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सुकमा में मुठभेड़ के दौरान जब पुलिसकर्मी भाई और नक्सली बहन हुए आमने-सामने

जानकारी के मुताबिक, पूर्व में नक्सली संगठनों के साथी रहे वेट्टी रामा ने बीते साल छत्तीसगढ़ पुलिस का हाथ थाम लिया था। रामा काफी वक्त से पुलिस और सीआरपीएफ के साथ नक्सल विरोधी अभियानों में काम कर रहे थे। इसी बीच 29 जुलाई को रामा की टीम को सुकमा के एक इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। इस सूचना के बाद शुरू हुए एक तलाशी अभियान के दौरान ही वेट्टी रामा की मुलाकात अपनी बहन वेट्टी कन्नी से हुई जो कि इस इलाके में नक्सलियों के साथ रह रही थी।  आगे पढ़ें

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पूर्व राज्यसभा सदस्य अनुसुइया उइके बनी छग की राज्यपाल, सीएम बघेल ने दी बधाई

छत्तीसगढ़ की राज्यपाल बनाई गईं उइके का जन्म छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला में 10 अप्रैल 1957 को हुआ था। अर्थशास्त्र में एमए के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1982 से 85 तक छिदंवाड़ा के तामिया कॉलेज में व्याख्यता रहीं। 1985 में ही भाजपा ने दमुआ विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। उइके 1990 तक विधायक रहीं। इस दौरान 1988 से 1989 तक महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रहीं। 1998 से 99 तक भूमि विकास बैंक छिंदवाड़ा की प्रभारी अध्यक्ष रहीं। जनवरी 2006 से मार्च 2006 तक एमपी अनुसूचित जनजाति आयोग की अध्यक्ष रहीं। 2000 से 2003 और 2003 से 2005 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। 2006 से 2012 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं।  आगे पढ़ें

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सुकमा में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ नक्सली, कई गोली लगने से हुए घायल

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में एक वदीर्धारी नक्सली मारा गया है, जिसका शव पुलिस ने बरामद कर लिया है। उसके शव के पास से पुलिस को एक इंसास रायफल व अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा कई अन्य बड़े नक्सलियों के भी फायरिंग में घायल होने की सूचना है।  आगे पढ़ें

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ताई की राजनीति का हो सकता है पुनर्वास, बन सकती है छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र की राज्यपाल

ताई के महाराष्ट्र या छत्तीसगढ़ की राज्यपाल बनने की संभावना सबसे ज्यादा है। इसका कारण यह है कि महाराष्ट्रीयन होने से उनका दखल महाराष्ट्र की राजनीति में रहा है। लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद उनकी सक्रियता भी महाराष्ट्र में रही है। ताई का जन्म स्थान भी महाराष्ट्र है। उधर, मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक राज्यपाल का पद अगस्त 2018 से खाली है। फिलहाल प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अतिरिक्त प्रभार के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मध्यप्रदेश से जुड़ाव बने रहने और नजदीक होने से भी उन्हेंछत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बतौर लोकसभा अध्यक्ष ताई के पास संसदीय कार्य का अनुभव तो है ही, वे संगठन और सरकार के कामकाज को लेकर भी बेहद स्पष्ट रहती हैं। नियमों का पालन भी सख्ती से करवाती हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार जून अंत तक इस पर फैसला हो सकता है।  आगे पढ़ें

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पेंशनर्स की महंगाई राहत बढ़ाने छत्तीसगढ़ की सहमति अनिवार्यता को खत्म करेगी प्रदेश सरकार

पेंशनर्स का वेतनमान लागू करने या डीआर बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ की सहमति लेने में समय लगता है। इसके कारण कभी भी पेंशनर्स का डीआर समय पर घोषित नहीं हो पाता। चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशनर्स का डीआर बढ़ा दिया पर मध्य प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण मामला उलझ गया। इसके पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है। इसके मद्देनजर पेंशनर्स एसोसिएशन ने सरकार को सुझाव दिया था कि छत्तीसगढ़ की सहमति लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया जाए। वैसे भी मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 में प्रावधान खर्च को लेकर है। दरअसल, वर्ष 2000 के पहले जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनका डीआर बढ़ाने में आने वाले खर्च का 74 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश को उठाना पड़ता है।  आगे पढ़ें

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छत्तीसगढ़: रमन सिंह ने कहा- जहां-जहां भूपेश बघेल के कदम पड़े, वहां कांग्रेस को मिली करारी हार

डॉ रमन ने कहा कि भूपेश की महत्वाकांक्षा यहां तक ही नहीं र्स्की, वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा में प्रचार करने गए, वहां भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी हार दुर्ग से हुई जो उनका गढ़ है। भूपेश बघेल के अपने बूथ और विधानसभा में कांग्रेस चुनाव हार गई। विधानसभा में 68 सीट पर जितने के बाद लोकसभा चुनाव में 66 विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिली।  आगे पढ़ें

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छत्तीसगढ: दो दशक बाद कांग्रेस की एक से बढ़कर हुई दो सीट

खास बात यह थी कि हर बार कांग्रेस को अलग-अलग सीट पर जीत मिलती रही। छत्तीसगढ़ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पिछले 20 साल में जांजगीर-चांपा, महासमुंद, कोरबा और दुर्ग सीट पर ही जीत पाई थी। इस चुनाव में बस्तर में खाता खुला है। वर्ष 1999 में जांजगीर-चांपा से वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने जीत दर्ज की थी। इसी समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला महासमुंद लोकसभा सीट से जीते थे। इसके बाद 2004 में महासमुंद से अजीत जोगी, 2009 में कोरबा से डॉ चरणदास महंत और 2014 में दुर्ग से ताम्रध्वज साहू ने जीत दर्ज की थी।  आगे पढ़ें

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लोकसभा चुनाव: रुझानों में भाजपा गुजरात-राजस्थान की सभी सीटों पर आगे, शत्रुघ्न और कन्हैया पीछे

लोकसभा सीटों के लिहाज से एनडीए के गढ़ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, बिहार और महाराष्ट्र के नतीजों पर आज नजर रहेगी। रुझानों में राजस्थान, गुजरात की सभी सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में भी भाजपा को बढ़त है। छत्तीसगढ़ में भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर है। मध्यप्रदेश के गुना में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया पीछे चल रहे हैं। गांधीनगर से अमित शाह और पाटलिपुत्र से लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती आगे चल रही हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 6 राज्यों की कुल 179 में से 133 सीटें (74.3%) अपने नाम की थीं।  आगे पढ़ें

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नक्सलियों की करतूत जारी, सड़क निर्माण में लगे वाहनों को किया आग के हवाले

कांकेर जिले के आलपरसर जंगल में मुठभेड़ के दौरान एक महिला नक्सली घायल हो गई। जिसे सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया। उसकी पहचान फूलोबाई उर्फ महरी नेताम (28) के रूप में की गई। वह नारायणपुर के ब्रेहेटोला की रहने वाली है और नकसलियों के सेक्शन बी की डिप्टी कमांडर बताई जा रही है। उस पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस ने मुठभेड़ वाली जगह से तीन बंडल बिजली वायर, एक इंसास मैग्जीन, 20 इंसास के जिंदा कारतूस, दो इंसास के खाली खोखे, दो एके-47 का खाली खोखा, तीन टार्च व नक्सली साहित्य बरामद किए हैं। यह मुठभेड़ जिला पुलिस बल व एसटीएफ ने बीएसएफ के साथ सर्चिंग अभियान के दौरान हुई।  आगे पढ़ें

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5 महीने में ही बदली तीन राज्यों की स्थितियां, लोकसभा चुनाव में लग सकता है कांग्रेस को झटका

इसके कई कारण माने जा रहे हैं। एक वजह विधानसभा और लोकसभा चुनावों का अलग-अलग मुद्दों और आधार पर लड़ा जाना है। दूसरी दलील यह भी दी जा रही है कि छत्तीसगढ़ को छोड़ दिया जाए तो बाकी दोनों जगह कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर रही थी। ऐसे में इतनी जल्दी बीजेपी के खारिज होने का सवाल ही नहीं उठता। राजनीतिक पंडित यह भी मान रहे हैं कि कांग्रेस को राज्यों में आए हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। ऐसे में राज्य वाले प्रदर्शन की उम्मीद रखना कुछ ज्यादती होगी।  आगे पढ़ें

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