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ये कैसी ओछी राजनीति

मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार उन्माद में अंधी होती दिख रही है। वरना यह संभव ही नहीं था कि आम जनता के असीम दुख-दर्द की वजह बन चुके खराब रास्तों को लेकर इतनी खराब राजनीति की जाती। रायसेन में बीते दिनों बस पलटने से छह लोग मरे थे। पता चला कि पुल पर बने गड्ढे की वजह से ऐसा हुआ। एक अन्य घटना में कार की पीछे की सीट पर बैठी एक महिला सिर्फ इसलिए सिधार गयी कि सड़क पर बने भयावह गड्ढे में कार का पहियां चला जाने से उसका सिर वाहन की छत से टकरा गया था। होशंगाबाद में चार हॉकी खिलाड़ियों की कार भी इन्हीं गड्ढों के चलते अनियंत्रित होकर उनकी मौत का कारण बन गयी। यकीनन हादसे रोक पाना किसी के बस की बात नहीं है, लेकिन ऐसा न हो, इसके इंतजाम तो किये जा सकते हैं।  आगे पढ़ें

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सींगों से घिरे कमलनाथ

दिग्विजय ने गायों की फिक्र और इमरती के महिलाओं के गलत व्यवहार का जिक्र किया। दोनों ही कथन राज्य सरकार के कामकाज की समीक्षा के नजदीक नजर आते हैं। भाजपा तो गौ-माता के नाम पर जुबानी जमा खर्च करती रही, लेकिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने ट्विटर पर अंगुलियों की वो करामात दिखायी कि बेचारे वर्तमान मुख्यमंत्री को डिफेंसिव मोड में उतरना पड़ा। दिग्विजय ने जो कहा, वह गौ-मूत्र की तरह पवित्र और उसके गोबर की भांति ही लीप-पोतकर इस्तेमाल करने के लायक है। नाथ यदि वाकई गौवंश की हिफाजत का पुख्ता बंदोबस्त कर गुजरें तो शायद प्रदेश में भाजपा का एक बड़ा समर्थक वर्ग आसानी से उनके पीछे आकर खड़ा हो सकता है। यह उनके लिए बहुत आसान भी है। क्योंकि यह उस राज्य का मामला है, जहां भाजपा के हिंदुत्व के कटु विरोधी भी गाय को आहार के रूप में ग्रहण करने जैसी बात कम से कम सार्वजनिक तौर पर तो नहीं ही कहते हैं।  आगे पढ़ें

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गोमाता पर गरमाई सियासत: दिग्गी ने दी सलाह तो कमलनाथ ने कहा हमें चिंता है, मंत्री ने भी किया पलटवार

दिग्विजय ने सड़क दुर्घटना में गायों की मौत को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को सलाह दी थी कि भोपाल-इंदौर हाईवे पर लगभग हर दिन एक्सीडेंट में गोमाता मर जाती है। सरकार को तत्काल गायों को सड़कों से हटाकर गोशालाओं में भेजना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दिग्विजय की इस सलाह पर ट्वीट कर कहा कि मुझे चिंता है। गायों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं और एक हजार गोशालाओं का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिग्विजय सिंह की सलाह पर मैंने जो ट्वीट किया है वह सरकार के काम व नीति है। इसका कोई अन्य मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।  आगे पढ़ें

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गंभीरता से न लें इस घटनाक्रम को

सिंधिया का नाथ से खफा होना और प्रत्युत्तर में मुख्यमंत्री खेमे की ओर से सिंधिया पर पलटवार करना अनपेक्षित घटनाक्रम का हिस्सा कतई नहीं हैं। ग्वालियर राज घराने के चश्मो-चिराग को उनकी पार्टी ने हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया है। कहते हैं कि बुरा समय चल रहा हो तो ऊंट पर बैठे शख्स को भी कुत्ता काट लेता है। सिंधिया राहुल गांधी के कंधे पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहे थे। लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की बात आयी तो गांधी ने नाथ को गोद में उठाकर इस कुर्सी पर बैठा दिया। इसके बाद सिंधिया को उत्तरप्रदेश का जिम्मा सौंप दिया गया। बुरा समय इतना बुरा हुआ कि कांग्रेस यूपी के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारी और सिंधिया अपने परिवार की परंपरागत गुना सीट से पराजित हो गये। दुबले पर दो आषाढ़ वाली इस कमजोरी ने सिंधिया को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी दूर कर दिया है।  आगे पढ़ें

