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फारूक अब्दुल्ला की बात सुनने की बजाय कश्मीरी पंडितों ने लगाए मोदी-मादी के नारे, वीडियो वायरल

बताया जा रहा है कि मंदिर में एक धार्मिंक समागम के सिलसिले में देश-विदेश में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक वर्ग आया हुआ था। इससे एक दिन पहले सोमवार को मां क्षीर भवानी का मेला भी लगा था। डॉ. फारूक अब्दुल्ला जब ज्येष्ठा देवी मंदिर में पहुंचे तो वहां मौजूद कई कश्मीरी पंडितों ने उन्हें घेरते हुए मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। डॉ. अब्दुल्ला के साथ मौजूद लोगों ने नारे लगा रही भीड़ को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन नारेबाजी नहीं रुकी।  आगे पढ़ें

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इंदौर महापौर नहीं बता पाईं राष्ट्र गान और राष्ट्रगीत में अंतर, वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें मध्य प्रदेश के इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत में अंतर नहीं बता पाईं। इस वीडियो में एक पत्रकार के पूछने पर महापौर ने पहले राष्ट्र गान (जन-गण-मन) का सही उत्तर दिया और कहा कि राष्ट्र गान खड़े होकर गाना पड़ता है। बैठकर गाने से उसका अपमान होता है। बाद में उन्होंने जन-गण-मन को राष्ट्र गीत बताया और कहा राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान एक ही हैं।  आगे पढ़ें

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वायरल आडियो में सरकार को बदनाम करने के लिए बिजली कटौती बढ़ाने के निर्देश

सूत्रों के मुताबिक सरकार को बिजली संकट को लेकर शुरूआत से ही यह आशंका है कि इसके पीछे किसी न किसी का हाथ है। दरअसल, बिजली सरप्लस है और एक-दो घटनाओं को छोड़कर प्राकृतिक तौर पर ऐसे कुछ नहीं हुआ, जिसकी वजह से बिजली गुल हो। इसके बावजूद शहर हो या कस्बा या फिर गांव, सब जगह हर दिन बिजली जा रही है। कुछ जगह घोषित तौर पर मेंटेनेंस के लिए शट डाउन लिया जा रहा है तो कुछ जगह फाल्ट या ट्रिपिंग को बिजली जाने की वजह बताया जा रहा है। इसी बीच सरकार के पास एक ऐसी फोन रिकार्डिंग पहुंची है, जिसमें दो व्यक्ति बिजली काटकर सरकार को बदनाम करने की बात कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

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अब सोशल मीडिया में बढ़ी ममता बनर्जी की मुश्किलें, ट्विटर पर ‘जय श्रीराम’ का मिल रहा जवाब

बुधवार को भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए क्रिकेट विश्व कप के मैच से पूर्व सीएम ममता ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिये भारतीय क्रिकेट टीम को शुभकामनाएं दीं। उनके शुभकामना देते ही लोगों ने कमेंट करना शुरू कर दिया। इनमें ज्यादातर लोगों ने कमेंट में केवल 'जय श्रीराम' लिखा। हालांकि, यह पहला मौका नहीं था, जब उनके ट्वीट के जवाब में लोगों ने जय श्रीराम लिखा हो। लोकसभा चुनाव के दौरान ममता ने जब से जय श्रीराम के उद्घोष को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, तभी से उनके ट्वीट पर ज्यादातर लोग जय श्रीराम लिखकर कमेंट कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

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असमिया पर बंगाल भाषा को तरजीह कैसे...सोशल मीडिया पर मचा बवाल

आल असम बंगाली युवा छत्र फेडरेशन के प्रेसिडेंट कमल चौधरी ने कहा, हम असम में पैदा हुए हैं। हमारा पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से कोई लेनादेना नहीं है। इस तरह का अभियान चलाने वाले बाढ़ जैसी असल समस्याओं के बारे में कभी बात नहीं करते हैं। उन्होंने संकट के समय बंगाली हिंदुओं का कभी साथ नहीं दिया। अब अचानक से सक्रिय होकर उनके हितैषी बन रहे हैं। कमल का कहना है, ये शातिर लोग असमी और बंगालियों के वर्षों पुराने रिश्ते को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य के शीर्ष साहित्यिक संगठन असम साहित्य सभा (एएसएस) ने बताया कि 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल असम में स्थानीय भाषा बोलने वाले लोग महज 48.01 प्रतिशत हैं।  आगे पढ़ें

