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प्रदेश सरकार को झटका: नगरीय निकायों की सीमा बढ़ाने के नोटिफिकेशन पर कोर्ट ने लगाई रोक

प्रदेशभर के नगरीय निकायों की सीमा बढ़ाए जाने के राज्य सरकार के नोटिफिकेशन पर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है। सीमा बढ़ाने जाने के राज्यपाल के अधिकार को संविधान के विपरीत कलेक्टर को दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। अब सरकार को दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करना है कि राज्यपाल ने अपने अधिकार कलेक्टर को कैसे दिए। हाईकोर्ट ने पिछले दिनों सुनवाई पूरी कर अंतरिम आदेश पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। फिलहाल जहां-जहां परिसीमन के जरिए निकायों की सीमा बढ़ाने का काम चल रहा है वहां हाईकोर्ट का यह आदेश लागू रहेगा।  आगे पढ़ें

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आउटडोर विज्ञापन नियम को सख्त बनाने कैबिनेट बैठक आज, पोस्टर लगाने निगम को देनी होगी फीस

नेताओं के स्वागत, जन्म दिन आदि के बैनर-पोस्टर सड़कों या निजी मकानों पर लगाने के लिए अब नगर निगम की अनुमति लेनी होगी। अनुमति देने के लिए निगम इसकी फीस भी लेगा। यदि बिना अनुमति पोस्टर-बैनर लगाए गए तो निगम उन्हें अवैध मानकर हटा देगा। इसके लिए मध्यप्रदेश आउटडोर विज्ञापन नियम 2017 को और सख्त बनाने के लिए एक प्रस्ताव गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में लाया जा रहा है। अभी नगरीय निकाय अधिनियम में यह प्रावधान तो है लेकिन उनका पालन नहीं हो पा रहा है।  आगे पढ़ें

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भाजपा ने कांग्रेस पर देश की तरह नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने का लगाया अरोप, आज बुलाई बैठक

राज्य सरकार ने भोपाल की जनसंख्या वृद्धि और लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर आम लोगों से दावे व आपत्तियां भी मंगाए गए हैं। दावा या आपत्ति 16 अक्टूबर तक दर्ज कराए जा सकेंगे। नगर निगम को भोपाल और कोलार दो क्षेत्रों में बांटे जाने के फैसले पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है।  आगे पढ़ें

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नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था से कराने पर तय समय पर नहीं होंगे चुनाव

नई व्यवस्था से चुनाव होने की वजह से कई सारे बदलाव होंगे। महापौर व अध्यक्ष को वापस बुलाने खाली कुर्सी, भरी कुर्सी के लिए मतदान अब नहीं होगा। परिसीमन चुनाव से दो माह पहले तक होगा। इसके मायने यह हुए कि नवंबर तक वार्डों का परिसीमन होगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची एक जनवरी 2020 की स्थिति में तैयार कराएगा। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण 15 फरवरी को होगा। इस हिसाब से तय समय पर चुनाव अब नहीं हो पाएंगे।  आगे पढ़ें

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सियासी हलचल के बाद राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष

चार दिन की सियासी हलचल के बाद मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने मप्र नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुमोदन कर दिया। अध्यादेश लागू होने पर नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। सरकार का ऐसा मानना है कि महापौर के चुनाव सीधे नहीं होने से करीब 30-35 करोड़ रु. बचेंगे। भोपाल में ही करीब 3 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च होने का अनुमान रहता है। उधर, राजनीतिक दलों के खर्चों को भी जोड़ा जाए तो अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर के चुनाव में खर्च होने वाली राशि शासकीय खर्च का 5 से 6 गुना होती है। सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव से संबंधित दो बिल राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे थे।  आगे पढ़ें

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निकाय चुनाव: राज्यपाल ने मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव से जुड़े अध्यादेश को रोका, मंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट करने की कोशिश

कैबिनेट से मंजूरी के बाद राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों दो अध्यादेश राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजे थे। इनमें से एक पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे से जुड़ा था व दूसरा मेयर के चुनाव से। मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव के साथ इसमें पार्षदों के एक ही जगह वोटर होने व परिसीमन व चुनाव के बीच कम से कम 6 माह की बाध्यता को दो माह करने का जिक्र है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने फिलहाल इस पर निर्णय नहीं लिया है। इससे राजभवन व राज्य सरकार के बीच पशोपेश की स्थिति बन गई है।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में लगाई मुहर, अब फिर पार्षद चुनेंगे महापौर और नपा अध्यक्ष

अगले साल (2020) में वाले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे नहीं होगा। चुनाव में जीतकर आए पार्षद अब महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनेंगे। कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में इस बदलाव पर मुहर लगा दी है। सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।  आगे पढ़ें

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प्रदेश में 20 साल बाद लागू होगी फिर लागू होगी पुरानी व्यवस्था, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष

राज्य सरकार प्रदेश में 20 साल बाद फिर से नगरीय निकायों में अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर और अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था करने पर विचार कर रही है। इसके तहत पार्षद महापौर को चुनेंगे। इस संबंध में बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश के नगरीय निकायों में आम चुनाव के जरिए जनता वोट कर महापौर या अध्यक्ष को चुनती है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। प्रदेश में अगले साल मार्च के महीने में निकायों के चुनाव संभावित है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर का चुनाव कराए जाने के पीछे अपना राजनीतिक लाभ देख रही है।  आगे पढ़ें

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निकाय चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने तैयार की नई आचार संहिता, दायरे में होंगे केन्द्रीय कर्मचारी

सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी अपने स्तर पर शुरू कर दी है। मतदाता सूची बनाने का काम चल रहा है। वहीं, आदर्श आचार संहिता भी तैयार कर ली गई है। इसमें राजनीतिक दल और अभ्यर्थियों के लिए नया अध्याय जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि मतदान क्षेत्र में मतदान की समाप्ति के लिए तय अवधि से 48 घंटे पहले प्रचार बंद करना होगा। इस दौरान न तो कोई सार्वजनिक सभा हो सकेगी और न ही जुलूस होगा। ऐसे किसी माध्यम का भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिससे मतदाता को प्रभावित किया जा सके।  आगे पढ़ें

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निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार करेगी बदलाव, अब जनता नहीं पार्षद चुनेंगे महापौर और नपा-नप अध्यक्ष

दरअसल इस साल के अंत तक प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव होने हैं। वर्तमान में 16 नगर निगम के महापौर समेत अधिकांश नगर पालिका और नगर परिषद पर भाजपा के अध्यक्ष काबिज हैं, लेकिन प्रदेश में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस इन निकायों पर अपना कब्जा चाहती है। इसी मकसद से अधिनियम में संशोधन के लिए सीएम कमलनाथ ने मंत्रीमंडल की उप समिति का गठन किया है। अब समिति से मिले प्रस्तावों को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। इसके बाद अध्यादेश भी लाया जाएगा।  आगे पढ़ें

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