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अब ये चुप रहने का समय नहीं है

अपनी पिछली पार्टी की पंद्रह महीने की सरकार में ये मंत्री और विधायक थे ही। तो फिर मार्च से लेकर मई के बीच के दो महीनों में ऐसा क्या हो गया कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए इतनी बड़ी रकम की जरूरत आ गई? क्या यह मान लें कि कमलनाथ सरकार ने इनके क्षेत्र में कोई भी काम नहीं करवाए। आरोप तो ऐसे ही लगा कर इन लोगों ने दलबदल किया था। या यह समझ लिया जाए कि पंद्रह महीने तक इन महानुभावों ने ही अपने-अपने इलाके में जनोपयोगी काम करने में कोई रूचि ही नहीं ली? वरना इतनी भारी-भरकम रकम की दरकार का कोई खास औचित्य ही समझ नहीं आता है।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस को मुबारक प्रशांत वायरस

जनाब प्रशांत किशोर ही दरअसल केंद्र में मोदी सरकार, बिहार में नितीश कुमार और दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की फिर हुकूमत कायम होने की सार्वभौमिक वजह हैं, तो फिर इस सोच पर तरस ही खाया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस ऐसा ही मुगालता पाले हुए है। खबर है कि मध्यप्रदेश की चौबीस विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के लिए वह प्रशांत किशोर की सेवाएं लेने जा रही है। चुनाव रणनीतिकार के तौर पर बहु-प्रचारित इस चेहरे की दम पर पार्टी को उम्मीद है कि वह अपनी खोई हुई सत्ता फिर हासिल कर लेगी। कितना भ्रम है यह अपने आप में।  आगे पढ़ें

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समय तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा का

बहनजी बीते समय से राजनीति में असफलताओं से जूझ रही हैं और निकट भविष्य में उनके लिए शुभ-लाभ के पट आसानी से खुलते नहीं दिख रहे। इसलिए मुमकिन है कि ऐसा होने तक वह कांग्रेस के लिए अपने गुस्से का ईंधन जलाये रखें। दूसरी बात यह भी है कि बसपा हो या सपा, ये दोनों दल उत्तरप्रदेश में सिर मार रही प्रियंका और कांग्रेस को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। कारण यही है कि आखिर ये दोनों क्षेत्रीय दल पनपे तो कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाकर है। सवाल यह कि बसपा के इस रौद्र रूप का क्या भाजपा को कोई लाभ मिलेगा? जिन सीटों पर उपचुनाव हैं, वहाँ शिवराज और ज्योतिरादित्य का चेहरा ही मुख्य भूमिका अदा करेगा। चुनाव में मुख्य मुकाबला भी भाजपा तथा कांग्रेस के बीच ही होना तय है।  आगे पढ़ें

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उपचुनाव से पहले भाजपा में चुनौती का दीपक

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के इस ऐलान के साथ कि सिंधिया खेमे के सभी पूर्व विधायक पार्टी प्रत्याशी होंगे और उन्हें जिताने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के हारे हुए प्रत्याशियों को मेहनत करनी है, असंतोष खदबदाने लगा है। मंत्री और विधायक पद बलिदान कर भाजपा को सत्ता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले इन पूर्व विधायकों के इस त्याग का मोल चुकाना भाजपा की मजबूरी है। पार्टी कार्यकर्ता भी इसे महसूस करते हैं। सभी जानते हैं कि इन बलिदानियों को कमल निशान के साथ चुनाव में उतारना पार्टी के लिए अहसान उतारने जैसा पावन कार्य है। इस सबके बावजूद जिस तरह से कोरोना काल में भाजपा की मान्य परंपरा को दरकिनार कर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी उम्मीदवारी का ऐलान किया गया उसे लेकर नाराजगी है।  आगे पढ़ें

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महाराज-शिवराज गठबंधन की अग्निपरीक्षा का सवाल स्क्रीन पर

कांग्रेस के कुछ मतदाता भी सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र वाली सीट पर उनके इस कदम का साथ देंगे। तो कुछ उनके विरोध में खड़े दिखाई देंगे। साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी समर्थन-विरोध के खेमे में बंट जाएंगे और इन 22 सीटों पर परिणाम मिश्रित दिखाई देगा। ऐसे में निर्दलीय विधायकों को साथ मिलाकर और उपचुनाव में विजयी सीटें विजय तिलक लगाकर आधे मन से शिवराज-महाराज गठबंधन पर मुहर लगा देंगे।  आगे पढ़ें

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सरिया गपावनी का ये सियासी मौसम

