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ये रिश्ता क्या कहलाता है..!

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कल कह दिया कि वह कभी भी गुस्सा नहीं होते। बात की सोदाहरण व्याख्या की गरज से उन्होंने यह भी कह दिया कि जब उन्हें भाजपाई शिवराज सिंह चौहान पर ही क्रोध नहीं आता है तो भला कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए यह भाव वे किस तरह अपना सकते हैं। बात रोचक है। लेकिन सत्यान्वेषण की मोहताज भी है। क्योंकि शिवराज पर उन्हें गुस्सा न आना उतना ही सही तथ्य है, जितना बड़ा झूठ यह कि मुख्यमंत्री को सिंधिया पर क्रोध नहीं आया। दिल्ली में मीडिया से सिंधिया के लिए ..तो उतर जाएं वाली बात नाराजगी का सीधा प्रतीक थी।  आगे पढ़ें

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शिवराज का दर्द......

शिवराज सिंह चौहान आईफा अवार्ड को लेकर कहें कि कांग्रेस सरकार पर सत्ता का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है तो अफसोस के साथ हंसी आना स्वाभाविक है। गोपाल भार्गव की प्रतिक्रिया को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर स्वाभाविक और रस्मी आलोचना मानना चाहिए। लेकिन अब अगर कोई पुराना पापी, पाप करने के नए बने अधिकारी को उसके पाप गिनाए तो भैया, थोड़ा समझ में आना मुश्किल है। कमलनाथ तो फिर भी वल्लभ भवन, दिल्ली और छिंदवाड़ा तक खुद को समेट कर रखे हैं। इसलिए थोड़ा कुछ तो कम खर्च हो रहा होगा। वरना, जितना आए दिन शिवराज के प्रदेश भर में कार्यक्रम होते थे, और उनमें भीड़ जुटाने के लिए सरकार का जितना पैसा पूड़ी और पानी की बोतल पर खर्च होता था, वो भी तो आखिर जिम्मेदार अफसर जनता की जेब से ही निकालते होंगे।  आगे पढ़ें

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आईफा अवॉर्ड को लेकर शिवराज ने साधा निशाना, कहा- करोड़ों रुपए उड़ाने के लिए सरकार बावली, अतिथि विद्वानों की हाय ले डूबेगी

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में आयोजित होने वाले आईफा अवार्ड समारोह को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोमवार को ट्वीट किया कि कांग्रेस सरकार पर सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है। अतिथि विद्वानों और उनके परिवार की पीड़ा दूर करने और उनका हक देने की बजाय करोड़ों रुपए आईफा अवॉर्ड की चकाचौंध पर उड़ाने के लिए सरकार बावली है। अतिथि विद्वानों के बच्चों और परिवार की हाय सरकार को ले डूबेगी। अतिथि विद्वान नियमितिकरण की मांग कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि सरकार पहले प्रदेश की समस्याओं का हल करे।  आगे पढ़ें

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भाजपा की ऊहापोह....

शिवराज सिंह चौहान की अतिसक्रियता मुझे भ्रम में डालती है। भ्रम यह है कि क्या वाकई भाजपा ने तय कर लिया है कि अगले पांच साल उसे किस भूमिका में रहना है? अगर उसे विपक्ष की भूमिका निभानी है तो विपक्ष के तेवर और धार तो ट्विटर छोड़ कर सड़क पर संघर्ष से ही सामने आएंगे। और अगर भाजपा नेताओं के जेहन में है कि कमलनाथ सरकार को कभी भी चलता करना है तो फिर उसे तय करना होगा कि उसका अगला नेतृत्व क्या होगा? क्या शिवराज सिंह चौहान वाकई कमलनाथ सरकार के खिलाफ हैं? या फिर तब तक उनकी रस्मी खिलाफत ऐसी ही चलती रहेगी, जब तक यह तय नहीं हो जाता कि इस बार भी मौका उनके ही हाथ आएगा। कांग्रेस या भाजपा के एक-दो विधायक कम-ज्यादा हो जाने से सरकार की स्थिरता और अस्थिरता को लेकर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। फर्क अगर पड़ेगा तो इससे कि भाजपा के नेता और खासकर शिवराज अपने लिए कौन सी भूमिका तय करने के इच्छुक हैं? read more  आगे पढ़ें

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कुछ पूंछ वाले वफादार हैं.....

राजगढ़ में चर्चा में आर्इं दोनों अफसर महिलाएं हैं। बोल्ड हैं। इसकी तो तारीफ करने में कोई परहेज नहीं होना चाहिए। जरूरतमंद किसी महिला को यदि कलेक्टर खुद अपना खून देने पहुंच जाएं तो इसे संवेदनशीलता का श्रेष्ठ उदाहरण भी माना जाना चाहिए। लेकिन एक राजनीतिक दल के प्रदर्शनकारियों पर जिनमें पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री तक शामिल हो, उसमें घुस कर कलेक्टर मुक्के बरसाए तो बात वाकई हजम होने वाली नहीं है। मैंने भोपाल में भाजपा और कांग्रेस के ढेरों राजनीतिक कार्यक्रम कवर किए हैं। इसलिए महिलाओं के साथ व्यवहार में कांग्रेस और भाजपा का फर्क मुझे अकेले ही नहीं, ढेरों पत्रकारों को समझ में आता है। इसलिए यह भी थोड़ी ताजुब्ब वाली बात है कि डिप्टी कलेक्टर की किसी कार्यकर्ता ने पहले चोटी खिंची होगी। एक बार मारपीट की नौबत अगर आ गई होगी तो फिर यह भी संभव हो सकता है।  आगे पढ़ें

