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हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद लोधी की सदस्यता बहाली के लिए भाजपा राज्यपाल से करेगी गुहार

बर्खास्त विधायक प्रहलाद लोधी को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी सदस्यता बहाली के लिए अब भाजपा राज्यपाल के यहां गुहार लगाएगी। एक-दो दिन में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के नेतृत्व में भाजपा विधायक राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर लोधी की सदस्यता बहाल करने की मांग करेंगे। इसे लेकर सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के निवास पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच चर्चा हुई। तीनों के बीच इस मामले को लेकर करीब एक घंटे चर्चा हुई।  आगे पढ़ें

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राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था में सुधार के लिए राज्यपाल से मिले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, की हस्तक्षेप की मांग

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट हो गयी है। बुधवार को मंदसौर में दिनदहाड़े विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी युवराज सिंह की हत्या कर दी गयी। इसके पहले मंदसौर में ही नगर पालिका अध्यक्ष की हत्या की गयी थी। इसके अलावा इंदौर में हत्याएं हुई। बुधवार को एक कोच की हत्या इंदौर में की गयी। बच्चों के अपहरण के मामले भी सामने आए हैं।  आगे पढ़ें

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नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था से कराने पर तय समय पर नहीं होंगे चुनाव

नई व्यवस्था से चुनाव होने की वजह से कई सारे बदलाव होंगे। महापौर व अध्यक्ष को वापस बुलाने खाली कुर्सी, भरी कुर्सी के लिए मतदान अब नहीं होगा। परिसीमन चुनाव से दो माह पहले तक होगा। इसके मायने यह हुए कि नवंबर तक वार्डों का परिसीमन होगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची एक जनवरी 2020 की स्थिति में तैयार कराएगा। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण 15 फरवरी को होगा। इस हिसाब से तय समय पर चुनाव अब नहीं हो पाएंगे।  आगे पढ़ें

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सियासी हलचल के बाद राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष

चार दिन की सियासी हलचल के बाद मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने मप्र नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुमोदन कर दिया। अध्यादेश लागू होने पर नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। सरकार का ऐसा मानना है कि महापौर के चुनाव सीधे नहीं होने से करीब 30-35 करोड़ रु. बचेंगे। भोपाल में ही करीब 3 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च होने का अनुमान रहता है। उधर, राजनीतिक दलों के खर्चों को भी जोड़ा जाए तो अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर के चुनाव में खर्च होने वाली राशि शासकीय खर्च का 5 से 6 गुना होती है। सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव से संबंधित दो बिल राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे थे।  आगे पढ़ें

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मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाणी से कराने वाले अध्यादेश को राज्यपाल आज दे सकते हैं मंजूरी, बयानबाजी से नाराज हैं टंडन

महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश को राज्यपाल लालजी टंडन मंगलवार को मंजूरी दे सकते हैं। सोमवार को दिन में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने करीब एक-एक घंटे राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक अध्यादेश रोके जाने को लेकर हो रही बयानबाजी से राज्यपाल खासे नाराज हैं। लेकिन, इस मसले पर कमलनाथ के तर्कों से वह संतुष्ट दिखे। ऐसे में इस पर मंगलवार को ही फैसला आने की उम्मीद है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी राज्यपाल से मिली थीं।  आगे पढ़ें

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निकाय चुनाव: राज्यपाल ने मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव से जुड़े अध्यादेश को रोका, मंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट करने की कोशिश

कैबिनेट से मंजूरी के बाद राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों दो अध्यादेश राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजे थे। इनमें से एक पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे से जुड़ा था व दूसरा मेयर के चुनाव से। मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव के साथ इसमें पार्षदों के एक ही जगह वोटर होने व परिसीमन व चुनाव के बीच कम से कम 6 माह की बाध्यता को दो माह करने का जिक्र है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने फिलहाल इस पर निर्णय नहीं लिया है। इससे राजभवन व राज्य सरकार के बीच पशोपेश की स्थिति बन गई है।  आगे पढ़ें

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