होम सपाक्स
supplier-candidate-from-bhopal-asks-for-help-from-

भोपाल से सपाक्स प्रत्याशी ने मांगे वोट के साथ नोट, बैंक खाता जारी कर जनता से मांगी मदद

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी और उपाध्यक्ष एवं भोपाल से प्रत्याशी डॉ. घाणेकर ने कहा कि भोपाल सीट से एक तरफ भाजपा की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हैं, जो साध्वी होते हुए कर्कश भाषा का प्रयोग करती हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह हैं। जिनकी चतुर चालों से मतदाता वाकिफ हैं। त्रिवेदी ने कहा कि ऐसे में डॉ. घाणेकर को समर्थन देकर संसद में भेजें। ताकि संसद में वे निर्भीक होकर सही को सही कह सकें। वे कहते हैं कि डॉ. घाणेकर ने नैतिकता और सिद्धांतों पर आधारित जीवन जिया है।  आगे पढ़ें

spacks-launches-nine-lok-sabha-candidates-in-madhy

मध्यप्रदेश में सपाक्स ने उतारे नौ लोकसभा प्रत्याशी, भोपाल से वीणा घाणेकर को दिया टिकट

सपाक्स ने नामांकन दाखिल होने की आखिरी तारीख से ठीक पहले भोपाल सीट से वीणा घाणेकर को चुनाव में उतारा है। इस सीट से त्रिवेदी ने उतरने का दावा किया गया था, लेकिन वे फिलहाल चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। त्रिवेदी ने बताया कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मैदान में उतारती, तो मैं मैदान में उतरता।  आगे पढ़ें

sweeps-to-create-ambition-against-diggi-contesting

भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे दिग्गी के खिलाफ माहौल तैयार करेगी सपाक्स

पदाधिकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि संस्था ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनके पास समस्या सुनने का समय नहीं है। निवेदन के बाद भी सपाक्स के प्रतिनिधिमंडल को मिलने के लिए नहीं बुलाया गया। बैठक में कहा गया कि सपाक्स वर्ग को लेकर दोनों दलों की नीतियां समान हैं। संस्था ने सात अप्रैल को नवसंवत्सर मनाने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम में सपाक्स समाज संस्था को भी आमंत्रित किया जा रहा है। यहीं दोनों प्रमुख पार्टियों के खिलाफ सपाक्स वर्ग को इकठ्ठा करने की रणनीति बनाई जाएगी।  आगे पढ़ें

khandelwal-becomes-bjps-former-leader-close-to-uma

उमा के करीबी रहे भाजपा के पूर्व नेता खंडेलवाल बने सपाक्स के प्रदेश अध्यक्ष

सपाक्स प्रदेश की 15 सीटों पर लोकसभा का चुनाव खंडेलवाल के नेतृत्व में लड़ेगी। रविवार को पार्टी के सम्मेलन में न सिर्फ खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ। बल्कि प्रदेश की 15 सीटों से चुनाव मैदान में उतरने वाले नेताओं के नामों पर चर्चा भी हुई। इसके अलावा अन्य आठ राज्यों की प्रमुख लोकसभा सीटों से उतरने वाले संभावित प्रत्याशियों के नाम पर भी चर्चा हुई है। पार्टी सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी और नौ राज्यों की प्रमुख सीटों से भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की सूची जारी कर सकती है।  आगे पढ़ें

before-going-to-the-polling-place-spacc-will-condu

चुनाव मैदान में उतरने से पहले सपाक्स 31 मार्च को करेगी सम्मेलन, फिर करेगी प्रत्याशी घोषित

सूत्र बताते हैं कि 31 मार्च के सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा मुमकिन है। वहीं लोकसभा चुनाव में उतारे जा रहे प्रत्याशियों के नाम भी घोषित होंगे। इसे लेकर 29 मार्च से चुनाव समिति की बैठकें शुरू हो जाएंगी।सपाक्स पार्टी मप्र की भोपाल, इंदौर, मंदसौर, गुना, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, रीवा, सीधी, सतना, मंडला, जबलपुर, सिवनी, सागर और दमोह लोकसभा सीट से प्रत्याशी उतार रही है तो उत्तर प्रदेश में वाराणसी, अमेठी, बाराबंकी, हरिद्वार, सीतापुर, लखनऊ और इलाहाबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी उतारेगी। इसके अलावा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तराखंड की कुछ सीटों से भी पार्टी प्रत्याशी उतार रही है।  आगे पढ़ें

digvijay-will-present-the-election-of-sapaks-hiral

दिग्गी को चुनाती पेश करेंगे सपाक्स के हीरालाल त्रिवेदी, बैठक में फैसला

माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह भोपाल या इंदौर से चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में सपाक्स के अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी उनकी सफलता में रोड़ा बनने की कोशिश करेंगे। दरअसल, ऐसा कर पार्टी अपने गुस्से का इजहार करना चाहती है, क्योंकि दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में ही मध्य प्रदेश में आरक्षण विधेयक पारित किया गया था और उसके बाद ही सामान्य, पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरक्की के रास्ते बंद हो गए। इसे देखते हुए समन्वय समिति ने इस चुनाव में दिग्विजय सिंह के खिलाफ पूरी ताकत झोंकने का इरादा कर लिया है।  आगे पढ़ें

lok-sabha-elections-2019-suppx-to-contest-56-seats

लोकसभा चुनाव 2019: मध्यप्रदेश सहित देश के नौ राज्यों की 56 सीटों पर चुनाव लड़ेगी सपाक्स

त्रिवेदी ने दावा किया कि पार्टी की विधानसभा चुनाव की तुलना में अच्छी स्थिति है और वे प्रस्तावित सीटों पर जीत दर्ज कराएगी। इसीलिए मप्र सहित हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, नईदिल्ली और कर्नाटक की एक सीट से प्रत्याशी उतारे जा रहे हैं। त्रिवेदी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि पार्टी जाति के आधार पर आरक्षण के खिलाफ है और इसके लिए लड़ाई जारी रहेगी।  आगे पढ़ें

savarnon-ko-10-pratishat-aarakshan-par-bolee-spx-k

सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण पर बोली सपाक्स, कहा- यह चुनावी लॉलीपॉप

अब तक आरक्षण के नाम से बचती आ रही कांग्रेस ने भी इस मसले पर अपने विचार रखे हैं। कांग्रेस के नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि पार्टी हमेशा से सवर्ण वर्ग के गरीबों को सुविधाएं देने के पक्ष में है, लेकिन सिंह ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए संविधान में संशोधन किए बगैर इसे महज जुमला बताया।  आगे पढ़ें

maee-ka-laal-ke-baad-ke-modee

‘माई का लाल’ के बाद के मोदी

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद के दम्भ में जिस समय पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मदमस्त आचरण दिखाया था, तब उनके साथ-साथ मोदी ने भी कल्पना नहीं की होगी कि इसका क्या परिणाम होगा। सपाक्स भले ही राजनीतिक गलियारों में दमदार उपस्थिति दर्ज न करवा सका हो, किंतु सामाजिक स्तर पर उसने वह हलचल मचा दी, जिसके चलते कहीं नोटा का असर दिखा तो कहीं सवर्ण बाहुल्य वाली सीटों पर भाजपा के मत प्रतिशत कमी दर्ज की गयी। जाहिर कि एट्रोसिटी एक्ट को लेकर फैली विपरीत गरम हवा के थपेड़ों ने भी मोदी की नींद उड़ा दी है। उनकी स्वाभाविक चिंता आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर है। मोदी की काबीना मंत्री स्मृति ईरानी भी दो दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 2019 सभी के लिए मुश्किल होने वाला है कह चुकी हैं। सीधी सी बात है कि उनका भी इशारा आम चुनाव की ओर था और मोदी की सवर्णों के प्रति यह चिंता भी खालिस सियासी स्वरूप की है। read more  आगे पढ़ें

treat-the-disease-not-sick

बीमारी का इलाज कीजिए, बीमार का नहीं

सवाल यह कि इस समूह का नेतृत्व किसके नाम किया जाए। सपाक्स वाले हीरालाल त्रिवेदी या करणी सेना के लोकेंद्र सिंह कालवी या फिर अन्य सत्तर संगठनों के लोग? नेतृत्व का सवाल गैर-वाजिब नहीं है। क्योंकि मामला केवल विरोध करने या हक मांगने का नहीं रह गया है। मामला सियासी हो चुका है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर आरक्षण के विरोधी सपाक्स के लोगों ने राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इसलिए यह पड़ताल जरूरी है कि 230 उम्मीदवारों का नेता कौन होगा। त्रिवेदी की नीयत और कालवी की ताकत पर कोई शक-शुबहे की गुंजाइश नहीं है। सितंबर की सितमगर धूप से अविचलित होकर नारेबाजी करते अन्य सत्तर संगठनों ने भी जता दिया है कि वह आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं। तो फिर, नेतृत्व की बात तो तय करना ही होगी। read more  आगे पढ़ें

Previous 1 2 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति