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ओवैसी का दावा: कहा- वायनाड में 40 फीसदी मुसलमान हैं इसिलए राहुल गांधी को मिली जीत

ओवैसी ने कहा, 'आप कांग्रेस और दूसरी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां छोड़ना नहीं चाहते लेकिन याद रहे कि उनके पास ताकत और सोच नहीं है, वे कठिन परिश्रम भी नहीं करते।' ओवैसी ने सवाल किया, बीजेपी कहां हारी है? फिर इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पंजाब में बीजेपी हारी है। वहां कौन है? पंजाब में सिख ज्यादा हैं। देश में बीजेपी को और कहां हार मिली? बीजेपी क्षेत्रीय पार्टियों से हारी है, कांग्रेस से नहीं। हैदराबाद सांसद ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया और कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद अपने गढ़ अमेठी से चुनाव हार गए। वह वायनाड से चुनाव जीते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी वायनाड से इसलिए जीते, क्योंकि वहां 40 फीसदी मुसलमान हैं।  आगे पढ़ें

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वायनाड से राहुल ने मोदी साधा निशाना, कहा- मौजूदा सरकार देश में फैला रही नफरत

राहुल ने केरल और उत्तरप्रदेश की दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। अमेठी में उन्हें स्मृति ईरानी से हार मिली, जबकि वायनाड में राहुल 4 लाख 31 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे। वायनाड से जीतने के बाद राहुल का केरल का यह पहला दौरा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को केरल और रविवार को आंध्र प्रदेश के तिरुपति का दौरा करेंगे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। वे तीन दिन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को केरल में रहेंगे। शनिवार को वायनाड जिले में उनका रोड शो होगा। राहुल ने बताया कि तीन दिन में वे 15 जगह स्वागत समारोह में शामिल होंगे।  आगे पढ़ें

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तीन दिन के दौरे पर केरल जाएंगे राहुल, मतदाताओं का आभार जताने वायनाड में करेंगे रोड शो

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को मतदाताओं का आभार जताने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड जाएंगे। लोकसभा चुनाव में जीत के बाद यह उनका पहला दौरा है। राहुल ने केरल और उत्तरप्रदेश की दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। अमेठी में उन्हें स्मृति ईरानी से हार मिली, जबकि वायनाड में राहुल 4 लाख 31 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे।  आगे पढ़ें

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तिरुवंतपुरम में मोदी ने राहुल पर बोला चुनावी हमला, कहा- वायनाड से चुनाव लड़ना तुष्टिकरण की राजनीति का संदेश

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'कांग्रेस के नामदार का कहना है कि वह दक्षिण भारत को संदेश देने के लिए वायनाड आए हैं। क्या वह यह संदेश राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम या पनथनमथित्ता से नहीं दे सकते थे? यहां से उनका संदेश और भी बड़ा हो जाता। यह दक्षिण भारत के लिए संदेश नहीं है बल्कि यह तुष्टिकरण की राजनीति का संदेश है।' इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने वायनाड में एक जनसभा संबोधित की और कहा मैं यहां आपके साथ कुछ महीनों का नहीं बल्कि जीवनभर का रिश्ता बनाने के लिए आया हूं। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा था कि वह भारत के प्रधानमंत्री की तरह नहीं हैं और इसलिए वह झूठ नहीं बोलेंगे।  आगे पढ़ें

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गठबंधन की अंधी गली में उपेक्षित कांग्रेस

यूं तो कांग्रेस की कभी कोई खास विचारधारा रही नहीं है। इसे एक मध्यमार्गीय राजनीतिक दल के तौर पर ही जाना जाता है। लेकिन वहां से भी उसकी पटरी कभी की उतर चुकी है। रही बात वामपंथियों की तो वे कभी कांग्र्रेस के विरोधी तो कभी दोस्त भी रहे हैं। वैसे वे कांग्रेस के आलोचक हैं लेकिन जहां तक भाजपा विरोध की बात है तो वे कांग्रेस के साथ खड़े दिखते हैं। तिस पर यह तथ्य भी कि कांग्रेस की अपनी कोई विचारधारा कभी रही ही नहीं है। वहां परिवारधारा का बोलबाला था है और शायद रहेगा भी। वामपंथ ने इस दल को हमेशा त्याज्य ही समझा है। दक्षिण पंथ से लड़ने की उसकी मजबूरी ही उन्हें कांग्रेस की तरफ हाथ बढ़ाने के विवश करती है। आज की तारीख में भी सीताराम येचुरी इस दल के इकलौते ऐसे नेता हैं, जो नरेंद्र मोदी को हराने के लिए कांग्रेस के साथ जाने को तैयार हैं, लेकिन प्रकाश करात के समर्थक इसका पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं। read more  आगे पढ़ें

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वायनाड से राहुल की उम्मीदवारी से लेफ्ट में मची खींचतान, अकेले पड़े येचुरी

पार्टी और येचुरी के लिए पहला झटका पश्चिम बंगाल में लगा। यहां येचुरी ने कांग्रेस के साथ सीटों की साझेदारी को लेकर कोई करार हुए बिना ही 6 सीटें छोड़ दी थीं, जिनमें से दो सीटों पर उसके सांसद थे। लेकिन, शुरूआती प्रयासों के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हो सका। दोनों ही पार्टियां मुर्शिदाबाद सीट को लेकर अड़ गईं और अंत में दोनों की राह अलग हो गई। इसके बाद दूसरा झटका वामपंथी पार्टी को राहुल गांधी के केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने से लगा है। कांग्रेस की ओर से इसका आधिकारिक ऐलान होने के बाद येचुरी को तिरुअनंतपुरम में प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी। सीपीएम में कांग्रेस के इस फैसले को लेकर हैरानी है कि आखिर जब उनकी ओर से इसे गलत विचार करार दिया गया था, तब भी राहुल गांधी ने वायनाड आने का फैसला क्यों लिया। मीडिया की ओर से इस सवाल पर कि क्या कांग्रेस ने लेफ्ट को अकेला छोड़ा दिया है, इस पर येचुरी ने चुप्पी साध ली।  आगे पढ़ें

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तुझ को मालुम है कल क्या होगा...?

वायनाड लोकसभा सीट को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बताया जा रहा है। इस लोकसभा क्षेत्र का अस्तित्व परीसीमन के बाद 2009 में हुआ है। यानि यहां कुल दो लोकसभा चुनावों का इतिहास है। 2009 में तो कांग्रेस उम्मीदवार ने यहां सीपीआई के उम्मीवार को दो लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव हराया था। और 2014 के लोकसभा चुनाव में यही कांग्रेस उम्मीदवार मात्र बीस हजार वोटों से चुनाव जीत पाया था। इसमें मजेदार तथ्य यह है कि इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को अस्सी हजार से ज्यादा वोट हासिल हुए थे। जातीय समीकरण की बात करें तो यहां 49.48% हिंदू, 28.65% मुस्लिम समुदाय और 21.34% ईसाई समुदाय की आबादी निवास करती है। जिले की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी 3.99 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की तादाद 18.53 फीसदी है। जिले की कुल आबादी में से 96.14 प्रतिशत लोग शहरी इलाकों में और 3.86 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं।  आगे पढ़ें

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