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सियासी हलचल के बाद राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष

चार दिन की सियासी हलचल के बाद मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने मप्र नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुमोदन कर दिया। अध्यादेश लागू होने पर नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। सरकार का ऐसा मानना है कि महापौर के चुनाव सीधे नहीं होने से करीब 30-35 करोड़ रु. बचेंगे। भोपाल में ही करीब 3 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च होने का अनुमान रहता है। उधर, राजनीतिक दलों के खर्चों को भी जोड़ा जाए तो अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर के चुनाव में खर्च होने वाली राशि शासकीय खर्च का 5 से 6 गुना होती है। सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव से संबंधित दो बिल राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे थे।  आगे पढ़ें

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मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाणी से कराने वाले अध्यादेश को राज्यपाल आज दे सकते हैं मंजूरी, बयानबाजी से नाराज हैं टंडन

महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश को राज्यपाल लालजी टंडन मंगलवार को मंजूरी दे सकते हैं। सोमवार को दिन में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने करीब एक-एक घंटे राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक अध्यादेश रोके जाने को लेकर हो रही बयानबाजी से राज्यपाल खासे नाराज हैं। लेकिन, इस मसले पर कमलनाथ के तर्कों से वह संतुष्ट दिखे। ऐसे में इस पर मंगलवार को ही फैसला आने की उम्मीद है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी राज्यपाल से मिली थीं।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में लगाई मुहर, अब फिर पार्षद चुनेंगे महापौर और नपा अध्यक्ष

अगले साल (2020) में वाले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे नहीं होगा। चुनाव में जीतकर आए पार्षद अब महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनेंगे। कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में इस बदलाव पर मुहर लगा दी है। सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।  आगे पढ़ें

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प्रदेश में 20 साल बाद लागू होगी फिर लागू होगी पुरानी व्यवस्था, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष

राज्य सरकार प्रदेश में 20 साल बाद फिर से नगरीय निकायों में अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर और अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था करने पर विचार कर रही है। इसके तहत पार्षद महापौर को चुनेंगे। इस संबंध में बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश के नगरीय निकायों में आम चुनाव के जरिए जनता वोट कर महापौर या अध्यक्ष को चुनती है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। प्रदेश में अगले साल मार्च के महीने में निकायों के चुनाव संभावित है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर का चुनाव कराए जाने के पीछे अपना राजनीतिक लाभ देख रही है।  आगे पढ़ें

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निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार करेगी बदलाव, अब जनता नहीं पार्षद चुनेंगे महापौर और नपा-नप अध्यक्ष

दरअसल इस साल के अंत तक प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव होने हैं। वर्तमान में 16 नगर निगम के महापौर समेत अधिकांश नगर पालिका और नगर परिषद पर भाजपा के अध्यक्ष काबिज हैं, लेकिन प्रदेश में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस इन निकायों पर अपना कब्जा चाहती है। इसी मकसद से अधिनियम में संशोधन के लिए सीएम कमलनाथ ने मंत्रीमंडल की उप समिति का गठन किया है। अब समिति से मिले प्रस्तावों को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। इसके बाद अध्यादेश भी लाया जाएगा।  आगे पढ़ें

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भोपाल की प्यास बुझाने वाला बड़ा तालाब पहुंचा फुल टैंक लेवल, भदभदा डैम के खुले गेट

बता दें कि पिछले तीन-चार दिनों से भोपाल में बारिश हो रही है। इसके चलते बड़े तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ा और शुक्रवार देर रात ये 1666.80 फीट फुट टैंक लेवल पर पहुंच गया। इसके बाद ही नगर निगम ने शनिवार सुबह भदभदा डैम के गेट खोलने का फैसला किया था। इस वर्ष राजधानी में मानसून अभी तक काफी मेहरबान रहा है। सीजन के जून, जुलाई और अगस्त में अभी सिर्फ 33 दिनों ही पानी गिरा। लेकिन इनमें से पांच दिन में हुई झमाझम बरसात ने ही राजधानी में पानी की कमी को पूरा कर दिया। जिसके चलते बड़ा शुक्रवार को बड़ा तालाब लबालब हो गया।  आगे पढ़ें

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इस गुस्से की वजह क्या है?

आलम यह कि नगर निगम में पार्षद पिटाई कांड के बाद उपेक्षा से क्षुब्ध मेंदोला धड़े के पार्षदों ने पिछले तीन साल से नगर निगम की बैठकों से स्थायी दूरी बना ली है। यहां तक कि उनके खिलाफ अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की मुहिम तक शुरू कर दी गयी है। इसी बीच हुआ यह कि आकाश के प्रभाव क्षेत्र की इमारतों को जर्जर बताकर गिराने का खेल शुरू कर दिया गया। इस घटना से पांच दिन पहले ही एक इमारत गिराई गई। पीड़ितों ने विधायक को बुलाया लेकिन आकाश उनकी कोई मदद नहीं कर पाए। लिहाजा, जनता का उलाहना तो झेलना ही था। हालत यह हुई कि आकाश के विरोध के बावजूद एक इमारत ध्वस्त कर दी गयी। इसका सीधा-सा असर आकाश समर्थकों के यकीन पर पड़ा और उसकी परिणति विजयवर्गीय के बेटे ने गुस्से के तौर पर प्रकट की। जाहिर है आकाश की कोशिश खुद की एक विधायक के तौर पर धाक जमाने के फर्स्टेशन से जुड़ी है। खुद कैलाश विजयवर्गीय की धाक भी उनकी शुरूआती राजनीति के दौर में ऐसे ही बनी थी। उन्होंने किसी वर्दीधारी पुलिस अफसर पर हाथ छोड़ा था। इसलिए अगर आकाश के कदमों की उनके पिता वकालत कर रहे हैं तो जाहिर है यह सलाह भी उनकी ही हो सकती है। हालांकि लोकतंत्र में विरोध जताने के लोकतांत्रिक तरीके देश में स्थापित हैं। लेकिन ऐसे तरीकों से पहचान नहीं मिलती और जो आकाश ने किया वो झटके से मीडिया की सूर्खियों में आ गया। भाजपा विधायक के इस कृत्य को किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्हें कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। लिहाजा, कानून ने उनके साथ जो व्यवहार किया है वो सौ फीसदी सही है।  आगे पढ़ें

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सतना: सांसद प्रतिनिधि नीता सोनी और महापौर के बीच झूमाझटकी, हुई एफआईआर

महापौर ममता पांडेय ने कहा कि सांसद प्रतिनिधि नीता सोनी ने उन पर कांग्रेस का प्रचार-प्रसार करने का आरोप लगाया है जो पूरी तरह से निराधार है जबकि नीता सोनी ने इस बात की पुष्टि की है कि महापौर 100 प्रतिशत कांग्रेस का प्रचार कर रही हैं। इधर, भाजपा नेत्री व सांसद प्रतिनिधि नीता सोनी का कहना है कि उनका महापौर से कोई विवाद नहीं हुआ है। वे वार्ड क्रमांक-1 की पार्षद मीना माधव सहित एक अन्य महिला कार्यकर्ता बेबी गुप्ता के साथ विदेश मंत्री से मिलने भरहुत होटल पहुंची थीं। जहां पर सुषमा स्वराज पार्टी पदाधिकारियों के साथ लंच कर रही थीं। महापौर भी वहां मौजूद थीं।  आगे पढ़ें

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विधायकी का रिकार्ड बनाने वाले गौर सहित 13 विधायकों को नहीं मिला टिकट, गोविंदपुरा से कृष्णा गौर बनीं उम्मीदवार

भोपाल के गोविंदपुरा से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के बदले उनकी पुत्रवधु पूर्व महापौर कृष्णा गौर, कैलाश विजयवर्गीय के बदले बेटे आकाश को इंदौर 3 से टिकट दिया। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी घट्टिया से, भिंड से चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी को प्रत्याशी बनाया गया है।  आगे पढ़ें

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