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गजब की ये गला लगाई

प्रदेश सरकार के शरीर में दिग्विजय सिंह का स्थान नाक से कम नहीं है। इधर, इंदौर की सियासत में कैलाश विजयवर्गीय की भी यही भूमिका है। भाई लोगों ने अपने-अपने तरीके से यह अहम मुकाम हासिल किया है। इसलिए आज इंदौर में जब दो नाक यानी दिग्विजय और कैलाश एक-दूसरे से हाथ मिलाते साथ ही लिपट गये तो इसकी सियासी व्याख्या नहीं की जाना चाहिए। न कांग्रेसियों और न ही भाजपाइयों को यह शिकायत हो कि क्यों उनके नेता ने विरोधी गुट की शख्सियत के साथ ऐसा सामीप्य जताया।  आगे पढ़ें

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सीएम ने शिवराज के पत्र का दिया जवाब, कहा- नहीं खुलेंगी नई शराब दुकानें, माफिया पर सख्ती से लगेगा अंकुश

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि राज्य सरकार माताओं और बहनों की सुरक्षा, नागरिकों के स्वास्थ्य और युवाओं के अच्छे भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। यह कहना आधारहीन हैकि नई आबकारी नीति में उप-दुकान खोलने के प्रावधान से नई शराब की दुकानें खुल रही हैं। यह जनता के बीच में भ्रम फैलाने की घृणास्पद राजनीति है। कमल नाथ ने कहा कि नई नीति से प्रदेश में शराब की दुकानें नहीं बढ़ेंगी बल्कि अवैध व्यापार करने वाले माफिया पर सख्ती से अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने नई आबकारी नीति की सत्यता जानने के बजाय जो अनर्गल प्रलाप किया है, उससे साफ है कि वे सिर्फ प्रचार पाने के लिए असत्य और भ्रामक बातें कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सच यह है कि उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा शराब की दुकाने खोली गईं।  आगे पढ़ें

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विजयवर्गीय के बयान पर शिवराज ने कहा- क्या जनता की आवाज उठाने पर मुकदमे बनाए जाएंगे

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को इंदौर आए। यहां मीडिया से चर्चा में उन्होंने भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के इंदौर में आग लगा देता वाले बयान पर कहा कि अब क्या जनता की आवाज उठाने पर मुकदमे बनाए जाएंगे? कितनों के खिलाफ मुकदमे करेंगे? विजयवर्गीय ने आंदोलन की आग की बात कही थी। मैं भी कह रहा हूं कि आंदोलन की आग लगेगी।  आगे पढ़ें

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किसे जीप कहें, किसे इल्ली!!!

दिग्विजय सिंह की इस सलाह का ज्यादातर मंत्रियों ने पालन क्यों नहीं किया कि उन्हें भाजपा शासनकाल के ओएसडी को अपने स्टाफ में नहीं रखना चाहिए। हालांकि दिग्विजय सिंह यह बेहतर जानते भी होंगे कि जो स्टाफ में आए हैं, वे पहले भी उनकी सरकार के मंत्रियों के रह चुके भरोसे के ही लोग है जिन्होंने भाजपाईयों का भी भरोसा हासिल कर लिया था। यहां फिर एक सच्चे किस्से का जिक्र जरूरी हो जाता है। पटवा सरकार की बर्खास्तगी और दिग्विजय सिंह सरकार बनने के बाद मंत्री बने एक सज्जन अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। वह मंत्री शाम ढलने के बाद वाले अंगूर की बेटी के साये तले समय बिताते थे। उसी सुरूर में उन्होंने एक बात बताई थी। कहा कि पटवा शासनकाल में उन्हीं के विभाग के ओएसडी रहे एक अफसर ने फिर इसी पद के लिए आवेदन दिया है। अफसर ने मौखिक साक्षात्कार में यह बताया है कि जिस तरह वह पूर्व मंत्री की दैहिक एवं भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता था, वैसा ही वर्तमान मंत्री के लिए भी कर सकता है। यह सिस्टम पर जोंक की तरह चिपके उस अफसर की योग्यता का वह अलिखित अंश था, जिस पर उसे सबसे अधिक गर्व महसूस हो रहा था।read more  आगे पढ़ें

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पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को रीवा निगमायुक्त ने भेजा 5 करोड़ का नोटिस, शिवराज पर भी साधा निशाना

रीवा नगर निगम आयुक्त सभाजीत यादव ने पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल को पांच करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी निशाना साधा है। यादव ने नोटिस में कहा है कि आपने (शुक्ल ने) सार्वजनिक मंच से मेरा मानसिक संतुलन ठीक नहीं होने की बात कही। यह भी कहा कि आपके शासनकाल में मुझे वल्लभ भवन में बंद करके रखा गया और जंजीर से जकड़ दिया गया। इससे मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा गिरी है।  आगे पढ़ें

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