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कांग्रेस में अब सुनामी की जरूरत

एक राष्ट्रीय मीडिया समूह कांग्रेस की सिफर वाली पराजय से शायद बहुत दु:खी हो गया। उसने लिखा कि इस दल ने खुशी से खुदकुशी कर ली है। ताकि भाजपा को जीतने से रोका जा सके। लेकिन यह तथ्य सही नहीं है। कांग्रेस को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की ही तरह दिल्ली में भी किस्मत से छींका फूटने की उम्मीद थी। यही वजह रही कि उसने अरविंद केजरीवाल की कोशिशों के बावजूद इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन से साफ इनकार कर दिया था। लाख रुपए का सवाल यह कि क्या यह दल इस पराजय के बाद पूरी निष्पक्षता से इसके कारणों की समीक्षा कर सकेगा? क्या उसके शुभचिंतक उस सुरंग में घुसकर हार की वजहों पर प्रकाश डाल पाएंगे, जिस सुरंग के भीतर गांधी-नेहरू परिवार नामक अंधेरा लम्बे समय से कुंडली मारकर बैठा हुआ है? ‘परिवार पूजन’ के कर्मकांड में आकंठ डूबी कांग्रेस यह समझ ही नहीं पा रही कि उसके अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी के बाद से पार्टी को अधिकांश मौकों पर शर्मनाक हार सहने की आदत-सी पड़ गयी है। सोनिया गांधी का स्वास्थ्य अब उनका साथ नहीं दे पा रहा। लिहाजा प्रियंका वाड्रा को आगे लाया गया।  आगे पढ़ें

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इस एकजुटता का सबब

चिदंबरम पर मामूली आरोप नहीं हैं। यह अरबों रुपए की गड़बड़ी का मामला है। मंत्री पद के दुरूपयोग का किस्सा है। इसलिए अधीर रंजन चौधरी जब आज बोले कि पूर्व मंत्री के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार किया गया, तो यह समझना चाहिए कि यह महज जांच एजेंसियों और केंद्र सरकार पर आरोप नहीं है। यह इस बात की ओर भी इंगित करता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता चौधरी ने माना है कि चिदंबरम से उस सख्ती से पूछताछ की गयी, जिसका प्रयोग आतंकवादी या फिर अन्य गंभीर अपराधों में लिप्त लोगों के लिए किया जाता है। कई और भी बातें कई दिशाओं में इंगित करती हैं। कांग्रेस जिस तरह अपने इस नेता को बचाने के लिए उद्विग्न दिखी, उसे एकता दिखाने का जतन मानकर चुप रहना मूर्खता होगी।  आगे पढ़ें

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आईएनएक्स मीडिया केस: ईडी को मिली चिदंबरम की गिरफ्तारी की इजाजत, तिहाड़ में करेगी पूछताछ

दिल्ली की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से पूछताछ और गिरफ्तारी की इजाजत दे दी। कोर्ट ने ईडी को चिदंबरम से 30 मिनट तक पूछताछ का विकल्प भी दिया है। ईडी ने आईएनएक्स मीडिया केस में मनी लॉन्ड्रिंग पर पूछताछ के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेने की अनुमति मांगी थी।  आगे पढ़ें

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चिदंबरम ने कहा- मैं इन्द्राणी मुखर्जी से कभी नहीं मिला, जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जमानत मिलने पर वह देश छोड़कर भाग सकते हैं। बचाव पक्ष की तरफ से चिदंबरम को सम्मानित नागरिक बताए जाने पर सीबीआई के वकील ने कहा- हमारा अनुभव बताता है कि पूर्व में जो देश छोड़कर भागे, वे सब भी सम्मानित और जिम्मेदार उद्योगपति थे। चिदंबरम ताकतवर और प्रभावशाली हैं। वह किसी भी दूसरे देश में सेटल होने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत हैं।  आगे पढ़ें

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तिहाड़ में गुजरी चिदंबरम की रात, सारी रात सीमेंट की फर्श पर सोए, दूसरे कैदियों की तरह दी गई थी दरी और चादर

सोने से पहले रात के खाने में उन्होंने दाल, रोटी और सब्जी खाई। जेल में उनकी दिनचर्या सुबह छह बजे शुरू हुई। सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक उन्हें उन तमाम प्रक्रियाओं का सामना करना होगा जो अन्य कैदी करते हैं। सुबह छह बजे सोकर उठने के बाद सात बजे वह अपने सेल के बाहर निकलकर कैदियों की गिनती में शामिल हुए। तिहाड़ जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक राजकुमार ने बताया कि जेल की सेल में चौकी या चबूतरे की सुविधा नहीं दी सकती।  आगे पढ़ें

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2 सितंबर तक सीबीआई की कस्टडी में रहेंगे पूर्व वित्तमंत्री, उधर ईडी ने भी कोर्ट में पेश किए दस्तावेज

आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई की विशेष अदालत ने 2 सितंबर तक जांच एजेंसी की कस्टडी में भेज दिया। विशेष जज अजय कुमार कुहार के सामने चिदंबरम को पेश किया गया था। जस्टिस अजय कुमार ने 26 अगस्त को चिदंबरम को 4 दिन की कस्टडी में भेजा था। उधर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश किए। 20 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सीबीआई ने चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। वह 8 दिन से कस्टडी में हैं।  आगे पढ़ें

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चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक एक दिन और बढ़ी, ईडी ने कहा- गिरफ्तारी से बचने की कर रहे कोशिश

सुप्रीम कोर्ट 20 अगस्त को दाखिल की गई चिदंबरम की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच के सामने तुषार मेहता ने कहा- चिदंबरम विक्टिम कार्ड इसलिए खेल रहे हैं ताकि इस केस में ईडी की गिरफ्तारी से बचा जा सके। हमने इस मामले में मजबूत चीजें इकट्ठा की हैं। हमारे पास दस्तावेज हैं, जो यह दशार्ते हैं कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला है।  आगे पढ़ें

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आईएनएक्स मीडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई, ईडी चिदंबरम की दलीलों पर रखेगी अपना पक्ष

सिब्बल ने कहा था कि पिछले 3 दिनों में चिंदबरम से जो पूछताछ की गई है, सुप्रीम कोर्ट उसकी कॉपी हमें उपलब्ध कराने का निर्देश दे। सिब्बल ने जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच से कहा- ईडी पूछताछ की जो कॉपी उपलब्ध कराएगी, उससे यह पता चल जाएगा कि पूछताछ के दौरान चिंदबरम ने सवालों के जवाब गोलमोल दिए, या नहीं। जैसा कि ईडी ने आरोप लगाया था। ईडी चिदंबरम की कस्टडी के लिए यूं ही या चुपचाप कोर्ट में दस्तावेज नहीं रख सकती है। ईडी अचानक अदालत में दस्तावेज पेश कर रही है और इन्हें केस डायरी का हिस्सा बता रही है।  आगे पढ़ें

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आईएनएक्स मीडिया मामले में चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

आईएनएक्स मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और सीबीआई ने भ्रष्टाचार का केस दायर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 23 अगस्त को सुनवाई करते हुए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) मामले में 26 अगस्त तक चिदंबरम को गिरफ्तार न करने के लिए कहा था। सीबीआई मामले में चिदंबरम को कोई राहत नहीं दी थी। चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा था, इंसाफ पाना चिदंबरम का मूल अधिकार है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। लेकिन जिस तरह से मामले को डील किया जा रहा है, वह बेचैन करने वाला है। हाईकोर्ट में जिरह खत्म होने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस गौर को नोटिस दे दिया। हमें जवाब देने का भी मौका नहीं दिया गया।  आगे पढ़ें

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चिदंबरम को कोर्ट से नहीं मिली राहत, पूछताछ के लिए 26 अगस्त तक सीबीआई रिमांड पर भेजा

विशेष अदालत ने गुरुवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर भेजने का फैसला सुनाया। सीबीआई के वकील सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि चिदंबरम ने जांच में सहयोग नहीं किया। पूछताछ के लिए उन्हें 5 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा जाए। इसका विरोध करते हुए चिदंबरम के वकील ने कहा कि सीबीआई के हिसाब से जवाब न देने को असहयोग नहीं कहा जाएगा। कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि जब सीबीआई के पास सवाल तक तैयार नहीं हैं तो फिर रिमांड क्यों चाहिए?  आगे पढ़ें

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