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गृहमंत्री ने पेश किया अपना रिपोर्ट कार्ड, कहा- एक साल में 5 लाख से अधिक युवाओं तक पहुँचा नशा मुक्ति अभियान

गृह एवं जेल मंत्री बाला बच्चन ने कहा है कि राज्य सरकार ने सत्ता सम्हालते ही सबसे पहले गुंडों और आदतन अपराधियों, अवैध शस्त्र रखने वालों, मादक पदार्थों, महिला अपराधों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही शु्रू की, जिसके सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। एक वर्ष में हत्याओं में 3.5 प्रतिशत, हत्या के प्रयासों में 3.93 प्रतिशत, डकैती में 20.37 प्रतिशत और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में 12.96 प्रतिशत की कमी आयी है। बलात्कार के मामलों में भी कमी आयी है। कुल मिलाकर आईपीसी अपराधों में अभूतपूर्व कमी आयी है।  आगे पढ़ें

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...इसके लिए दिग्विजय बनना पड़ता है

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मंदिरों को बलात्कार वाली जगह भी बता दिया है। इस वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने यह बयान बेहद पेशेवर शातिराना तरीके से और षड़यंत्रपूर्वक दिया है। यह बात उन तथाकथित साधु-संतों के सामने कही गयी, जिन्हें आज टीवी चैनलों पर देखकर साफ समझ आ रहा था कि वे वहां धर्म नहीं, बल्कि सत्ता से समागम के लालच में पहुंचे हैं। उनमें से अधिकांश ने भगवा वस्त्र ही धारण कर रखे थे। समाज को दिखाने के लिए ही सही, अधिकांश नियम से मंदिर भी जाते ही होंगे। किंतु किसी ने भी दिग्विजय के कथन का विरोध नहीं किया। जब धर्म, पहनावे एवं धार्मिक स्थल के प्रति कोई श्रद्धा ही नहीं है तो फिर विरोध भी कैसा। read more  आगे पढ़ें

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नशा और नंगई के बीच नौनिहाल

कई बहुप्रतिष्ठित अखबारों पर यह आरोप लग चुका है कि वे यूजर्स, लाईक,हिट्स बढ़ाने के लिए पोर्न सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि यूजर्स की संख्या के आधार पर ही विग्यपन मिलते हैं। यानी कि वर्जनाओं को वैसे ही फूटने का मौका मिला जैसे कि बाढ़ में बाँध फूटते हैं। सारी नैतिकता इसके सैलाब में बह गई। कमाल की बात यह कि साँस्कृतिक झंडाबरदारी करने वाली सरकार ने इस पर दृढता नहीं दिखाई। इंदौर हाईकोर्ट के वकील कमलेश वासवानी की जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 850 पोर्नसाईटस पर प्रतिबंध लगाने को कहा। सरकार ने दृढ़ता के साथ कार्रवाई शुरू तो की लेकिन जल्दी ही कदम पीछे खींच लिए।  आगे पढ़ें

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घर से होगी सुधार की शुरूआत.....

बलात्कारियों की संख्या भी बढ़ती ही जा रही है। सबसे बड़ी समस्या यह कि पेशेवर अपराधी ऐसी वारदातों को अंजाम नहीं दे रहे। योन उत्पीड़न के मामलों में आमतौर पर अपराधियों का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे अपराध के लिहाज से जिन्हें स्लिपर सेल कह सकते हैं। स्लिपर सेल आतंकियों की शब्दावली का हिस्सा है। यह वह लोग होते हैं, जिनके भीतर आतंकी भाव छिपा रहता है। बेहद सामान्य तरीके से जीवन जीते हैं। फिर यकायक वारदात को अंजाम दे गुजरते हैं। अब देखिए। किसी बच्ची का कोई पड़ोसी, या नजदीकी रिश्तेदार इसी तरह यकायक उसके साथ ज्यादती कर देता है। कोई शख्स तो साठ साल या इससे अधिक की अवस्था के बाद इस अपराध में शामिल हो जाता है। तो जाहिर है कि ऐसे स्लिपर सेल्स को पहचानना आसान नहीं है। लिहाजा अपराध होने से पहले ही उसे रोक देने जैसी कोई बात इस मामले में कम से कम पुलिस तो नहीं सोच सकती।  आगे पढ़ें

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मासूम से बलात्कार, खुदकुशी की

मध्यप्रदेश के बड़वानी के एक गांव कमोदवाड़ा में बलात्कार की शिकार एक मासूम बच्ची ने कुएं में कूद कर खुदकुशी कर ली। तीन दिन पहले बच्ची के साथ उसके करीबी रिश्तेदार ने उससे अपनी हवस का शिकार बनाया था। बच्ची से बलात्कार और उसकी आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।  आगे पढ़ें

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इंसाफ अभी बाकी है

कानून बनने के बाद फांसी की सजाओं का ऐलान तो हो गया, लेकिन एक भी मामले में इस सजा पर अब तक अमल नहीं किया जा सका है। यानी अंधेरे में चप्पू चलाए जाते रहे लेकिन नाव रत्ती भर भी आगे नहीं सरक सकी। फांसी की इस सजा से इन वीभत्स मामलों के अपराधियों में जो खौफ पैदा होना चाहिए था, वो कहीं नजर नहीं आ रहा है। बल्कि लग ऐसा रहा है कि मासूम बच्चियां अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। निश्चित ही दण्ड के रूप में भी सही, लेकिन किसी की जान लेने का फैसला दुर्लभतम हालात में ही लिया जाना चाहिए। देश में ऐसा हो भी रहा है, लेकिन ऐसे हालात कानून की नजरों में साबित हो जाने के बावजूद फांसी की सजा के अमल में गैर जरूरी देरी समझ से परे है। बीते चौदह साल में देश में 371 अपराधियों के लिए सजा-ए-मौत का ऐलान किया गया, लेकिन फांसी केवल चार को दी जा सकी है।read more  आगे पढ़ें

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