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शिवराज की संबल योजना और कमलनाथ का नया सवेरा कार्ड

मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना यानी संबल योजना के तहत बने श्रमिकों के कार्ड अब नए सिरे से बनेंगे। कमलनाथ सरकार ने इन्हें नया बनाने का फैसला लिया है। राज्य सरकार ने योजना का नाम भी बदल दिया है। अब योजना का नाम संबल योजना नहीं बल्कि नया सवेरा नाम होगा।  आगे पढ़ें

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मजबूर दोधारी तलवार पर चलने की

भोपाल के डीआईजी इरशाद वली और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव केके सिंह की चतुराई या नादानी के बारे में मैं नहीं जानता। इसलिए मुझे नहीं पता कि कल शिवराज सिंह चौहान द्वारा जमकर पिलायी गयी डांट के बाद इन अफसरान की हालत क्या है, लेकिन इतना तो जानता ही हूं कि दोनो बे-वजह नप गये। वली का अपने स्तर पर तो यह साहस हो ही नहीं सकता था कि आदिवासियों को शहर में प्रवेश करने से रोक दें। सिंह भी यह दुस्साहस नहीं कर सकते थे कि मुख्यमंत्री से बात किए बगैर यह कह दें कि जिस जमीन पर अधिकार बताया जा रहा है, वह दरअसल गलत तरीके से किये गये कब्जे का मामला है। दोनो के ऐसे करने और कहने की डोर ऊपर से बंधी हुई थी। बदले में यह हुआ कि मीडिया ने चटखारे लेकर उनकी बेइज्जती की खबर सार्वजनिक कर दी। खैर, जो हुआ सो हुआ। देखने वाली बात यह है कि इसके बाद आगे और क्या होगा? शिवराज ऐसे तीखे तेवर दिखाकर सफल रहे। मुख्यमंत्री ने उनसे ही सहयोग मांग लिया, पूरी नाटकीयता के साथ। उसी ड्रामेबाजी से शिवराज ने नाथ को सहयोग करने की बात कह दी। यानी फिलहाल मामला, लड़ाई-लड़ाई माफ करो...पर पहुंच गया है।  आगे पढ़ें

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युवक की मौत का मामला: शिवराज ने कहा- प्रदेश सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं, पुलिस हुई निरंकुश

शिवराज सिंह ने पुलिस की पिटाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "युवक की कार बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग से टकरा गई थी। ये ऐसी घटना ऐसी नहीं थी कि पुलिस युवक को पीट-पीटकर मार डाले। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ सस्पेंशन के बजाए इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि, "मध्य प्रदेश में गरीबों को सताया जा रहा है, विरोध करता है तो झोपड़ी को आग लगा दी जाती है। उस आग में कूदकर एक बहन ने जान दे दी। क्या गरीबों को ऐसा जताया जाएगा, आदिवासियों को सताने का भी मामला सामने आया है। गरीबों के कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं। अन्याय की अति हो गई है।  आगे पढ़ें

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अब माफ भी करों शिवराज....

माननीय, हमने तो भोपाल के जम्बूरी मैदान पर वह दृश्य भी देखा है, जब आपने नरेन्द्र मोदी की तुलना में लालकृष्ण आडवाणी को अधिक तवज्जो दी थी। हाय! आंखें फूट जाएं , जो आज यह देखना पड़ रहा है कि इन्हीं मोदी ने आपको जम्बूरी मैदान वाले भोपाल से दूर करने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। ईमान से कहता हूं, ये सदस्यता-फदस्यता अभियान जैसे खालिस शाकाहारी काम आपको शोभा नहीं देते। न लच्छेदार बातें करने का मौका। न ही सरकारी खजाने का गला घोंटकर योजनाओं के जरिये वोट पकाने की जुगाड़। ले-देकर वही पार्टी की रीति-नीति वाली बातें। आप इस सबके लिए नहीं बने हैं। आग लगे ऐसे मतदाता को, जो आपको चार या छह सीट और देने की उदारता नहीं दिखा सका। ठठरी बंधे उस वोटर की भी, जिसने मोदी को स्पष्ट बहुमत देकर उन्हें आपकी दुर्गति करने के लिए एक बार फिर पूरी तरह सक्षम बना दिया। बताइये जरा, आप चीखते रहे माफ करो महाराज और एक ये मोदी हैं, बगैर चीखे कर दिया, माफ करो शिवराज।  आगे पढ़ें

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प्रदेश में भाजपा का संकट

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जिस तरह के परिणाम आए हैं, उसमें यह भी संभव नहीं है कि शिवराज दिल्ली में कोई बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। केंद्र में सरकार का काम गति पकड़ चुका है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा। इसके बाद जो होगा, उसकी एक तयशुदा प्रक्रिया यह हो सकती है कि शिवराज को दिल्ली तक सीमित कर दिया जाए। इससे विजयवर्गीय या फिर जिसे भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगे बढ़ाना चाहे उसे अपने भावी कदम तय करने में सुविधा हो। इसके अलावा अब राकेश सिंह और सुहास भगत के लिए भी शिवराज की छाया से मुक्त होकर खुलकर काम करने का अवसर प्रकट हो जाना तय है। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में अपनी मार्कशीट में फर्स्ट डिवीजन पास हैं तो उनका भी कोई तो प्रतिफल तय होना ही है। हालांकि हो सकता है कि वे 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तक वहां के दायित्व को संभालते रहें। शिवराज की अगली भूमिका क्या तय की जाएगी? पहले से भी अधिक ताकत से केंद्र में सरकार बना चुकी भाजपा के संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं रहेगा। लेकिन बहुत कुछ करने का सुअवसर विजयवर्गीय के पास है। अब वह शोले के कटे हाथ वाले ठाकुर नहीं हैं। बल्कि उस शक्तिशाली पुरुष की तरह दिखने लगे हैं, जिसके पास खुद के सहित मोदी और शाह जैसे हाथ भी हैं।  आगे पढ़ें

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सरकार के खिलाफ आंदोलन को लेकर श्रेय लेने भाजपा नेताओं में मची होड़, अपने-अपने इलाकों में शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के खिलाफ आंदोलन करने को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची है। पानी-बिजली और कानून व्यवस्था पर सूबे के नेता अपने-अपने इलाकों में ही शक्ति प्रदर्शन कर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में कानून-व्यवस्था बिगड़ने को लेकर आंदोलन हुआ और कैंडल मार्च निकाला गया तो इंदौर में मंगलवार को किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने किसान आक्रोश रैली निकाली।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ सरकार को शिवराज की चेतावनी, कहा- बच्चियों पर अत्याचार नहीं रुके तो भाजपा उतरेगी सड़क पर

चौहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की स्थिति बदतर होती जा रही है। सरकार ट्रांसफर और पोस्टिंग के उद्योग में व्यस्त है और कानून व्यवस्था पर उसका ध्यान ही नहीं है। बार-बार तबादलों से पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का मनोबल भी गिरा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।  आगे पढ़ें

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किसान आंदोलन की दूसरी बरसी पर टकरावद में हुई स्मृति सभा

किसान आंदोलन की दूसरी बरसी पर टकरावद में हुई स्मृति सभा में किसान संघर्ष समन्वयक समिति अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा भाजपा की तरह कमलनाथ भी जुमलों की भाषा बोल रहे किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। अभा जब-जब किसानों पर जुल्म होगा, किसानों के साथ खड़े रहेंगे ताकि फिर पुलिस वालों में किसानों को गोली मारने की हिम्मत नहीं हो। मोदीजी ने मेनिफेस्टो से स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल की लागत से डेढ़ गुना दाम देने की बात ही गायब कर दी।  आगे पढ़ें

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मंदसौर गोलीकांड को भुलाया राजनीतिक दलों ने, किसान नेता देंगे श्रद्धांजलि

मृतक किसानों के परिजन ने मंच पर आकर उनका उपवास तुड़वाया और न्यायिक जांच के आदेश किए गए। कांग्रेस ने इस घटना को जमकर भुनाया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मंदसौर पहुंचने पर भी जमकर सियासत हुई। उनके काफिले को जाने नहीं दिया तो वे मोटर साइकल पर सवार होकर आगे बढ़ गए। विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले पिछले साल छह जून को गोलीकांड की पहली बरसी पर राहुल गांधी आए और मंदसौर में सभा कर किसानों की कर्ज माफी का मास्टर स्ट्रोक खेल गए। इसका असर यह हुआ कि सूबे में कांग्रेस की सरकार बन गई। राहुल समेत पूरी कांग्रेस ने मंदसौर गोलीकांड की आड़ में भाजपा सरकार को किसान विरोधी साबित करने की भी पूरी कोशिश की। यह अलग बात है कि किसान विरोधी सरकार का तमगा लगने के बावजूद भाजपा का मंदसौर के मतदाताओं ने खुलकर साथ दिया।  आगे पढ़ें

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मथनी उठाइए कमलनाथ जी

हमें आपके बारे में तो पता चला, चुनांचे हमारा गौर तो इस बात पर है कि आप पूर्ववर्ती हुकूमत के किन-किन कर्मकांडों की पोल खोलने जा रहे हैं। जरूर आपके पिटारे में कुछ ऐसा है, जो हमारे कौतुहल का विषय है। ऊपर वाले की दया से शिवराज सिंह चौहान इस दिशा में आपके लिए पर्याप्त इंतजाम करके गये हैं। आपका उनके साथ गले मिलता और ठहाका लगाते फोटो तो हमने इन छह महीनों में बहुत देख लिए, हम इंतजार कर रहे हैं कि अब आप उनके शासनकाल वाली जाजम की धूल झटकारिये, दनादन घपले-घोटाले हवा में उड़ते नजर आने लगेंगे। ई-टेंडरिंग कांड तो पहले ही राजनीतिक वायुमंडल में किसी सैटलाइट की तरह अपनी कक्षा में स्थापित है। फिर इसका छोटा भाई व्यापमं घोटाला है। आपके लिए असीमित संभावनाओं वाली माखनलाल चतुवेर्दी यूनिवर्सिटी मौजूद है।read more  आगे पढ़ें

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