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जल्द बेची जाएगी गुना की नारायणपुरा शुगर मिल, कवायद शुरू, जारी होगा टेंडर

फरवरी 2019 से बंद व घाटे वाली गुना जिले की नारायणपुरा शुगर मिल को अब जल्द ही बेचा जाएगा। इसकी कवायद शुरू करने और टेंडर जारी करने का फैसला बुधवार को ले लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह शुगर मिल की समिति के सदस्यों के साथ मंत्रालय में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन के कक्ष में पहुंचे। आनन-फानन में सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी को बुलवाया गया।  आगे पढ़ें

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दिग्गी का संघ प्रमुख पर निशाना, कहा- जिन दिन संघ प्यार और गांधी के संदेश पर चलने का फैसला करेंगे उस दिन नफरत खत्म हो जाएगी

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। जहां सिंह ने कहा कि जिस दिन भागवत एकता का संदेश देना शुरू कर देंगे, उस दिन से हमारी पार्टी का संघ से सभी मतभेद भी खत्म हो जाएगा। वहीं, ओवैसी ने कहा कि भागवत को न तो संविधान पर भरोसा है और न ही संविधान निमार्ता बीआर अंबेडकर पर। दिग्विजय ने संवाददाताओं से यहां कहा कि जिस दिन से वे (संघ) प्यार और गांधीजी के संदेश पर चलने का फैसला करेंगे, मॉब लिंचिंग और नफरत भी खत्म हो जाएगी।  आगे पढ़ें

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दिग्गी के बयान पर विहिप अध्यक्ष ने कहा- उनके पास कोई जानकारी है तो सीबीआई को करनी चाहिए पूछताछ

सिंह ने रविवार को ट्वीट किया, ''भाजपा-आरएसएस हेडगेवार, गोवलकर या सावरकर जयंती को इतनी धूमधाम से क्यों नहीं मना रहे हैं? वे अपनी विचारधारा को क्यों छिपा रहे हैं, उन्होंने आरएसएस के जन्म के बाद स्वतंत्रता आंदोलन में क्या भूमिका निभाई थी? आप गोडसे को स्वतंत्रता सेनानी घोषित क्यों नहीं करते? भक्तों के लिए हिम्मत दिखाओ, जिन्हें आप सोशल मीडिया पर फॉलो कर रहे हैं।''  आगे पढ़ें

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मंत्री से माफी की मांग को लेकर अड़े गुस्साए पटवारी गए हड़ताल पर, तहसील में जमा किया बस्ता

दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी से मांफी मांगने की मांग को लेकर पटवारी गुरुवार से अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने भोपाल तहसील कार्यालय में अपना बस्ता जमा करा दिया है। पटवारियों की हड़ताल पर जाने से राजस्व से संबंधित सभी काम ठप हुए। पटवारियों का कहना है कि मंत्री को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए।  आगे पढ़ें

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गांधी जयंती पर दिग्गी ने कहा- जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की वह निकाल रहे हैं पदयात्रा

आनंद मोहन माथुर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों की यह आदत है कि वे किसी से बहस नहीं करते...लेकिन बहस करना चाहिए अपनी बात रखनी चाहिए। हमें पता है कि सामने वाला चर्चा के दौरान हमें गाली देंगे क्योंकि उनके पास तर्क नहीं है। लेकिन हमें अपनी बात रखनी चाहिए, विरोध सहने की क्षमता होनी चाहिए।  आगे पढ़ें

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एक पाती कमलनाथ के नाम

मुख्यमंत्री जी, वल्लभ भवन में हनी-मनी के शौकिन नौकरशाहों की बुद्धि से परे हट कर एक राजनेता के दिमाग को जागृत करिए। विरुदावली वाले मंत्रियों, विधायकों तथा पार्टीजनों के रचित यशोगान से कान दूर कीजिए। आप पाएंगे कि इस सब मिथ्या तारीफों से सर्वथा परे आप हंसी का पात्र बनकर रह गये हैं। आप बतौर मुख्यमंत्री आईसीयू में भर्ती उस मरीज की तरह दिखने लगे हैं, जिसके लिए डॉक्टर कहता है कि इन्हें अब दवा नहीं, बल्कि दुआ की जरूरत है। इस सबके बावजूद यदि आपका रुख ऐसा ही रहना है तो फिर ऊपर बतायी गयी काजल की डिब्बी से नजर का टीका उन तमाम महानुभावों को लगवा दें, जिन्हें हनी ट्रैप कांड में बचाने की कोशिश आपको औजार बनाकर की जा रही है।  आगे पढ़ें

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