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दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित पंचतत्व में हुई विलीन, मनमोहन सिंह और अमित शाह अंतिम संस्कार में हुए शामिल

दिल्ली में कांग्रेस के आॅफिस का झंडा आधा झुका हुआ है। अपने विनम्र स्वभाव से उन्होंने न सिर्फ आम लोगों का दिल जीता, बल्कि विरोधी भी उनके काम और लगन के कायल हैं। दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी स्तर पर काम कराए और सड़कों व फ्लाईओवरों के निर्माण से उन्होंने शहर के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव कर दिए। उन्होंने बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, दिल्ली मेट्रो के साथ ही स्वास्थ्य और शैक्षणिक क्षेत्र के विकास में भी काफी काम किया। शीला दीक्षित ने साल 1998 से 2013 तक के अपने 15 साल के शासन के दौरान दिल्ली का चेहरा पूरी तरह से बदलकर रख दिया। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित का 81 साल की उम्र में निधन, पीएम समेत कई बड़े नेताओं ने जताया दुख

कांग्रेस में शीला दीक्षित का कद कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे दिल्ली में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं। बतौर सीएम 15 साल यानी 1998 से 2013 तक दिल्ली में उनका सिक्का चलता था। हालांकि दिसंबर 2013 में अरविंद केजरीवाल के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में पार्टी ने उन्हें केरल राज्यपाल बना दिया, लेकिन शीला ने 25 अगस्त 2014 को इस पद से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति में लौट आईं।  आगे पढ़ें

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दिल्ली कांग्रेस में चल रहा पावर गेम का खेल, चाको और शीला एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कर रहे कोशिश

प्रदेश कांग्रेस में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे दोनों प्रमुख नेता एक-दूसरे के खिलाफ न केवल हमलावर हो गए हैं, बल्कि एक-दूसरे को कमजोर साबित करने में जुटे हैं। एक तरफ प्रदेश प्रभारी पीसी चाको वर्किंग प्रेजिडेंट के अधिकार बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ शीला दीक्षित ने एक वर्किंग प्रेजिडेंट को पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए हैं। इस बीच प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना है कि शीला दीक्षित की अगुवाई में वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। सूत्रों का कहना है जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फैसला नहीं हो जाता है, तब तक प्रदेश में इसी तरह उठापटक होगी। इससे पार्टी और संगठन दोनों को भारी नुकसान हो रहा है।  आगे पढ़ें

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लोकसभा के परिणाम तय करेंगे शीला दीक्षित का भविष्य, हार पर बदलाव के संकेत

एग्जिट पोल को नकारते हुए प्रदेश कांग्रेस कम से कम दो सीटों पर जीत पक्की मान कर चल रही है। नॉर्थ-ईस्ट की सीट जहां से शीला दीक्षित उम्मीदवार हैं और नई दिल्ली की सीट जहां से अजय माकन चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा, पार्टी खुद को चांदनी चौक लोकसभा सीट पर भी जीत मान रही है। इससे अलग पार्टी के अंदर अभी से अगले चुनाव के लिए हलचल शुरू हो गई है, रिजल्ट आने से पहले ही कयास शुरू हो गए हैं कि विधानसभा का चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाए। पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि शीला की जीत और हार पर बहुत कुछ निर्भर है। अगर वह अपनी सीट जीत जाती है तो अलग स्थिति होगी और हार जाती है तो भी अलग स्थिति होगी। उनकी जीत और हार पर सब निर्भर है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा दे चुके अजय माकन की भी जीत और हार पर आगे का भविष्य निर्भर है।  आगे पढ़ें

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दिलचस्प हुआ दिल्ली लोकसभा चुनाव, सितारों के मैदान में उतरने से बढ़ी रौनक

कांग्रेस के सभी सात उम्मीदवारों- पूर्वी दिल्ली से अरविंदर सिंह लवली, चांदनी चौक से जयप्रकाश अग्रवाल, नई दिल्ली से अजय माकन, उत्तर पश्चिम दिल्ली से राजेश लिलोठिया, पश्चिमी दिल्ली से महाबल मिश्रा, उत्तर पूर्वी दिल्ली से शीला दीक्षित और दक्षिणी दिल्ली से ओलिंपिक कांस्य विजेता विजेंदर सिंह ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं।  आगे पढ़ें

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दिल्ली में गठबंधन को लेकर अनिर्णय की स्थिति, सात सीटों पर कांग्रेस लड़ेगी अकेले चुनाव

पार्टी के एक नेता के मुताबिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन को नई दिल्ली सीट, शीला दीक्षित को चांदनी चौक, पहलवान सुशील कुमार को पश्चिमी दिल्ली, रमेश कुमार को दक्षिण दिल्ली, जे.पी.अग्रवाल को उत्तर पूर्व दिल्ली और राजकुमार चौहान को उत्तर पश्चिम दिल्ली का उम्मीदवार तय किया गया है। बता दें कि दिल्ली में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन की आखिरी तारीख जहां 23 अप्रैल को है वहीं अब तक राजनीतिक पार्टियों की तरफ से उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। राष्ट्रीय राजधानी की सभी सात सीटों पर छठे चरण के तहत 12 मई को मतदान होने हैं।  आगे पढ़ें

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शीला दीक्षित हो सकती है दिल्ली ईस्ट से कांग्रेस उम्मीदवार, मनाने में जुटे राहुल गांधी

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब गठबंधन के बिना चुनाव की लड़ाई के मूड में दिख रही है। इसलिए पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया है और विपक्ष को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी अपने सबसे सीनियर और अनुभवी नेता को मैदान में उतारने का फैसला किया है। सूत्रों की मानें तो नई दिल्ली, चांदनी चौक, नॉर्थ-ईस्ट और नॉर्थ-वेस्ट की उम्मीदवारी तय होने के बाद जब साउथ दिल्ली का मसला आया तो इस सीट को टाल दिया गया। क्योंकि यहां से पूर्व सांसद रमेश कुमार का नाम आ रहा था और पार्टी अभी किसी भी प्रकार का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि इसका असर पंजाब तक पड़ सकता है, इसलिए इस सीट पर उम्मीदवारी को पेंडिंग में डाला दिया गया।  आगे पढ़ें

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दिल्ली में गठबंधन को सस्पेंस खत्म, राहुल गांधी आप से नहीं करेंगे गठजोड़

कांग्रेस द्वारा कोई आधिकारिक बयान जारी होने से पहले ही केजरीवाल ने पीटीआई से कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में लोकसभा चुनावों के लिए आप से गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के बताया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने राहुल गांधी के साथ बैठक की थी लेकिन उन्होंने गठबंधन से इनकार कर दिया था।'  आगे पढ़ें

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भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए दिल्ली में आप से गठबंधन जरूरी: चाको

गठबंधन के लिए नए सिरे से सर्वे होने से शीला दीक्षित के नाराज होने की बात कही जा रही है। उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है। चाको ने कहा, 'दिल्ली कांग्रेस के पास गठबंधन को लेकर कोई अनुभव नहीं है, हम शीला दीक्षित को पार्टी के हित में मना लेंगे।' सूत्रों का कहना है कि यह चुनाव पार्टी के लिए काफी अहम है। कांग्रेस को हर हाल में बीजेपी को सत्ता में दोबारा आने से रोकना है। ऐसे में पार्टी की सोच यह है कि बीजेपी को सातों सीट गिफ्ट में न मिलें। इसके लिए गठबंधन जरूरी है।  आगे पढ़ें

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बैकफुट पर शीला दीक्षित, आप से गठबंधन के लिए राजी हुई कांग्रेस, जल्द होगी घोषणा

दिल्ली की बात करें तो 2017 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 22 और आप को 28 फीसद मत मिले थे, जबकि भाजपा का मत फीसद 35 फीसद रहा था। ऐसे में अगर आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो दोनों का मत फीसद 50 हो जाएगा। पार्टी के हित में भी यही है कि दिल्ली में त्रिकोणीय मुकाबले से बचा जाए। चाको ने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि बड़े दुश्मन को हराने के लिए भी यह गठबंधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सात सीटों का बंटवारा भी मुश्किल नहीं है। आप सीटों के आधे-आधे बंटवारे पर तैयार है।  आगे पढ़ें

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