होम बीएसपी
after-the-loss-in-the-lok-sabha-elections-sp-leade

लोस चुनाव में मिली हार के बाद सपा नेताओं ने तोड़ी चुप्पी, कहा- गठबंधन में हुई देरी

इस लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट पर जीत हासिल करने वाले समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन कहते हैं, 'मुझे लगता है कि हमारे वोट (एसपी और बीएसपी के वोट) एक साथ जुड़े नहीं। लोगों को भी हमारे गठबंधन के बारे में कम जानकारी रही। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि बीएसपी के साथ गठबंधन में देरी हुई। ऐसे में पर्याप्त समय नहीं होने के कारण पार्टी लोगों तक इस संदेश को पहुंचाने पाने में नाकाम रही।'  आगे पढ़ें

modis-wave-collapsed-ups-equation-maha-coalition-h

मोदी लहर में ध्वस्त हुआ यूपी का समीकरण, महागठबंधन को 15 सीटों पर करना पड़ा संतोष

एसपी और बीएसपी ने बैर को भुलाते हुए साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब इसे बड़े जनाधार को प्रभावित करने वाले गठबंधन के रूप में आंका गया था। आरएलडी के साथ आने से महागठबंधन को और मजबूत माना जा रहा था। इस गठबंधन को फेल होने को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने फरवरी में ही मायावती के साथ बेटे अखिलेश के गठबंधन पर नाराजगी जाहिर की थी।  आगे पढ़ें

before-the-last-phase-of-voting-in-up-the-challeng

यूपी में आखिरी चरण की वोटिंग से पहले सपा-बसपा के लिए चुनौती बने बागी

मोदी लहर में हुए पिछले लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो इस चरण का अधिकतर सीटों पर एसपी-बीएसपी अलग-अलग अपना झंडा गाड़ती रही हैं। धुर जातीय गणित पर लड़ी जाने वाली इन सीटों पर दोनों ही पार्टियों के साथ आने से उनके रणनीतिकारों की जीत की उम्मीद और बढ़ गई है। लेकिन, समस्या अपने ही है। नजीर के तौर पर देवरिया सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार नियाज अहमद ही गठबंधन के लिए चुनौती बने हुए हैं। नियाज पिछली बार यहां बीएसपी से उम्मीदवार थे। घोसी सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार बालकृष्ण चौहान भी बीएसपी से गए हैं। चंदौली में गठबंधन का खेल बिगाड़ रहीं कांग्रेस उम्मीदवार शिवकन्या कुशवाहा मायावती के खास रहे बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी हैं। पिछली बार वह गाजीपुर से एसपी की उम्मीदवार थीं। रार्बट्सगंज से बीजेपी उम्मीदवार पकौड़ी लाल पिछली बार एसपी के उम्मीदवार थे।  आगे पढ़ें

vatkatva-congress-is-not-angry-at-the-coalition

'वोटकटवा' कांग्रेस पर गठबंधन का गुस्सा यूं ही नहीं!

दरअसल, गठबंधन का यह गुस्सा अनायास नहीं है। इन तीन चरणों की 41 सीटों में करीब 24 सीटों पर कांग्रेस ने मुकाबले को सीधा या त्रिकोणीय बना बीजेपी से अधिक गठबंधन को सकते में ला दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव अपनी पार्टी को इशारे में 'वोट कटवा' बता चुकी हैं। उनका कहना है कि जिन सीटों पर कांग्रेस की स्थिति हल्की है, वहां ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे बीजेपी का वोट काट सकें।  आगे पढ़ें

states-politics-overheating-mayawati-threatens-to-

प्रदेश की सियासत गरमाई: बसपा प्रत्याशी के कांग्रेस में जाने पर मायावती ने दी समर्थन वापसी की धमकी

मायावती यहीं नहीं रुकी उन्होंने लिखा कांग्रेस पर निशाना साधते हुए लिखा कि, यूपी में कांग्रेसी नेताओं का ये प्रचार कि भाजपा भले ही जीत जाए, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन को नहीं जीतना चाहिए, ये कांग्रेस पार्टी की जातिगत, संकीर्ण सोच को दर्शाता है। बता दें कि गुना लोकसभा सीट से बीएसपी के प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह राजपूत सोमवार रात को यहां से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्नसिंह तोमर सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।  आगे पढ़ें

akhilesh-said-the-attack-on-congress-after-keeping

महागठबंधन से दूर रखने के बाद कांग्रेस पर अखिलेश ने बोला हमला, कहा- समाजवादियों को दिया धोखा

एसपी चीफ अखिलेश यादव ने कहा, हमारा कांग्रेस के साथ गठबंधन था। लेकिन, हमने यह पाया कि उनका अहंकार बहुत ज्यादा है। समाजवादी पार्टी ने 2017 में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लड़ा था। हालांकि लोकसभा चुनाव में एसपी-बीएसपी और आरएलडी ने कांग्रेस को अपने महागठबंधन से परे रखा है। हालांकि गठबंधन ने रायबरेली और अमेठी की कांग्रेस की परंपरागत सीटों से उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया है। कांग्रेस को साथ न लेने पर अखिलेश ने कहा, बीजेपी को कांग्रेस नहीं बल्कि एसपी और बीएसपी का अलायंस सत्ता में आने से रोक रहा है। एसपी लीडर ने कांग्रेस पर अपने पिता और सूबे के पूर्व सीएम मुलायम सिं यादव के खिलाफ सीबीआई के इस्तेमाल का आरोप लगाया।  आगे पढ़ें

expansion-in-the-sp-bsp-relationship-today-there-w

सपा-बसपा के रिश्तों में बढ़ रहीं नजदीकियां, आज एक मंच पर होंगे माया-मुलायम

गौरतलब है कि यूपी की आजमगढ़ से लोकसभा सांसद मुलाम सिंह यादव इसबार मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके नामांकन के दौरान भी बीएसपी के नेता मौजूद रहे थे। शुक्रवार को मैनपुरी में ही होने जा रही इस रैली में मुलायम और मायावती के अलावा एसपी के वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्टीय लोकदल अध्यक्ष और गठबंधन सहयोगी चौधरी अजित सिंह भी शामिल हो सकते हैं।  आगे पढ़ें

baroda-modi-on-coalition-in-moradabad-said-sp-bsp-

मुरादाबाद में गठबंधन पर बरसे मोदी, कहा- सपा, बसपा एक दूसरे के गुनाहों को माफ कर एक साथ आईं

मोदी ने कहा, 'अरे बबुआ (अखिलेश यादव), शौचालय की चौकीदारी का महत्व क्या है यह आप नहीं समझ पाएंगे। आपके पास आज विदेशी टाइलों, विदेशी टोटियों वाला टॉइलट है लेकिन उन करोड़ों बहन-बेटियों से पूछों जिनको आपने अंधेरे का इंतजार करने को मजबूर रखा था।' बता दें कि बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास में तोड़फोड़ के बाद उन पर चौतरफा हमले हुए थे। दरअसल, अखिलेश के द्वारा बंगला खाली किए जाने के बाद जब उसे खोला गया तो आलीशान महल की तर्ज पर दिखने वाला आवास तहस-नहस मिला था। इसके बाद अखिलेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें वह टोटी लेकर पहुंचे थे।  आगे पढ़ें

in-the-case-of-bank-balance-mayawatis-party-is-at-

बैंक बैलेंस के मामले में मायावती की पार्टी सबसे आगे, सपा दूसरे स्थान पर

कांग्रेस इस सूची में तीसरे स्थान पर है जिसके पास 196 करोड़ रुपये बैंक बैलंस है। हालांकि, यह जानकारी पिछले साल 2 नवंबर को चुनाव आयोग को दी गई जानकारी पर आधारित है। पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत के बाद अपने बैलंस को लेकर ब्यौरा अपडेट नहीं किया है। बीजेपी इस सूची में क्षेत्रीय पार्टियों से भी पिछड़ रही है और टीडीपी के बाद पांचवें स्थान पर है। बीजेपी के पास 82 करोड़ रुपये बैंक बैलंस है, जबकि टीडीपी के पास 107 करोड़ रुपये हैं। बीजेपी का दावा है कि इसने 2017-18 में कमाए गए 1027 करोड़ में से 758 करोड़ खर्च कर दिए जो कि किसी भी पार्टी द्वारा खर्च की गई सबसे अधिक राशि है।  आगे पढ़ें

deoband-rally-ajit-singh-had-to-drop-shoes-to-shar

देवबंद रैली: मायावती के साथ मंच साझा करने के लिए अजित सिंह को उतारने पड़े जूते

पहले चरण के चुनाव से पहले सहारनपुर के देवबंद में हुई महागठबंधन में भी मायावती का ऐसा ही कुछ अंदाज देखने को मिला। यहां माया के प्रोटोकॉल से एक पल को आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह भी हैरान रह गए। दरअसल अजित सिंह ने जैसे ही मायावती और अखिलेश के पीछे-पीछे मंच पर चढ़ना शुरू किया, तभी बीएसपी के एक को-आॅर्डिनेटर ने अजित सिंह से जूते उतारने के लिए कह दिया। उसने आरएलडी अध्यक्ष को बताया कि मायावती को पसंद नहीं है कि मंच पर उनके सामने कोई जूते पहनकर बैठे, सिवाय खुद उनके।  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति