होम शिवराज
vajah-narendr-modi-ke-gusse-ki

वजह नरेंद्र मोदी के गुस्से की

सन 2024 में एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए इस सरकार को जितने सख्त अनुशासन और भारी परिश्रम की दरकार है, वह तब ही संभव हो सकेगा, जब एक-एक सांसद और पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी खुद को अनुशासन एवं नियमों में पूरी तरह आबद्ध कर दे। इसके लिए वैसी ही सख्ती की जरूरत है, जो मोदी ने इस कार्यकाल के आरम्भ से ही दिखाई है। उत्तराखंड के विधायक कुंवर प्रवीण सिंह चैम्पियन को छह साल के लिए पार्टी से निकालना इसी दिशा में एक ऐसा कदम है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। read more  आगे पढ़ें

bjps-allegation-insult-of-hindus-doing-government-

भाजपा का आरोप: श्रीलंका में सीता मंदिर निर्माण से पहले तथ्यों की जांच कराकर सरकार कर रही हिन्दुओं का अपमान

श्रीलंका में प्रस्तावित सीता मंदिर के निर्माण से पहले उसके तथ्यों की जांच कराकर कमलनाथ सरकार हिंदुओं का अपमान कर रही है। ये आरोप भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने लगाए। मंगलवार को भोपाल में मीडिया से बातचीत में चौहान ने कहा कि सारा देश और दुनिया जानती है कि सीताजी को श्रीलंका की अशोक वाटिका में रखा गया था। यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है, लेकिन प्रदेश सरकार इस तथ्य की जांच की बात कह रही है कि सीताजी लंका गई भी थीं या नहीं।  आगे पढ़ें

former-agriculture-minister-bisen-caught-in-the-ma

कम आय बताकर दो बेटियों को छात्रवृत्ति दिलाने के मामले में फंसे पूर्व कृषि मंत्री बिसेन

समरीते द्वारा नौ फरवरी 2019 को की गई शिकायत में कहा कि बिसेन ने दोनों बेटियों पायल बिसेन और मौसम बिसेन को पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति दिलाने के लिए वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय 80 हजार रुपए बताई है। जबकि बिसेन वर्ष 1984 से विधायक हैं। वे 1999 में लोकसभा सदस्य भी रहे हैं और 1988 से आयकर दे रहे हैं। फिर भी वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय सिर्फ 80 हजार रुपए सालाना बता रहे हैं। समरीते कहते हैं कि मामले में बिसेन पर अपराध दर्ज होना चाहिए, लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। ज्ञात हो कि पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले भी स्थानीय स्तर पर यह मामला उठा था।  आगे पढ़ें

big-scam-in-the-sambalal-scheme-in-favor-of-the-wo

संबल योजना में बड़ा घोटाला, मजदूरों के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत

श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने मंगलवार को आशंका जताई कि संबल योजना के 40 से 50 फीसदी हितग्राही फर्जी हो सकते हैं। एक से पंद्रह जुलाई के बीच जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ एफआईआर भी होगी। बहुगुणा ने अगस्त 2018 में सेम्पल सर्वे कराकर पड़ताल कराई थी। उसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इसे उन्होंने दबवा दिया और कार्रवाई नहीं की। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को 22 मार्च को नोटशीट लिखकर जांच के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था।  आगे पढ़ें

shivrajs-sambal-yojana-and-kamal-naths-new-sunday-

शिवराज की संबल योजना और कमलनाथ का नया सवेरा कार्ड

मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना यानी संबल योजना के तहत बने श्रमिकों के कार्ड अब नए सिरे से बनेंगे। कमलनाथ सरकार ने इन्हें नया बनाने का फैसला लिया है। राज्य सरकार ने योजना का नाम भी बदल दिया है। अब योजना का नाम संबल योजना नहीं बल्कि नया सवेरा नाम होगा।  आगे पढ़ें

majabur-dodhari-talavar-par-chalane-ki

मजबूर दोधारी तलवार पर चलने की

भोपाल के डीआईजी इरशाद वली और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव केके सिंह की चतुराई या नादानी के बारे में मैं नहीं जानता। इसलिए मुझे नहीं पता कि कल शिवराज सिंह चौहान द्वारा जमकर पिलायी गयी डांट के बाद इन अफसरान की हालत क्या है, लेकिन इतना तो जानता ही हूं कि दोनो बे-वजह नप गये। वली का अपने स्तर पर तो यह साहस हो ही नहीं सकता था कि आदिवासियों को शहर में प्रवेश करने से रोक दें। सिंह भी यह दुस्साहस नहीं कर सकते थे कि मुख्यमंत्री से बात किए बगैर यह कह दें कि जिस जमीन पर अधिकार बताया जा रहा है, वह दरअसल गलत तरीके से किये गये कब्जे का मामला है। दोनो के ऐसे करने और कहने की डोर ऊपर से बंधी हुई थी। बदले में यह हुआ कि मीडिया ने चटखारे लेकर उनकी बेइज्जती की खबर सार्वजनिक कर दी। खैर, जो हुआ सो हुआ। देखने वाली बात यह है कि इसके बाद आगे और क्या होगा? शिवराज ऐसे तीखे तेवर दिखाकर सफल रहे। मुख्यमंत्री ने उनसे ही सहयोग मांग लिया, पूरी नाटकीयता के साथ। उसी ड्रामेबाजी से शिवराज ने नाथ को सहयोग करने की बात कह दी। यानी फिलहाल मामला, लड़ाई-लड़ाई माफ करो...पर पहुंच गया है।  आगे पढ़ें

the-case-of-the-death-of-a-young-man-shivraj-said-

युवक की मौत का मामला: शिवराज ने कहा- प्रदेश सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं, पुलिस हुई निरंकुश

