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राम जन्मभूमि विवाद: मध्यस्थता पैनल से कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, अब 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट के आदेश से फिलहाल यथास्थिति कायम है। इस बीच आठ मार्च को शीर्ष कोर्ट ने अयोध्या विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। सर्वमान्य हल तलाशने के लिए समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया गया है। विशारद अयोध्या विवाद में मुख्य याचिकाकतार्ओं में शामिल हैं। इनके पिता राजेंद्र सिंह ने 1950 में पहला मुकदमा दाखिल किया था जिसमें बिना रोक टोक रामलला की पूजा का हक मांगा गया था। साथ ही जन्मस्थान पर रखी रामलला की मूर्तियों को वहां से हटाने पर स्थाई रोक मांगी थी। फैजाबाद जिला अदालत से होता हुआ यह मुकदमा इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने अन्य याचिकाओं के साथ इसपर फैसला दिया था।  आगे पढ़ें

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अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

अपनी अर्जी में विशारद ने कहा है कि मध्यस्थता में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है इसलिए कोर्ट मुख्य मामले पर जल्द सुनवाई करे। कोर्ट ने मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। जिसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान और दूसरा निमोर्ही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया था। इस फैसले को भगवान राम सहित हिंदू-मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट के आदेश से फिलहाल यथास्थिति कायम है। इस बीच आठ मार्च को शीर्ष कोर्ट ने अयोध्या विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। सर्वमान्य हल तलाशने के लिए समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया गया  आगे पढ़ें

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