होम ज्योतिरादित्य सिंधिया
regarding-jyotiraditya-bjp-state-president-said-he

ज्योतिरादित्य को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- वह एक राष्ट्रवादी नेता हैं और भाजपा की संस्थापक विजयराजे सिंधिया के वंशज है, देशहित में उन्होंने सीएए का भी समर्थन किया था

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक राष्ट्रवादी नेता बताया। कहा- उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए सिंधिया ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का देशहित में समर्थन किया था। उन्होंने ये बात यहां पत्रकारों से चर्चा में कही। उन्होंने कहा कि सिंधिया राष्ट्रवादी नेता और भाजपा की संस्थापक सदस्य राजमाता विजय राजे सिंधिया के वंशज हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व क्षमता पर सभी ने भरोसा व्यक्त किया। थाली से लेकर ताली बजाकर उनका समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने जनधन योजना के जरिए लोगों के खातों में पैसे पहुंचाए।  आगे पढ़ें

ab-ye-chup-rahane-ka-samay-nahin-hai

अब ये चुप रहने का समय नहीं है

अपनी पिछली पार्टी की पंद्रह महीने की सरकार में ये मंत्री और विधायक थे ही। तो फिर मार्च से लेकर मई के बीच के दो महीनों में ऐसा क्या हो गया कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए इतनी बड़ी रकम की जरूरत आ गई? क्या यह मान लें कि कमलनाथ सरकार ने इनके क्षेत्र में कोई भी काम नहीं करवाए। आरोप तो ऐसे ही लगा कर इन लोगों ने दलबदल किया था। या यह समझ लिया जाए कि पंद्रह महीने तक इन महानुभावों ने ही अपने-अपने इलाके में जनोपयोगी काम करने में कोई रूचि ही नहीं ली? वरना इतनी भारी-भरकम रकम की दरकार का कोई खास औचित्य ही समझ नहीं आता है।  आगे पढ़ें

minister-tulsi-silavat-retaliated-saying-premchand

मंत्री तुलसी सिलावट ने किया पलटवार, कहा- प्रेमचंद गुड्डू की सिंधिया के खिलाफ बोलने की नहीं है हैसियत, उनकी भाषा स्तरहीन है

मध्य प्रदेश सरकार में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू पर तीखा पलटवार किया। सिलावट ने कहा- मैं कभी मयार्दा नहीं तोड़ता। मगर गुड्डू को जिस भाषा में बात करना है, कर लें। उन्हें उन्हीं के भाषा में जवाब देना मुझे आता है। गुड्डू का इतिहास क्या है, सबको पता है। हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बोलने की गुड्डू की हैसियत नहीं है। गुड्डू की भाषा और राजनीति का तरीका कितना स्तरहीन है, यह सबको पता है।  आगे पढ़ें

gussa-ajay-singh-ka

गुस्सा अजय सिंह का...

राकेश सिंह की वापसी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही शिवपुरी में कराई थी। अब भला अजय सिंह 11 जुलाई 2013 को कैसे भूला सकते हैं। उस दिन शिवराज सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रहते हुए चौधरी राकेश सिंह ने सदन में ही अचानक पाला बदल लिया था। वे उसी दिन कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी राकेश सिंह को चुनाव लड़ाने की बजाय उनके भाई मुकेश चतुर्वेदी को मेहगांव से मैदान में उतारा था। मुकेश ने यहां से चुनाव जीत लिया था लेकिन राकेश सिंह को भाजपा ने पिछले पांच सालों में कहीं एडजस्ट नहीं किया। 2018 में मुकेश का टिकट काट कर भिंड से राकेश सिंह को जरूर चुनाव लड़वाया गया। read more  आगे पढ़ें

lakshaman-singh-se-puchhie-yah-saval

लक्षमण सिंह से पूछिए यह सवाल.....

लक्ष्मण नामक अनुज को अपने भ्राताश्री यानी दिग्विजय सिंह की चिंता सता रही है। अंदाज खालिस, तुम न जाने किस जहां में खो गए वाला है। दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट कर श्रमिक वर्ग की आड़ में भाजपा पर निशाना साधा। कांवड़ में अपनी बच्चियों को लेकर तेलंगाना से छत्तीसगढ़ पैदल जा रहे मजदूर की तस्वीर साझा की। साथ में लाड़ली लक्ष्मी वाला नारा भी चस्पा कर दिया। इस पर अनुज ने प्रतिक्रिया दी। इस चिंतन के लिए भाई को सराहा और यह भी उलाहना जड़ दिया कि बड़े भैया राजनीति की चकाचौंध में न जाने कहां गुम हो गए थे। वेलकम बैक वाली इस पोस्ट की वह लाइन खासी गौरतलब है, जिसमें लक्ष्मण ने भाई के लिए लिखा है, लौट आइये, नहीं तो दुष्ट आपको निचोड़ते जाएंगे। यानी इस ट्वीट के मुताबिक जयेष्ठ भ्राता सियासी जंगल से घर वापसी का अभी आधा रास्ता ही तय कर सके हैं। read more  आगे पढ़ें

the-question-of-maharaj-shivraj-alliances-litmus-t

महाराज-शिवराज गठबंधन की अग्निपरीक्षा का सवाल स्क्रीन पर

कांग्रेस के कुछ मतदाता भी सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र वाली सीट पर उनके इस कदम का साथ देंगे। तो कुछ उनके विरोध में खड़े दिखाई देंगे। साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी समर्थन-विरोध के खेमे में बंट जाएंगे और इन 22 सीटों पर परिणाम मिश्रित दिखाई देगा। ऐसे में निर्दलीय विधायकों को साथ मिलाकर और उपचुनाव में विजयी सीटें विजय तिलक लगाकर आधे मन से शिवराज-महाराज गठबंधन पर मुहर लगा देंगे।  आगे पढ़ें

kya-dabav-kee-rajaniti-shuru-ahe

क्या दबाव की राजनीति शुरू आहे......