शिवराज सिंह ने पुलिस की पिटाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "युवक की कार बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग से टकरा गई थी। ये ऐसी घटना ऐसी नहीं थी कि पुलिस युवक को पीट-पीटकर मार डाले। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ सस्पेंशन के बजाए इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि, "मध्य प्रदेश में गरीबों को सताया जा रहा है, विरोध करता है तो झोपड़ी को आग लगा दी जाती है। उस आग में कूदकर एक बहन ने जान दे दी। क्या गरीबों को ऐसा जताया जाएगा, आदिवासियों को सताने का भी मामला सामने आया है। गरीबों के कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं। अन्याय की अति हो गई है।  आगे पढ़ें

kamal-nath-government

बाला के दबाव में दागी अफसर को प्रमोशन देने के फेर में कमलनाथ सरकार

मामला आबकारी विभाग से जुड़ा है। फिलहाल आरक्षण के कारण डिप्टी कमिश्नर के पद तक जा पहुंचे एक अफसर के खिलाफ विधि विभाग ने लोकायुक्त द्वारा चालान की अनुमति मांगे जाने के मामले में अपनी राय अफसर के खिलाफ दी है। इस अफसर के खिलाफ इंदौर में डिप्टी कमिश्नर आबकारी रहते हुए लोकायुक्त ने छापामारी की थी। मामला अनुपातहीन संपत्ति से जुड़ा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद उक्त अफसर को हटा कर मुख्यालय ग्वालियर में पदस्थ कर दिया गया था।read more  आगे पढ़ें

ab-maph-bhie-karon-shivaraj

अब माफ भी करों शिवराज....

माननीय, हमने तो भोपाल के जम्बूरी मैदान पर वह दृश्य भी देखा है, जब आपने नरेन्द्र मोदी की तुलना में लालकृष्ण आडवाणी को अधिक तवज्जो दी थी। हाय! आंखें फूट जाएं , जो आज यह देखना पड़ रहा है कि इन्हीं मोदी ने आपको जम्बूरी मैदान वाले भोपाल से दूर करने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। ईमान से कहता हूं, ये सदस्यता-फदस्यता अभियान जैसे खालिस शाकाहारी काम आपको शोभा नहीं देते। न लच्छेदार बातें करने का मौका। न ही सरकारी खजाने का गला घोंटकर योजनाओं के जरिये वोट पकाने की जुगाड़। ले-देकर वही पार्टी की रीति-नीति वाली बातें। आप इस सबके लिए नहीं बने हैं। आग लगे ऐसे मतदाता को, जो आपको चार या छह सीट और देने की उदारता नहीं दिखा सका। ठठरी बंधे उस वोटर की भी, जिसने मोदी को स्पष्ट बहुमत देकर उन्हें आपकी दुर्गति करने के लिए एक बार फिर पूरी तरह सक्षम बना दिया। बताइये जरा, आप चीखते रहे माफ करो महाराज और एक ये मोदी हैं, बगैर चीखे कर दिया, माफ करो शिवराज।  आगे पढ़ें

pradesh-mein-bjp-ka-sankat

प्रदेश में भाजपा का संकट

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जिस तरह के परिणाम आए हैं, उसमें यह भी संभव नहीं है कि शिवराज दिल्ली में कोई बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। केंद्र में सरकार का काम गति पकड़ चुका है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा। इसके बाद जो होगा, उसकी एक तयशुदा प्रक्रिया यह हो सकती है कि शिवराज को दिल्ली तक सीमित कर दिया जाए। इससे विजयवर्गीय या फिर जिसे भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगे बढ़ाना चाहे उसे अपने भावी कदम तय करने में सुविधा हो। इसके अलावा अब राकेश सिंह और सुहास भगत के लिए भी शिवराज की छाया से मुक्त होकर खुलकर काम करने का अवसर प्रकट हो जाना तय है। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में अपनी मार्कशीट में फर्स्ट डिवीजन पास हैं तो उनका भी कोई तो प्रतिफल तय होना ही है। हालांकि हो सकता है कि वे 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तक वहां के दायित्व को संभालते रहें। शिवराज की अगली भूमिका क्या तय की जाएगी? पहले से भी अधिक ताकत से केंद्र में सरकार बना चुकी भाजपा के संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं रहेगा। लेकिन बहुत कुछ करने का सुअवसर विजयवर्गीय के पास है। अब वह शोले के कटे हाथ वाले ठाकुर नहीं हैं। बल्कि उस शक्तिशाली पुरुष की तरह दिखने लगे हैं, जिसके पास खुद के सहित मोदी और शाह जैसे हाथ भी हैं।  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10  ... Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति