गुस्सा अजय सिंह का...



कमलनाथ का दुर्भाग्य। प्रदेश कांग्रेसाध्यक्ष रहते किनारे आकर सरकार बना ली लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार को टिकाऊ नहीं बना पाए। अब फिर वे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की हैसियत से कुछ करने की मुद्रा में आए तो उलझ गए। मामला चौबीस विधानसभा सीटों के उपचुनावों का है। कमलनाथ ने प्रत्याशी चयन पर विचार के लिए बैठक बुलाई। अभी हुजूर ने अंगड़ाई भी ली नहीं ली थी कि अजय सिंह ने उन्हेंउलझा दिया। अजय सिंह की धमकी खोखली नहीं है। अब यदि अजय सिंह को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर धकेलने की रणनीति हो तो पता नहीं लेकिन इसमें मुझे संशय नजर नहीं आ रहा है कि कांग्रेस ने यदि चौधरी राकेश सिंह को मेहगांव से टिकट दिया तो वे पार्टी छोड़ देंगे। वाकई में इस बात में दम है कि किसी समय कांग्रेस को भारी शर्मनाक स्थिति में लाने वाले राकेश सिंह को अब मेहगांव सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बना सकती है। राकेश सिंह की वापसी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही शिवपुरी में कराई थी


अब भला अजय सिंह 11 जुलाई 2013 को कैसे भूला सकते हैं। उस दिन शिवराज सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रहते हुए चौधरी राकेश सिंह ने सदन में ही अचानक पाला बदल लिया था। वे उसी दिन कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी राकेश सिंह को चुनाव लड़ाने की बजाय उनके भाई मुकेश चतुर्वेदी को मेहगांव से मैदान में उतारा था। मुकेश ने यहां से चुनाव जीत लिया था लेकिन राकेश सिंह को भाजपा ने पिछले पांच सालों में कहीं एडजस्ट नहीं किया। 2018 में मुकेश का टिकट काट कर भिंड से राकेश सिंह को जरूर चुनाव लड़वाया गया। लेकिन वे अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। तबसे वे कांग्रेस में वापसी के प्रयास कर रहे थे। अजय सिंह के विरोध के चलते चौधरी राकेश सिंह की कांग्रेस में वापसी नहीं हो पा रही थी। चौधरी राकेश सिंह की कांग्रेस के दो बड़े नेताओं से निकटता रही है।


इनमें से एक पूर्व प्रदेश कांग्रेसाध्यक्ष सुरेश पचौरी हैं और दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। सुरेश पचौरी कमलनाथ सरकार के दौरान भी लगभग हाशिए पर ही रहे और अभी भी संगठन में वे एक तरह से किनारे पर ही हैं। लेकिन दिग्विजय सिंह के बारे में तो जाहिर है कि मध्यप्रदेश में सरकार के दौरान वे कमलनाथ के आंख, कान, नाक सबकुछ थे। लिहाजा दिग्विजय सिंह इस बार चौधरी राकेश सिंह के तारणहार बनते नजर आ रहे हैं। भिंड में जातिगत गणित हमेशा चुनावों में प्रभावी रहा है। मेहगांव में ब्राह्मण और ठाकुर दोनों प्रभावशाली जातियां है। अब भाजपा ने तो कांग्रेस छोड़कर आए ओपीएस भदौरिया को उम्मीदवार घोषित कर ही दिया है। इस लिहाज से कांग्रेस को किसी ब्राह्मण उम्मीदवार पर ही दांव खेलना चाहिए। वैसे उपचुनाव की इन सभी सीटों पर कांग्रेस के पास उम्मीदवारों का टोटा है। इंदौर के सांवेर में भी कांग्रेस पार्टी छोड़कर गए प्रेमचंद गुड्डू के ही भरोसे रहेगी। गुड्डू भी दिग्विजय सिंह के नजदीकी हैं।


इसके अलावा भी कांग्रेस की कोशिश भाजपा के हारे उम्मीदवारों से पाला बदल करवाने की ही है। इस लिहाज से बड़ी बात नहीं है कि कांग्रेस चौधरी राकेश सिंह पर ही फोकस करें। इसलिए अजय सिंह का गुस्सा जायज है। राकेश सिंह ने विधानसभा के भीतर बगावत करअजय सिंह की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया था। न जाने किस समय में यह घटनाक्रम हुआ कि उसके बाद से अजय सिंह के राजनीतिक सितारे लगातार बिगड़ते ही चले गए। विंध्य की राजनीति में कांग्रेस के पर्याय माने जाने वाले अजय सिंह आज की तारीख में अपने राजनीतिक वजूद को फिर तलाश रहे हैं और इस सबकी बहुत बड़ी वजह वह निश्चित ही चौधरी राकेश सिंह को मानते ही होंगे। कांग्रेस में तमाम किस्म के राजनीतिक डिमोशन के बावजूद अजय सिंह ने कभी भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा में कमी नहीं आने दी है। लेकिन अब जो खेल होता दिख रहा है, उसके चलते अजय सिंह का गुस्सा स्वाभाविक है।


बात सिर्फ उनके व्यक्तिगत नफा नुकसान की ही नहीं है, बात यह भी है कि राकेश सिंह को टिकट देकर कांग्रेस ग्वालियर-चम्बल इलाके में अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश देगी। जिस समय इन उपचुनावों के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके समर्थकों की बगावत की बगावत को कांग्रेस गद्धारी ठहराएगी, तब क्या कोई इस बात का जवाब दे सकेगा कि चौधरी राकेश सिंह को क्या कांग्रेस उनकी गद्धारी के लिए ही उपकृत कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस बात की पीड़ा जरूर सताएगी कि पिछले चुनावों में मेहगांव और भिंड में उन्होंने चौधरी परिवार (राकेश के भाई मुकेश) के खिलाफ प्रचार में पूरी ताकत झोंकी थी, उसे सीट पर अब किस तरह इसी परिवार के हक में काम करें। देखा जाए तो भाजपा ने चौधरी राकेश को उपभोग के बाद उनके हाल पर ही छोड़ दिया था। किसी समय के तेजतर्रार इस विधायक के तेवर भी भाजपा में जाने के बाद खामोश हो गए हैं। अब जबकि कांग्रेस के लिए चौबीस सीटों के उपचुनाव भाजपा सरकार की नाव में छेद करने का अहम मौका साबित हो सकते हैं, तब जाहिर है कि कमलनाथ एक-एक सीट पर जीतने की क्षमता वाले व्यक्ति को ही टिकट देना चाहेंगे। ऐसे में सवाल यह कि क्या वाकई राकेश चौधरी कमलनाथ की इस अपेक्षा पर खरे उतर सकेंगे? प्रश्न यह भी कि क्या सिंह की बात न सुनने की सूरत में कांग्रेस उनकी बगावत का बोझ उठा पाएगी!


प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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