शिवराज के पहले मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थकों को जिस तरह शाकाहारी विभाग दिए गए हैं, वह इसी ओर संकेत कर रहा है। इस बात की पूरी संभावना है कि जल्दी ही होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य समर्थक नए बने भाजपाईयों को यथोचित सम्मान प्रदान कर दिया जाए। तो विस्तार की सच के नजदीक दिखती अटकलों के बीच यकायक सिंधिया के लिए केंद्र में मंत्री पद वाली बात कहां से उठ खड़ी हुई है? क्या ग्वालियर राजघराने के इस प्रमुख चेहरे ने दबाव की राजनीती का सहारा लेने का प्रयास किया है? इस समय इस बात के लिए प्रेशर बनाना सही होगा कि राज्य के उप मुख्यमंत्री का पद इसी खेमे से किसी को दिया जाए।  आगे पढ़ें

rajaji-tumase-dil-lagane-ki-saja-hai

राजाजी तुमसे दिल लगाने की सजा है......

राजनीतिक सहोदर के लिए इस उदारता को दिखाना खालिस फिल्मी मामला है। मुगले-आजम जैसा। फिल्म में अकबर द्वारा मौत की सजा सुनाये जाने पर अनारकली कहती है, शहंशाह की इन बेहिसाब बख्शीशों के बदले ये कनीज अकबर-ए -आजम को अपना खून माफ करती है। विशुद्ध इसी नाटकीय अंदाज में कमलनाथ ने अपनी सरकार की हत्या के जुर्म से सिंह को माफ कर दिया है, लेकिन बड़ी तरकीब से। ऐसा करने से पहले वे दिग्विजय की करतूतों के प्रति अपनी पीड़ा का इजहार कर गए। उन्होंने यह जता दिया कि महज पंद्रह महीने ही चल सकी सरकार के औंधे मुंह गिरने की मूल वजह उनका दिग्विजय पर आंख मूंद कर भरोसा करना रहा।  आगे पढ़ें

girehaban-mein-jhankane-ka-samay

गिरेहबान में झांकने का समय

क्या नैतिक शिक्षा के लिहाज से भी यह तय कर दिया गया है कि यदि यह शोक का समय है तो ऐसे में और किसी भी विषय पर बात की ही नहीं जा सकती है? ऐसा है तो फिर उन सारे लोगों की भी निंदा होनी चाहिए, जो इसी दौर में घर में आराम फरमाते, मस्ती करते या फिर परिवार के साथ क्वालिटी टाइम गुजारने के छाया चित्र सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। सलूजा को चाहिए कि वे पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा के खिलाफ भी बयान जारी करें। प्रियंका ने भी कोरोना से मचे चीत्कार के बीच उत्तरप्रदेश में दो साधुओं की ह्त्या को लेकर उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने का प्रयास किया है। सलूजा को अपने इस ट्वीट् का रुख कांग्रेस के ही उन नेताओं की और मोड़ देना चाहिए, जो महाराष्ट्र के हालात को लेकर बेचैनी का इजहार कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

shivraj-towards-congregation-in-communion-with-mah

महाराज के साथ तालमेल में कांग्रेसीकरण की ओर शिवराज!

चौहान के पांच मंत्रियों में से दो महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास समर्थक हैं। इन दो को जगह दिलाने के लिए मंत्रिमंडल का गठन तीन दिन तक टालना पड़ा था। बीजेपी के फार्मूले के तहत कोरोनाकाल में पहले जो छोटा एवं प्रभावी मंत्रिमंडल बनना था। उसमें चार वे बीजेपी नेता शामिल होने थे, जो पन्द्रह साल चली सरकार में प्रभावी भूमिका में रहे हैं और सिंधिया कोटे से एक नेता को मंत्री बनाया जाना था। ये हो न सका, क्योंकि महाराज अपने कोटे के सभी छह पूर्व मंत्रियों को मंत्री के तौर पर उपचुनाव में उतारना चाहते थे। कमलनाथ सरकार गिराने के समय वादा भी यही किया गया था। सिंधिया ने इसके लिए दिल्ली दरबार खटखटाया। पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से बात की। लॉक डाउन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मर्यादा और कोरोना महामारी से निपटने की चुनौती को देखते हुए बीजेपी अभी 5 से ज्यादा मंत्री बनाने राजी नहीं थी। अंततः समझौता 3-2 के फार्मूले पर हुआ और सिंधिया कोटे से तुलसी सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत के नाम आए।  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10  ... Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति