कमल नहीं कमालनाथ हैं ये



माननीय कमलनाथ जी। समझ नहीं आ रहा कि आपको कमलनाथ लिखूं या फिर कमालनाथ। भूतपूर्व मुख्यमंत्री लिखूं या अभूतपूर्व मुख्यमंत्री। क्योंकि आज तो आपने कमाल कर दिया। दावा कर गए कि सत्ता में रहते हुए आपने अपने वचन पत्र के 900 में से 574 वायदे पूरे कर दिए। बुरा हो कुछ अक्लमंदी के पास होने का, कि कोई पाचन चूर्ण फांकने के बाद भी आपके इस दावे को पचा नहीं पा रहा हूं वरना तो आपको अभूतपूर्व मुख्यमंत्री भी कह देता। जिस रोज आप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाये गए थे, तब सोशल मीडिया पर आपकी सत्तर पार वाली उम्र को लेकर कई कटाक्ष सामने आए थे। लेकिन अब लगता है कि वाकई यह कटाक्ष सही थे। सठियाने की उम्र पार करने के बाद के भी दस साल से अधिक के असर को अब साफ महसूस किया जा सकता है


वरना ऐसा संभव नहीं था कि जो शख्स चंद दिन पहले तक अपनी सरकार को काम करने के मौके न देने का दुखड़ा रो रहा हो, वह ही अब अपनी उपलब्धियों के दावे को पांच साल के कार्यकाल के आसपास तक खींच लाया है। माननीय, आपकी कर्ज माफी वाली पैन ड्राइव ने शुरूआत में मुझे भी प्रभावित किया था। मगर गुजरे कुछ दिनों से मैं अविश्वास से भर गया हूं। इस बीच राज्य के उन विधानसभा क्षेत्रों की मैंने खाक छान ली है, जहां चुनाव होना है। जितने किसानों से मिला, उनमें से सत्तर फीसदी से ज्यादा यही कहते दिखे कि उनका कर्ज माफ नहीं किया गया है, खाली आपका फोटो लगा एक प्रमाण पत्र उनके हाथ में है। वो तो अब उलटा कह रहे हैं कि हमने तो कर्जमाफी की मांग की नहीं थी, आपने ही वादा किया था।


भरोसे में समय पर कर्ज अदा करने वाले किसानों ने भी बैंकों की उधारी नहीं लौटाई और डिफाल्टर हो गए। अब वे खुल कर आपकी सरकार पर धोखा, छल और ठगी का आरोप लगा रहे हैं। हां, कुछ किसानों ने अपने कर्ज माफ करने के लिए आपको धन्यवाद तो दिया लेकिन उनसे जब आपके और शिवराज के बीच चयन करने के लिए कहा तो जवाब आपको चौंका सकता है। वे शिवराज को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। तो आखिर आपने किसका कर्ज माफ कर दिया? क्या यह काम भी उसी तरह से किया गया, जिस तरह आप 574 वायदे पूरे करने की बात कह रहे हैं। 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले अपनी पत्रकार वार्ता में आपने चार सौ वचन पूरे का दावा किया था।


मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद आपने एक से अधिक बार कहा कि वचन पत्र के 400 दावे पूरे किए गए. तो फिर आगे के 174 वचन क्या आपकी खातिर शिवराज सिंह चौहान ने पूरे कर दिए हैं! या फिर कोई ऐसा तंत्र विकसित हो गया है कि आप विपक्ष में रहते हुए भी प्रदेश में सामानांतर सरकार चला रहे हैं! मुझे लगता है कि आपकी बौखलाहट स्वाभाविक है। आप और शिवराज के नारियल बनाम शैम्पेन वाले झगड़े में मेरी खास रूचि नहीं है। शिवराज को आप घोषणावीर और झूठा ठहराते हैं। लेकिन क्या आपको शिवराज की इस हिम्मत की दाद नहीं देना चाहिए कि वे फिर रोज जनता के बीच जाकर अब भी पूरी हिम्मत और ताकत के साथ घोषणाएं कर रहे हैं।


जिस तरह से कांग्रेस सत्ता के किनारे आकर अटकी, बीजेपी उससे पांच सीटें पीछे रह गई, तेरह साल की एंटी इनकम्बेंसी के बाद भी यह शिवराज पर जनता के भरोसे का सबूत है। मगर आपकी स्थिति देखकर एक शेर याद आ गया। किसी ने लिखा है, 'आज उतनी भी नहीं बची पैमाने में, जितनी हम छोड़ दिया करते थे मयखाने में।' कहां तो इमरती देवी बयान कर रही हैं कि आप हर महीने कांग्रेस के विधायकों को पांच-पांच लाख रुपए बांटते थे। और कहां अब आपकी स्थिति देखकर दिवालियापन की याद आ रही है। अब ये दिवालियापन किस स्तर का है, क्या इसका खुलासा करना जरूरी है? वरना दावों के नाम पर आप चुटकुले सुनाने जैसी महाभूल तो नहीं करते। यूं ही राज्य की जनता आपके 400 वायदे वाले दावे को ही हलक के नीचे नहीं उतार पा रही थी, उस पर अब तो आपने शिवराज की घोषणावीर की छवि को भी पीछे छोड़ दिया है। मत भूलिए कि उपचुनावों के लिए अभी आपको प्रदेश की जनता के बीच जाना है। जा भी रहे हैं, क्या वहां आप 574 तो दूर, 57 दशमलव चार भी ऐसे वायदे गिना सकेंगे, जो आपने पूरे किये हैं? आपका रीलांच वचन पत्र नई बोतल में पुरानी शराब की याद दिला रहा है। ये कहावत भर है, लेकिन आप पर तो वाकई किसी पुरानी शराब के नए नशे जैसा असर दिख रहा है, कोई इसका क्या कर सकता है?


प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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