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रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में दलित समुदाय ने दिल्ली में जमकर किया प्रदर्शन, भीम आर्मी चीफ समेत 80 गिरफ्तार

साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की बसों के शीशे तोड़ दिए। कई कारों और बाइकों को आग के हवाले कर दिया। पूरे इलाके में उन्होंने दंगा भड़काने का काम किया। भारी पुलिस बल ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। इससे पुलिस के भी करीब 15 जवान घायल हो गए। मामले में करीब 80 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीआरपीएफ का भी एक जवान शामिल है, जो यहां प्रदर्शन करने आया था। मामले में बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों से भारी संख्या में डंडे और सरिये मिले हैं। हालांकि, किसी से अवैध हथियार और तमंचा मिलने से पुलिस ने इनकार किया है।  आगे पढ़ें

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पूर्व वित्तमंत्री को सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका, मामला सीजेआई के पास भेजा, लटकी गिरफ्तारी की तलवार

चिदंबरम की तरफ से उनके वकील के साथ कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज रमन्ना के सामने याचिका लगाते हुए अपील की कि उन्हें हाईकोर्ट से वक्त नहीं दिया गया ऐसे में उन्हें थोड़ी मोहलत दी जाए लेकिन जस्टिस रमन्ना ने कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया। सिब्बल अपील करते रहे कि इस मामले में फिलहाल गिरफ्तारी पर ही रोक लगा दी जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद अब यह मामला चीफ जस्टिस के सामने पहुंचा है और इसमें तत्काल सुनवाई की संभावना कम है। अब चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है और सीबीआई और ईडी की टीम सुनवाई से पहले गिरफ्तार करने की कोशिश में हैं।  आगे पढ़ें

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पहलू खान मामले में बोले जस्टिस चन्द्रचूड़, कहा- जो मामले कोर्ट की निगरानी में होते हैं उनके नतीजे अच्छे होते हैं

पहलू खान मॉब लिंचिंग केस में अलवर की अदालत ने 14 अगस्त को 6 आरोपियों को बरी कर दिया। अलवर के अपर जिला और सत्र न्यायालय नंबर-1 की जज डॉ. सरिता स्वामी ने फैसला सुनाया था। 16 अगस्त को राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने इस मामले की फिर से जांच के लिए एसआईटी के गठन की घोषणा की थी।  आगे पढ़ें

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अनुच्छेद 370 को वापस लेने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, याचिकाकर्ताओं में पूर्व सैन्य अधिकारी भी शामिल

राज्य में लगी पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्य में स्थिति संवेदनशील है। सरकार पर भरोसा किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने सरकार से पूछा था कि राज्य में और कब तक पाबंदियां रहेंगी। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि 2016 में ऐसी ही स्थिति को सामान्य होने में 3 महीने लगे थे। इससे पहले भी ऐसी ही एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सीजेआई गोगोई ने वकील एमएल शर्मा को कहा था कि मैंने आधे घंटे आपकी याचिका पढ़ी, लेकिन समझ नहीं आया कि इसमें आप कहना क्या चाहते हैं। चीफ जस्टिस ने उन्हें संशोधित याचिका दायर करने को कहा था।  आगे पढ़ें

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चीफ जस्टिस ने अदालतों में अमर्यादित आचरण की घटनाओं पर जताई नाराजगी, कहा-इसे अलग करना जरूरी

सीजेआई गोगोई ने कहा कि अनुचित व्यवहार के उदाहरणों ने सुप्रीम कोर्ट समेत सभी अदालतों का सिर झुकाया है। कुछ समय से भारतीय अदालतों में अमर्यादित आचरण में काफी वृद्धि देखी गई है। गरिमापूर्ण, सुखद विचार-विमर्श और बहस को मुखर और प्रेरित आचरण से दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि स्टेक होल्डर्स जल्दी से उनकी पहचान करें और उन्हें अलग-थलग करें। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस संस्थान की शोभा और गरिमा बनी रहे। सुप्रीम कोर्ट के दशकों पुराने बुनियादी ढांचे को फिर से मजबूत करने का कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने सभी स्टेक होल्डर्स को संवैधानिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पूराने विचारों को दूर करने के लिए कहा।  आगे पढ़ें

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सुप्रीम कोर्ट का अधिवक्ता से सवाल, क्या भगवान राम के वंशज अब भी अयोध्या में रह रहे हैं

पीठ ने कहा, 'हम सिर्फ सोच रहे हैं कि क्या 'रघुवंश' वंश का कोई व्यक्ति अब भी (अयोध्या में) रह रहा है।' पीठ ने कहा कि यह जिज्ञासावश पूछा जा रहा है। पराशरन ने जवाब दिया, 'मुझे जानकारी नहीं है। हम इसका पता लगाने की कोशिश करेंगे।' आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अब अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के चौथे दिन, पराशरन शीर्ष अदालत के सवालों का जवाब दे रहे थे कि 'जन्मस्थानम' (देवता का जन्म स्थान) कैसे 'न्यायिक व्यक्ति' के रूप में माना जा सकता है।  आगे पढ़ें

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रामजन्म भूमि विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 70 साल में अब तक मिले सबूतों की नए सिरे से होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि विवादित ढांचे की देखभाल का दावा करने वाले निमोर्ही अखाड़े ने 22-23 दिसंबर 1949 के बाद मूर्तियों की पूजा के लिए 'सेवायत' होने का दावा किया है। ऐसे में उन्हें जमीन के राजस्व भुगतान या अकाउंट की जानकारी जैसे दस्तावेज पेश करने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सबूत आपके पक्ष को मजबूत कर सकते हैं। इसके जवाब में निमोर्ही अखाड़े ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप हमें राम जन्मभूमि से जुड़े असली दस्तावेज दिखाएं। जिसके बाद निमोर्ही अखाड़े के वकील ने जवाब दिया कि सभी दस्तावेज इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजमेंट में दर्ज हैं।  आगे पढ़ें

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अयोध्या विवाद सुलझाने सुप्रीम कोर्ट आज से रोजाना करेगा सुनवाई

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार से रोजाना सुनवाई शुरू होगी। यह सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। उधर, संघ विचारक केएन गोविंदाचार्य ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में नियमित सुनवाई की रिकॉर्डिंग या सीधे प्रसारण के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जल्द सुनवाई के लिए भी यह मामला जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की बेंच के सामने रखा गया था।  आगे पढ़ें

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अयोध्या मामले में नाकाम रहा मध्यस्थता पैनल, अब 6 अगस्त से रोजाना होगी सुनवाई

अयोध्या भूमि विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए गठित मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैनल किसी स्थायी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया। अब इस मामले की 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी कहा कि अब इस मामले की सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता है। पैनल ने गुरुवार को बंद लिफाफे में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलिफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे।  आगे पढ़ें

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उन्नाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई अफसर को 12 बजे तक कोर्ट में पेश होने का दिया आदेश

इसी बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई को बताया कि उनकी लखनऊ में मामले की जांच कर रहे सीबीआई डायरेक्टर से बात हुई है। डायरेक्टर का कहना है कि केस की जांच लखनऊ मे चल रही है, इसलिए रिकार्ड वहीं हैं। ऐसे में जांच अधिकारियों का 12 बजे तक दिल्ली पहुंचना मुमकिन नहीं होगा। मेहता ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक टालने की अपील की, हालांकि सीजेआई ने इससे इनकार कर दिया।  आगे पढ़ें

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