पहली नजर में यह आश्चर्य का विषय लगता है कि कोरोना के भीषण प्रकोप के बीच शिवराज को अचानक ये जांच वाली बात कैसे सूझ गयी है। दन्न से सिलावट सहित नरोत्तम मिश्रा और कमल पटेल का मंत्री समूह गठित कर दिया गया। कहा गया है कि यह समूह बीती सरकार के निर्णयों की समीक्षा करेगा। इसके पीछे नरोत्तम मिश्रा की पीड़ा है। कमलनाथ सरकार ने मिश्रा को खूब घेरने की कोशिश की। उनके एक सरकारी सहयोगी को जेल भी भेजा गया। ये अलग बात है कि कमलनाथ, नरोत्तम का कुछ ज्यादा नहीं बिगाड़ सके।  आगे पढ़ें

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गिरेहबान में झांकने का समय

क्या नैतिक शिक्षा के लिहाज से भी यह तय कर दिया गया है कि यदि यह शोक का समय है तो ऐसे में और किसी भी विषय पर बात की ही नहीं जा सकती है? ऐसा है तो फिर उन सारे लोगों की भी निंदा होनी चाहिए, जो इसी दौर में घर में आराम फरमाते, मस्ती करते या फिर परिवार के साथ क्वालिटी टाइम गुजारने के छाया चित्र सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। सलूजा को चाहिए कि वे पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा के खिलाफ भी बयान जारी करें। प्रियंका ने भी कोरोना से मचे चीत्कार के बीच उत्तरप्रदेश में दो साधुओं की ह्त्या को लेकर उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने का प्रयास किया है। सलूजा को अपने इस ट्वीट् का रुख कांग्रेस के ही उन नेताओं की और मोड़ देना चाहिए, जो महाराष्ट्र के हालात को लेकर बेचैनी का इजहार कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

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शिवराज ने विधानसभा में जीता विश्वासकमत, कोरोना की वजह से सदन नहीं पहुंचा कांग्रेस का एक भी विधायक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को विश्वास मत हासिल कर लिया। सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। चूंकि कोरोना की वजह से कांग्रेस का एक भी विधायक सदन में नहीं पहुंचा, इसलिए शिवराज ने सर्वसम्मति से विश्वास मत जीत लिया। सभी विधायकों ने हां कहकर विश्वास मत प्रस्ताव पारित कर दिया। इससे पहले स्पीकर एनपी प्रजापति ने इस्तीफा दे दिया था। इस वजह से विधायक जगदीश देवड़ा ने कार्यवाही पूरी कराई। इसके बाद विधानसभा का सत्र 27 मार्च सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।  आगे पढ़ें

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उपचुनाव पर टिका सिंधिया समर्थक 18 बागियों का भविष्य, 24 सीटों पर होंगे उपचुनाव

22 बागियों के इस्तीफे और दो विधायकों के निधन से खाली हुईं दो सीटों के साथ ही प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर अब छह माह के भीतर उपचुनाव होंगे। जिन 22 बागियों ने इस्तीफे दिए, उनमें से 18 ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। यानी अब इन 18 का भविष्य उपचुनाव पर टिक गया है। संभवत: मई-जून में चुनाव आयोग उप चुनाव करा सकता है। इनके नतीजे तय करेंगे कि नई सरकार बहुमत में रहेगी या अस्थिरता के बीच झूलेगी। 18 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल की हैं और इस क्षेत्र में सिंधिया का खासा प्रभाव है। उपचुनाव में सिंधिया के साथ ही यहां केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और शिवराज सिंह चौहान फैक्टर भी काम करेंगे। कांग्रेस सिंधिया के बिना ही इन सीटों पर उपचुनाव में उतरेगी।  आगे पढ़ें

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विधानसभा में फ्लोर टेस्ट आज, सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकार्डिंग कराने के दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति को फ्लोर टेस्ट के लिए आज विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शाम 5 बजे तक पूरी करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्पीकर प्रजापित ने कहा- विधायिका न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रही है। दोनों ही संवैधानिक संस्थाएं हैं। संविधान मौन है। इससे पहले जस्टिस डीवाई चंद्रचूण की बेंच ने स्पीकर को फ्लोर टेस्ट की पूरी प्रक्रिया की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के आदेश भी दिए। मुख्यमंत्री कमलनाथ आज दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वे इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। स्पीकर एनपी प्रजापति ने 16 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। इन विधायकों ने 10 मार्च को इस्तीफा दिया था।  आगे पढ़ें

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