथ भी नहीं समझ पा रहे होंगे। लेकिन वे इत्मीनान में हैं


पुरसुकून अंदाज में इस सब पर चिंता जता रहे हैं। गोया कि जैसे कुछ हुआ ही न हो। लेकिन अकेले कमलनाथ के रुख के अनुसार तो कांग्रेस चल नहीं सकती। राज्य में पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर बुलंद होने लगे हैं। एक सप्ताह में दो विधायकों के इस्तीफे के बाद भी प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ कह रहे हैं, 'मैं चिंतित नहीं हूं।' करेला और नीम चढ़ा की बात यह कि कांग्रेस एक सर्वे के आधार पर दावा कर रही है कि उपचुनावों में बीजेपी केवल एक सीट जीत सकेगी। कमाल का आत्मविश्वास। मुझे वो शख्स याद आ गया, जो एक रात झूमते हुए घर पहुंचा। पत्नी से बोला, 'पता है, आज क्लब में दारू पीने का कॉम्पिटिशन हुआ था।' पत्नी ने छूटते ही प्रतिप्रश्न किया, 'तो दूसरे और तीसरे स्थान पर कौन रहा?' कमलनाथ सहित सर्वे वीर कांग्रेसी भी ऐसे ही किसी नशे में चूर दिखते हैं।


इस सबके चलते हो यह रहा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को संतुष्ट और भरोसा नहीं दिला पा रही है, जिसके कारण विधायकों का कांग्रेस से मोह भंग हो रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व पर वे नेता भी सवाल उठाने लगे हैं जो कुछ महीने पहले तक कमलनाथ मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। कमलनाथ सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाने वाले पुराने समाजवादी डाक्टर गोविंद सिंह का धैर्य भी लगता है चुकने लगा है। बकौल गोविंद सिंह...कांग्रेस का संगठन कमजोर है। हमें संगठन की मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। अगर संगठन मजबूत होता तो विधायक कांग्रेस छोड़कर नही जाते। जिन गांधी परिवार के खिलाफ बोलना कांग्रेस में प्रतिबंधित है, उस गांधी परिवार के चश्मों-चिराग राहुल गांधी के बारे में भी वे बोले।


डा.गोविंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस में एकल नहीं सामूहिक नेतृत्व होना चाहिए कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे ब्रजेंद्र सिंह की माने तो कांग्रेस के संगठन में कोई कमी नहीं है। वे कहते हैं, अतिमहत्वाकांक्षी लोगों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। ऐसे लोग जो जीत कर आए, लोगों ने उन्हें कांग्रेस की नीतियों पर भरोसा कर वोट दिया ऐसे विधायकों का ध्यान अब जनता को भी रखना चाहिए। जाहिर है कि राठौर भी नैतिक शिक्षाओं की कहानियों जैसे संवाद अदा कर रहे हैं। बिखराव को रोकने का उनके पास भी कोई फार्मूला नहीं है। चर्चा में तो उमंग सिंघार भी हैं। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कमलनाथ पर भी निशाना साधा है, और केंद्रीय नेतृत्व को प्रदेश की स्थिति पर फोकस करने की नसीहत दी है।


पूर्व मंत्री उमंग सिंगार का कहना है की वाकई में जो परिस्थितियां बनी हुई है, उसको देखते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान में केंद्रीय नेतृत्व को फोकस जरूर करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है, कि आज कुछ लोग खुद नेता बनना चाह रहे हैं, जबकि पार्टी उन्हें नेता बनाती है। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष संजय मसानी को लेकर किए गए ट्वीट पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि एक समय संजय मसानी ने कहा था कि मैं धर्म और अधर्म की लड़ाई के चलते कांग्रेस के साथ धर्म की लड़ाई में हूं, इसलिए वह अपने जीजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी धर्म के बारे में कुछ ज्ञान दे दें। तो साफ है कि प्रदेश में जो कमलनाथ पहले सरकार और संगठन के मुखिया थे, अब वे केवल संगठन के मुखिया बने हुए हैं। जो पहले उनके सुर में मिलाने वाले अब उन पर ऊंगली उठाने लगे हैं। ये भी याद रखिए ये वो लोग हैं जो पार्टी में बने हुए हैं। अब इनकी नहीं सुनी तो मान लीजिए जैसे केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन को उसकी नियति पर छोड़ दिया है। वैसे ही किसी दिन नियति नेतृत्व को भी अकेला ही छोड़ देगी। वैसे कांग्रेस का भला अब शायद तब ही हो...


प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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