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10 प्रतिशत कोटा: केंद्रीय संस्थानों में बढ़ेंगी 2 लाख से ज्यादा सीटें, 4300 करोड़ रुपये मंजूर

सरकार ने इसके लिए 4300 करोड़ रुपये मंजूर किए। इस फंड से केंद्रीय संस्थानों में नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा और 4 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती होगी। सूत्रों के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मंत्रिमंडल में इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले निर्वाचन आयोग की अनुमति मांगी थी क्योंकि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लगी हुई है।  आगे पढ़ें

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आम चुनाव से पहले सीएम नाथ का बड़ा दांव, सामान्य को 10 और पिछड़ा वर्ग को दिया 27 फीसदी आरक्षण

मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा पर सपाक्स का कहना है कि सरकार चाहकर भी इसे पूरा नहीं कर सकती है, क्योंकि ऐसा करना संविधान के विरुद्ध होगा। उल्लेखनीय है कि रामजी महाजन आयोग ने वर्ष 1998 में पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके खिलाफ लोग अदालत चले गए और यह सिफारिश आज तक पूरी नहीं हो सकी। प्रदेश में वर्तमान में अनुसूचित जाति को 16, जनजाति को 20 और पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। इस तरह तीनों वर्गों को मिलाकर 50 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है  आगे पढ़ें

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पीएम का विपक्ष पर हमला, कहा- हमारे फैसले में ताकत नहीं होती तो विपक्ष की नींद नहीं उड़ती

प्रधानमंत्री ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केंद्र के फैसले का जिक्र करते हुए विपक्ष पर आरोप लगाया, 'यदि हमारे फैसले में ताकत नहीं होती तो इन लोगों की रात की नींद नहीं उड़ी होती। उन्हें अब मैदान में उतरकर झूठ फैलाना पड़ रहा है। इसका मतलब है कि हमने सही काम किया और देश के लिए काम किया।' नए आरक्षण को लागू करने के लिए शिक्षण संस्थानों में सीटों की कमी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'मैं आश्वासन देना चाहता हूं कि हम हर शिक्षण संस्थानों में 10 फीसद सीटें बढ़ाएंगे ताकि आरक्षण के बावजूद सभी को मौका मिले।' उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी के साथ नाइंसाफी न हो और अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण जस का तस रहे।  आगे पढ़ें

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दोनों सदनों में पास हुआ सवर्ण आरक्षण कोटा, अगर आप लेना चाहते हैं फायदा तो इन कुछ कागजों को रखना होगा तैयार

सदन में बिल को लेकर हुए मतदान में इसके विरोध में 7 वोट पड़े। सरकार ने यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया है जिसकी वजह से राज्यों की विधानसभाओं से इसे पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसदी आरक्षण की यह व्यवस्था केंद्र और राज्य की सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रभावी हो जाएगी।  आगे पढ़ें

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राज्यसभा में पारित हुआ सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण बिल, बिल के समर्थन में 165 विरोध में पड़े सात मत

इससे पहले बिल को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजने के लिए कनिमोझी ने प्रस्ताव रखा था। हालांकि वोटिंग के दौरान इसके पक्ष में 18 और खिलाफ में 155 वोट पड़े। इसके साथ ही बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने की मांग खारिज हो गई। उधर, विधेयक पास होने के बाद बीजेपी चीफ अमित शाह ने ट्वीट कर इसका समर्थन करने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।  आगे पढ़ें

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सवर्ण आरक्षण: राज्यसभा में आज सरकार की होगी परीक्षा, बहुमत के लिए एक तिहाई वोट जरूरी

सरकार को लोकसभा में बिल पास कराने में कोई परेशानी नहीं हुई। उपस्थित 326 सदस्यों में से 323 ने बिल के समर्थन में वोट दिया और महज 3 सदस्यों ने विरोध में वोट दिया। सरकार की असली परीक्षा राज्यसभा में है क्योंकि यहां उपस्थित सदस्यों में से दो-तिहाई का समर्थन पाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा में 246 सदस्य हैं और अगर सभी सदस्य वोटिंग में हिस्सा लेते हैं तो बिल को 164 वोट की जरूरत पड़ेगी। विपक्ष यहां अपने दबदबे का इस्तेमाल कर सकता है।  आगे पढ़ें

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