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अमेठी में बुजुर्ग महिला का आरोप, कहा- कांग्रेस ने जबरन डलवाया हमारा वोट

वायरल वीडियो में गौरीगंज ब्लाक के गूजरटोला गांव की बुजुर्ग महिला द्रोपती देवी (72) ने पीठासीन अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसका हाथ पकड़कर जबरदस्ती पंजा पर धर दिहिन। हम देहे जात रहिन कमल पर। महिला का वीडियो अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए अमेठी से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने लिखा, चुनाव आयोग ध्यान दे।  आगे पढ़ें

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बदजुबान नेताओं की नकेल चुनाव आयोग नहीं वोटर के हाथ है...

राज्य की विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों से जिस आचार संहिता की इमानदारी से पालन करने की अपेक्षा की जाती है उसकी उपेक्षा और अनादर करने वाले नेता हर राजनीतिक दल की कमजोरी होते है। खेद की बात यह है कि राजनीतिक दल खुद होकर अपने नेताओं को ऐसी हिदायत कम ही देते है कि वे चुनावी रैलियों अथवा सोशल मीडिया के जरिए ऐसे बयान देने से परहेज करे ,जिनसे धर्म अथवा जाति के नाम पर चुनावों की निष्पक्षता के प्रभावित होने की आशंका हो। read more  आगे पढ़ें

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सोशल मीडिया पर लाइक के चक्कर में लगीं पत्नियां, आई तलाक की नौबत

काउंसलिंग में पत्नियों का कहना है कि उनके पतियों के पास इतना समय नहीं है कि वे अपनी पत्नी की तारीफ करें। ऐसे में जब वे सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करती हैं तो उन्हें कई लाइक्स व कमेंट्स मिलते हैं। इससे उन्हें अपने खूबसूरत होने का अहसास होता है। इसलिए हाउसवाइफ भी मेकअप और ड्रेस पर पूरा ध्यान देती हैं। काउंसलर्स का मानना है कि पत्नियां सोशल मीडिया पर इतनी व्यस्त हो गई हैं कि उन्हें अपने घर की भी जिम्मेदारी का अहसास नहीं है। वे दिनभर में करीब 10 से 12 सेल्फी लेकर वाट्सएप के स्टेटस पर अपलोड कर रही हैं। वहीं पतियों को डर है कि फोटो अपलोड करने से उनकी पत्नियां सायबर क्राइम के चक्कर में न फंस जाएं या कोई ब्लैकमेल न कर लें। ऐसे में दंपती की काउंसलिंग कर समझाने का प्रयास किया जा रहा है।  आगे पढ़ें

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ये कैसी पत्रकारिता...!

आगे बढ़िये। मराठी समाज के उस प्रदर्शन का समाचार फोटो सहित प्रमुखता से छापा गया है, जिसमें प्रज्ञा ठाकुर के बयान की निंदा वाली बात है। अगले किसी पृष्ठ पर अखबार लिखता है कि कांग्रेस तो यह चुनाव विकास और न्याय के नाम पर लड़ रही है, लेकिन भाजपा हिंदुत्व पर ही फिर उतर आयी है। दिवंगत करकरे पर जिस तरह के आरोप लगे, उसकी रोशनी में उनके परिवार की पीड़ा सामने लाना बहुत अच्छा है। लेकिन क्या इतनी ही प्रमुखता से इस परिवार की बातचीत उस समय प्रकाशित की गयी थी, जब दिग्विजय सिंह ने एक समय करकरे की शहादत को हत्या बताया था? एक पत्रकार के नाते में यह स्पष्ट कर दूं कि न तो मैं प्रज्ञा ठाकुर का समर्थक हूं और ना ही मैं दिग्विजय सिंह का विरोधी।  आगे पढ़ें

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मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज सतना नाथ के विधायक, खुद को लोकसभा चुनाव से किया अलग

यह वीडियो सोशल मीडिया में भी चल रहा है। वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं कि मैंने 2015 में इस उम्मीद के साथ कांग्रेस ज्वाइन की थी कि उनके समाज को पार्टी में सम्मानित जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वीडियो में कुशवाहा ने कहा, जब मैंने पार्टी ज्वाइन की थी, तब कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही थी। मप्र में पिछले 15 साल से कांग्रेस की सरकार नहीं थी।  आगे पढ़ें

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