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रायसेन में अनियंत्रित होकर नदी में गिरी बस, 6 की मौत, 22 को रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया, कई लापता

कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने बताया कि ओम साई राम ट्रैवल्स की बस पुल पर बड़े गड्?ढे की वजह से अनियंत्रित हो गई और रेलिंग तोड़कर नदी में समा गई। नदी में बहाव तेज होने के कारण रात को रेस्क्यू में दिक्कत आई। पुलिस की टीम गोतागोरों की मदद से तलाशी अभियान चला रही है। देर रात तक 5 लोगों के शव निकाले जा चुके थे। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ ने कहा- समाज में व्याप्त तनाव से मुक्त होने गांधी के दिखाए मार्ग पर चलना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में एक समय ऐसा आता है जब सही राह की आवश्यकता होती है। आज हमारे देश, समाज और पूरी दुनिया में जो हालात हैं उसका निदान महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चलकर ही होगा। उन्होंने कहा कि अपने साधारण से व्यक्तित्व से उन्होंने अंग्रेजों का मुकाबला कर उनसे भारत को मुक्ति दिलाकर असाधारण और अभूतपूर्व काम किया। उन्होंने कहा कि देश अगर महात्मा गांधी के रास्ते पर नहीं चला तो हमारी संस्कृति नष्ट हो जाएगी।  आगे पढ़ें

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25 साल बाद देश में बारिश ने तोड़ा रिकार्ड, भोपाल में अब तक गिरा 1756 मिमी पानी

मौसम विभाग के 36 सब-डिवीजनों में से दो पश्चिमी मध्यप्रदेश के साथ सौराष्ट्र और कच्छ स्थित विभागों में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज हुई। दक्षिण पश्चिम मानसून ने इस वर्ष भोपाल में बारिश का 1756.5 मिलीमीटर का नया आॅल टाइम रिकॉर्ड बनाया है। मौसम विज्ञान भोपाल केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी.के. साहा ने बताया कि इससे पूर्व 2006 में मानसून सीजन (जून से सितंबर तक) 1686.4 मिलीमीटर बारिश का रिकॉर्ड था, जो इस वर्ष 18 सितंबर को टूट गया था। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश से प्रदेश की औसत वर्षा का भी रिकार्ड टूटा है। इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से 43% अधिक औसत बारिश हुई है। जबकि 13 साल पहले 2006 में सामान्य से 41% ज्यादा औसत वर्षा हुई थी।  आगे पढ़ें

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कमलनाथ पर साधा निशाना, बताया सबसे असहाय सीएम

राकेश सिंह ने कहा कि हम पहले से कहते आ रहे है कि इस सरकार ने प्रदेश में एक ही उद्योग स्थापित किया है और वो है तबादला उद्योग। अब यही बात कांग्रेस के मंत्री और विधायक भी कह रहे हैं। ऐसे में कमलनाथ को खुद ही सीएम पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस आलाकमान ने यह कहना चाहिए कि वो जिसे चाहे प्रदेश का सीएम बनाएं। लेकिन मैं चुनौती देता हूं कि कमलनाथ कभी ऐसा नहीं कर पाएंगे, अगर वे ऐसा करेंगे तो उनकी ही पार्टी के लोग इस सरकार को चलने नहीं देंगे।  आगे पढ़ें

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पन्ना जिले से झज्जर मजदूरी करने गए एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या, इनमें दो महिलाएं भी शामिल

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से झज्जर में मेहनत मजदूरी करने आए एक ही परिवार की दो महिलाओं समेत पांच लोगों की सिर में चोट मारकर बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पांचों सदस्यों के शव झज्जर के सेक्टर 6 स्थित निमार्णाधीन मकान में मिले। यह परिवार इसी मकान को बनाने में पिछले डेढ़ माह से मजदूरी कर रहा था। हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंगलवार 8 बजे मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल में रखवाया है।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश का आष्टा बनेगा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का हब, नार्वे की कंपनी काम को देगी अंजाम

प्रदेश में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ नए-नए क्षेत्रों में काम करने की रणनीति पर चल रहे हैं। उन्होंने मुंबई में उद्योगपतियों के साथ गोलमेज सम्मेलन के दौरान साफ कर दिया था कि वे मध्यप्रदेश को देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हब बनाना चाहते हैं। इसके लिए निवेशकतार्ओं को हर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।  आगे पढ़ें

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भारी बारिश से प्रदेश को 4-5 दिन तक राहत मिलने की उम्मीद नहीं , 17 जिलों में अलर्ट जारी

राज्य के आधे से भी ज्यादा हिस्से को अभी अगले 4-5 दिन तक भारी और अति भारी बारिश से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। स्थानीय मौसम केन्द्र के मुताबिक पूर्वी मध्यप्रदेश में तो बारिश का प्रभाव अपेक्षाकृत कम है, लेकिन पश्चिमी मध्यप्रदेश में वर्षा की तीव्रता, वेग और प्रभाव ज्यादा है। विभाग ने प्रदेश के इंदौर, धार, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, देवास, नीमच, मंदसौर, होशंगाबाद, बैतूल और हरदा जिलो में बारिश का अनुमान जताया है। वहीं, भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, गुना, अशोकनगर, अनूपपुर, डिंडोरी, उमरिया, शहडोल, रीवा, सागर, सिवनी, नरसिंहपुर जबलपुर, मंडला, कटनी, छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है।  आगे पढ़ें

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न थकने वाले ऐसे करामाती

उस सरकार की सोचिए, जिसके हिस्से ही यह शोर मचा रहे हों कि इसके तमाम लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। मध्यप्रदेश ने ऐसे बदलाव वाले वक्त की कभी भी कामना नहीं की थी। क्योंकि मामला वक्त के बदलाव का नहीं, बल्कि बदला लेने वाले वक्त में तब्दील होकर रह गया है। यह सब देखकर जनता पार्टी की उस सरकार का कार्यकाल और हश्र याद आ गया, जो अंतत: अपने नेताओं के आपसी घमासान में ही खत्म हो गयी थी। ऐसा उदाहरण सामने होने के बावजूद राज्य की सरकार एवं कांगे्रस संगठन गुटाधीशों के हाथ का खिलौना बनकर रह गये हैं। क्या यह स्थिति उस समय किसी भी लिहाज से ठीक कही जा सकती है, जब प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव तेजी से नजदीक आते जा रहे हैं। सरकार बनने के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद निकाय चुनाव ही कमलनाथ की इज्जत और राज्य में पार्टी की ताकत में कुछ इजाफा कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल जो चल रहा है, उसे देखते हुए यह आशंका जतायी जा सकती है कि यहां भी मामला लोकसभा चुनाव जैसा ही हो सकता है।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश में भारी बारिश से प्रदेश की सड़कें हुईं बदहाल, सरकार हुई चिंतित

लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों से विभागीय टीम के जरिए सड़कों की मैदानी रिपोर्ट मंगवाई है। मानसून के दौरान अब तक प्रदेश के 34 जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई है। इनमें 270 गांव भी शामिल हैं। इस कारण यहां की सड़कें भी प्रभावित हुई हैं। इनमें ग्रामीण सड़कें और अन्य जिला मार्गों पर सबसे ज्यादा गड्ढे हो गए हैं। हालत यह है कि इन पर आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  आगे पढ़ें

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क्या ये आपातकाल की वापसी है....

भोपाल मध्य से पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह पर पुलिस ने 23 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह उस आवाज को उठाने की सजा है, जिसे जनता की आवाज कहते हैं। वही स्वर, जिसकी दुहाई देते हुए राहुल गांधी आज कश्मीर का नजारा करने पहुंच गए थे, बावजूद इसके कि वहां के प्रशासन ने उन्हें आने की अनुमति नहीं दी। वहां पुलिस का लाठीचार्ज हुआ, जो कानून व्यवस्था बनाने का एक हिस्सा है। कानून व्यवस्था के लिए वो यहां भी हो सकता था अगर किसी अशांति की आशंका हो। लेकिन यह तो नहीं हुआ, पुलिस ने कहा कि उसका रोजाना का काम प्रभावित हुआ है और उससे उसे जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई वो सुरेन्द्रनाथ सिंह से करने का इरादा रखती है। यानि नागरिक प्रदर्शन को मध्यप्रदेश में भारी-भरकम अपराध की शक्ल दे दी गयी है। इस सजा का गुनाह रोचक है। दलील दी गयी कि सिंह द्वारा किये गये जन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने पर यह राशि खर्च हुई है।  आगे पढ़ें

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