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हनी ट्रैप मामला: जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई एसआईटी, आयकर विभाग बोला- दस्तावेजों से पन्ने गायब

एसआईटी हनी ट्रैप केस की जांच की स्टेटस रिपोर्ट सोमवार को भी हाईकोर्ट में पेश नहीं कर पाई। तीन जनहित याचिकाओं पर जब जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और अवधेश गोस्वामी की बेंच ने सुनवाई शुरू की तो इस केस में नियुक्त आॅफिसर इन चार्ज (ओआईसी) एसपी अवधेश गोस्वामी से पूछा- स्टेटस रिपोर्ट कहां है? उन्होंने जवाब दिया- सर, रिपोर्ट तो नहीं लाए? इस पर जजों ने उन्हें फटकार लगाई और पूछा- फिर आप यहां आए क्यों? यदि 16 मार्च के पहले कोर्ट में जवाब पेश नहीं किया तो एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार खुद कोर्ट में आकर इसका कारण बताएं। सुनवाई के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि एसआईटी ने इस केस की महिला आरोपियों और अफसरों के बीच हुए लेन-देन के जो दस्तावेज दिए हैं, वे सब अधूरे हैं।  आगे पढ़ें

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हनी ट्रैप मामले में इंदौर हाईकोर्ट का आदेश, एसआईटी दस दिन सौंपे आयकर विभाग को सभी दस्तावेज

प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में अब आयकर विभाग का दखल बढ़ने जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को आदेश दिए हैं कि वह 10 दिन में केस से जुड़े दस्तावेज आयकर विभाग को सौंपे। कोर्ट ने सरकार को भी आदेश दिए हैं कि वह छह सप्ताह में जवाब दे कि इस मामले की जांच सीबीआई से क्यों न कराई जाए। उल्लेखनीय है कि एसआईटी की पूछताछ में आरोपी महिलाओं ने करोड़ों रुपए के लेन-देन, कॉन्ट्रैक्ट लिए जाने का खुलासा किया था, जिसकी जांच आयकर विभाग ने भी शुरू कर दी थी।  आगे पढ़ें

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किसे जीप कहें, किसे इल्ली!!!

दिग्विजय सिंह की इस सलाह का ज्यादातर मंत्रियों ने पालन क्यों नहीं किया कि उन्हें भाजपा शासनकाल के ओएसडी को अपने स्टाफ में नहीं रखना चाहिए। हालांकि दिग्विजय सिंह यह बेहतर जानते भी होंगे कि जो स्टाफ में आए हैं, वे पहले भी उनकी सरकार के मंत्रियों के रह चुके भरोसे के ही लोग है जिन्होंने भाजपाईयों का भी भरोसा हासिल कर लिया था। यहां फिर एक सच्चे किस्से का जिक्र जरूरी हो जाता है। पटवा सरकार की बर्खास्तगी और दिग्विजय सिंह सरकार बनने के बाद मंत्री बने एक सज्जन अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। वह मंत्री शाम ढलने के बाद वाले अंगूर की बेटी के साये तले समय बिताते थे। उसी सुरूर में उन्होंने एक बात बताई थी। कहा कि पटवा शासनकाल में उन्हीं के विभाग के ओएसडी रहे एक अफसर ने फिर इसी पद के लिए आवेदन दिया है। अफसर ने मौखिक साक्षात्कार में यह बताया है कि जिस तरह वह पूर्व मंत्री की दैहिक एवं भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता था, वैसा ही वर्तमान मंत्री के लिए भी कर सकता है। यह सिस्टम पर जोंक की तरह चिपके उस अफसर की योग्यता का वह अलिखित अंश था, जिस पर उसे सबसे अधिक गर्व महसूस हो रहा था।read more  आगे पढ़ें

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हनी ट्रैप मामले में जानकारी साझा करने को लेकर आयकर विभाग और एसआईटी आमने-सामने

आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के डायरेक्टर इंटेलिजेंस आलोक जौहरी ने कहा कि विंग ने सितंबर में हनी ट्रैप मामले का खुलासा होने के तुरंत बाद एसआईटी को चिट्ठी लिखकर आरोपी महिलाओं को मिले पैसे की डिटेल साझा करने को कहा था। इसके बाद नवंबर माह में दूसरी बार एसआईटी को चिट्ठी लिखी गई, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। जौहरी ने कहा कि मीडिया खबरों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए विभाग अपने स्तर पर इसकी छानबीन नहीं कर सकता। उसे इस मामले में जांच के लिए कुछ पुख्ता दस्तावेज चाहिए, जो उन्हें अब तक नहीं मिले हैं।  आगे पढ़ें

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हनी ट्रैप और जीतू सोनी के मामले की अब ईडी और आयकर विभाग की मप्र विंग करेगी जांच

हनी ट्रैप और जीतू सोनी मामले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की मप्र विंग भी करेगी। इंदौर के पलासिया थाने में सोनी पर दर्ज मामलों की फाइल ईडी के दफ्तर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार जांच में खुलासा हुआ है कि जीतू के होटल माय होम से मुक्त कराई गईं 67 युवतियों में से 7 बांगलादेश की हैं। इनका फर्जी आधार कार्ड कोलकाता में बनाए जाने के पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं। वहीं कोर्ट में शुक्रवार को युवतियों की अिभरक्षा को लेकर दायर याचिका की सुनवाई में खासी बहस हुई। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि खुद को लड़कियों का पति बता रहे ज्यादातर युवक उनके एजेंट हैं।  आगे पढ़ें

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लक्ष्मीकांत शर्मा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, हनी ट्रैप की आरोपी के साथ दे रहे हैं दिखाई

प्रदेश के नेताओं और अफसरों को हिला देने वाला हनी ट्रैप मामला करीब दो माह बाद फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके लक्ष्मीकांत शर्मा का कथित आॅडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में लक्ष्मीकांत हनी ट्रैप मामले की आरोपी श्वेता स्वप्निल जैन के साथ दिखाई दे रहे हैं।  आगे पढ़ें

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हनी ट्रैप मामले में गृहमंत्री ने कहा- षडयंत्र में जो भी शामिल होंगे उनके नाम जल्द आएंगे सामने

हनी ट्रैप मामले में मप्र के गृह मंत्री बाला बच्चन ने मंगलवार को कहा कि मामले की जांच कर रही एसआईटी में बदलाव का मकसद दूध का दूध और पानी का पानी करना है। षडयंत्र में जो भी लोग शामिल हैं उनके नाम जल्द सामने आएंगे। बच्चन गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर सर्वधर्म सभा में हिस्सा लेने इंदौर पहुंचे थे।  आगे पढ़ें

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एक पाती कमलनाथ के नाम

मुख्यमंत्री जी, वल्लभ भवन में हनी-मनी के शौकिन नौकरशाहों की बुद्धि से परे हट कर एक राजनेता के दिमाग को जागृत करिए। विरुदावली वाले मंत्रियों, विधायकों तथा पार्टीजनों के रचित यशोगान से कान दूर कीजिए। आप पाएंगे कि इस सब मिथ्या तारीफों से सर्वथा परे आप हंसी का पात्र बनकर रह गये हैं। आप बतौर मुख्यमंत्री आईसीयू में भर्ती उस मरीज की तरह दिखने लगे हैं, जिसके लिए डॉक्टर कहता है कि इन्हें अब दवा नहीं, बल्कि दुआ की जरूरत है। इस सबके बावजूद यदि आपका रुख ऐसा ही रहना है तो फिर ऊपर बतायी गयी काजल की डिब्बी से नजर का टीका उन तमाम महानुभावों को लगवा दें, जिन्हें हनी ट्रैप कांड में बचाने की कोशिश आपको औजार बनाकर की जा रही है।  आगे पढ़ें

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शांत पंजाधारी कमलनाथ...शांत

हनी ट्रैप मामले पर कुंभकर्णी नींद से जागकर मुख्यमंत्री ने जिस स्वरूप का परिचय दिया है, उस पर प्रतिक्रिया के लिए न तो पर्याप्त शब्द मिल पा रहे हैं और न ही सही मनोभाव। छिंदवाड़ा, दिल्ली दरबार के बाद अब भोपाल स्थित मंत्रालय नाथ की राजनीतिक परिक्रमा का तीसरा पड़ाव बन चुका है। यहां अपने चैंबर में बैठे-बैठे नाथ पूरे प्रदेश की स्थिति पर तीखी नजर होने का भ्रम जीवित रखे हुए हैं। ठीक वैसे ही, जैसे राग दरबारी उपन्यास में शिवपालगंज की निकम्मी पुलिस को लेकर गलतफहमी थी। पूरी तरह साधन तथा क्षमता-विहीन उस पुलिस से आशा की जाती थी कि आसपास के ढाई से तीन सौ गांवों की हर हलचल पर उसकी नजर है। उसकी क्षमता इतनी कि अपराध होने के बाद तो दूर, वह ऐसा होने से पहले ही घटना स्थल तक पहुंच जाएगी।  आगे पढ़ें

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हनी ट्रैप मामले में सीएम ने आला अफसरों की ली क्लास, पूछा- जांच में एटीएस का क्या काम

घंटे भर तक चली बैठक में यह बात भी उठी कि एटीएस हनी ट्रैप का खुलासा करने के लिए तीन महीने से किसकी अनुमति लेकर सर्विलांस कर रही थी? आखिर यह सब क्या चल रहा है? अफसरों ने इस मसले पर सीएम को सफाई देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अफसरों से दो टूक कहा कि बेवजह की बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने एटीएस के गठन से संबंधित नोटिफिकेशन मंगाकर उसका भी अध्ययन किया था।  आगे पढ़ें

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