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लक्षमण सिंह से पूछिए यह सवाल.....

लक्ष्मण नामक अनुज को अपने भ्राताश्री यानी दिग्विजय सिंह की चिंता सता रही है। अंदाज खालिस, तुम न जाने किस जहां में खो गए वाला है। दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट कर श्रमिक वर्ग की आड़ में भाजपा पर निशाना साधा। कांवड़ में अपनी बच्चियों को लेकर तेलंगाना से छत्तीसगढ़ पैदल जा रहे मजदूर की तस्वीर साझा की। साथ में लाड़ली लक्ष्मी वाला नारा भी चस्पा कर दिया। इस पर अनुज ने प्रतिक्रिया दी। इस चिंतन के लिए भाई को सराहा और यह भी उलाहना जड़ दिया कि बड़े भैया राजनीति की चकाचौंध में न जाने कहां गुम हो गए थे। वेलकम बैक वाली इस पोस्ट की वह लाइन खासी गौरतलब है, जिसमें लक्ष्मण ने भाई के लिए लिखा है, लौट आइये, नहीं तो दुष्ट आपको निचोड़ते जाएंगे। यानी इस ट्वीट के मुताबिक जयेष्ठ भ्राता सियासी जंगल से घर वापसी का अभी आधा रास्ता ही तय कर सके हैं। read more  आगे पढ़ें

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कंप्यूटर बाबा ने लक्ष्मण सिंह पर किया पलटवार, कहा- हमारे बारे में जानने के लिए उनको बड़े भाई दिग्गी से पूछना होगा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और चांचौड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह द्वारा फर्जी बाबा बताए जाने पर मप्र नदी न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा ने पलटवार किया गया है। दमोह में कंप्यूटर बाबा ने कहा- वह कौन हैं, यह पता लगाने के लिए लक्ष्मण सिंह को अपने बड़े भाई पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पूछना चाहिए। क्योंकि वे मुझे अच्छे से जानते हैं। मैं लक्ष्मण सिंह पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि वे कैसे हैं और उन्होंने टिप्पणी क्यों की, उनकी बुद्धि का परिचय उन्होंने स्वयं ही दे दिया है। इसलिए अब उन पर बात करने से कोई मतलब नहीं है। प्रदेश में अवैध उत्खनन ज्यादा होने के सवाल पर बाबा ने बताया कि यह शिवराज सरकार के कार्यकाल का नतीजा था। उनके कार्यकाल में भरार्शाही खूब चली। उनके 15 साल का कचरा अब हम लोग समेट रहे हैं। बाबा ने आरोप लगाया कि शिवराज के भाई, भतीजे और परिवार के लोग अवैध उत्खनन में लिप्त रहे हैं।  आगे पढ़ें

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मप्र: लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, कहा- कमलनाथ मजबूर नहीं, मजबूत सीएम बनकर करें काम

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण सिंह ने एक बार फिर अपनी ही सरकार के काम पर सवाल उठाकर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ मजबूर नहीं, मजबूत सीएम बनकर काम करें। उनके सरकार बचाने के प्रयासों के कारण प्रदेश में नीचे के स्तर पर काम दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं, भाजपा ने कमलनाथ सरकार में वरिष्ठ विधायकों को तवज्जो नहीं देने की वजह से ऐसी परिस्थितियां निर्मित होने पर तंज भी कसा है। कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि दो दिन पहले चांचौड़ा में एक महिला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करवाने गई थी, लेकिन वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। इससे वे एक निजी क्लीनिक में पहुंची, वहां उसे एक इंजेक्शन लगाया गया।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह मिले शिवराज से, सियासी अटकलों का दोर शुरू, बताया सौजन्य भेंट

लक्ष्मण सिंह से भेंट को शिवराज ने भी सौजन्य मुलाकात बताया। उन्होंने कहा कि हम संसद में साथ रहे हैं, विधानसभा में साथ हैं। कोई और बात नहीं है। दिग्विजय सिंह के भाई का शिवराज सिंह से मिलना इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि लक्ष्मण सिंह पहले भाजपा से सांसद रह चुके है। पिछले दिनों उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी सवाल उठाए थे।  आगे पढ़ें

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शिव पर हावी नंदी

बिचारे कमलनाथ। हैं तो दिग्विजय के सियासी भाई। लेकिन खून का रिश्ता तो खून का ही होता है। सो बड़े राजा साब और छोटे राजा साब ने मिलकर मुख्यमंत्री को धता बता दी। जता दिया कि मुख्यमंत्री भले ही कमलनाथ हों, किंतु यदि कोई बड़ा काम करवाना हो तो उसके लिए दिग्विजय की पहल से पहले और कुछ नहीं हो सकता। आपको जिला चाहिए, तो मुख्यमंत्री के पास जाइए। लेकिन यहां जिला बनाने का मामला है ही नहीं, यहां मामला किला बनाने का है, जिसमें यह साबित हो जाए कि मुख्यमंत्री भले ही कोई भी हो, लेकिन सरकार कांग्रेस की है तो सुपर चीफ मिनिस्टर दिग्विजय ही रहेंगे। तो साहब कमलनाथ रूपी शिवजी से पहले दिग्विजय स्वरूप नंदी की पूजा का यह उपक्रम बहुत कुछ कह रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कहें और वर्तमान मुख्यमंत्री चाचौड़ा को जिले का खिताब न दें, यह मुमकिन नहीं दिखता है। हां, बीते दस महीने में कई मौकों पर नाथ ने सिंह की छाया से मुक्त होने का जतन किया है, किंतु वह पूरी तरह सफल नहीं हो सके हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि आने वाले कुछ और समय तक तो यह नंदी इस शिव पर हावी रहेगा ही। read more  आगे पढ़ें

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नाथ की अनाथ दिख रही सरकार.....

मुख्यमंत्री कभी आशंकित तो कभी आतंकित वाले भाव से ग्रस्त दिखते हैं। आशंका, लंगड़ी सरकार के लडखड़ाकर गिर जाने की हावी है। आतंक बाहरी और भीतरी दोनो तरह के हैं और खुले तथा छिपे विरोधियों की गतिविधियों से नुकसान होने के भी। ऐसे हालात के शिकार मुख्यमंत्री का विधानसभा में मत विभाजन की बात कहना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है। इस आश्चर्य की आवश्यकता उस समय और कम हो जाती है, जब कर्नाटक में कांग्रेस-जद (एस) की सरकार पर संकट के बादल और गहरा गये हैं। लेकिन आखिर ऐसा कब तक चल पाएगा? छह महीने से ज्यादा हो गये, सरकार के गठन को। अधिकांश मौकों पर यही लग कि यह नाथ नहीं बल्कि अनाथ सरकार है। read more  आगे पढ़ें

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सुनना तो चाहिए लक्ष्मण का कहा

परिवारवाद चल गया तो कांग्रेस को परेशानी हो सकती है। क्योंकि उसे भाजपा के तगड़े संगठन से मुकाबला करना है। भाजपा को नजदीक से देख आए लक्ष्मण सिंह भी मानते हैं कि संगठन के लिहाज से भाजपा के सामने कांग्रेस कहीं नहीं ठहरती है। और शायद वे यह भी जानते हैं कि मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कोई बड़ा कमाल नहीं करने जा रही है। इस परिप्रेक्ष्य में लक्ष्मण का यह बयान उचित प्रतीत होता है कि नये चेहरों को टिकट दिया जाए। क्योंकि खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चुके हुए चेहरों से बचने का जतन करते हुए अपना मंत्रिमंडल गठित किया है।read more  आगे पढ़ें

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