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प्रदेश में भाजपा का संकट

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जिस तरह के परिणाम आए हैं, उसमें यह भी संभव नहीं है कि शिवराज दिल्ली में कोई बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। केंद्र में सरकार का काम गति पकड़ चुका है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा। इसके बाद जो होगा, उसकी एक तयशुदा प्रक्रिया यह हो सकती है कि शिवराज को दिल्ली तक सीमित कर दिया जाए। इससे विजयवर्गीय या फिर जिसे भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगे बढ़ाना चाहे उसे अपने भावी कदम तय करने में सुविधा हो। इसके अलावा अब राकेश सिंह और सुहास भगत के लिए भी शिवराज की छाया से मुक्त होकर खुलकर काम करने का अवसर प्रकट हो जाना तय है। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में अपनी मार्कशीट में फर्स्ट डिवीजन पास हैं तो उनका भी कोई तो प्रतिफल तय होना ही है। हालांकि हो सकता है कि वे 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तक वहां के दायित्व को संभालते रहें। शिवराज की अगली भूमिका क्या तय की जाएगी? पहले से भी अधिक ताकत से केंद्र में सरकार बना चुकी भाजपा के संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं रहेगा। लेकिन बहुत कुछ करने का सुअवसर विजयवर्गीय के पास है। अब वह शोले के कटे हाथ वाले ठाकुर नहीं हैं। बल्कि उस शक्तिशाली पुरुष की तरह दिखने लगे हैं, जिसके पास खुद के सहित मोदी और शाह जैसे हाथ भी हैं।  आगे पढ़ें

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भार्गव के पत्र का सीएम ने दिया जवाब, कहा- हमारी सरकार ने 73 दिन में पूरे किए 85 वचन

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि हमारी सरकार ने 73 दिन के दौरान आपकी सरकार द्वारा छोड़े गए खाली खजाने के बावजूद सबसे महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 21 लाख से अधिक किसानों के फसल ऋण माफ किए हैं। गेहूं और चने के उपार्जन व भुगतान के संबंध में आपके द्वारा भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। सरकार ने 11.06 लाख किसानों से 68 लाख टन से ज्यादा गेहूं, चना, मसूर व सरसों का उपार्जन किया है। किसानों के खातों में सात दिन के भीतर भुगतान की राशि भी पहुंच रही है। नाथ के तीन पेज के पत्र में संबल और अन्य योजनाओं के बारे में बताया गया है कि उनका निरंतर लाभ लोगों को मिल रहा है। एक अप्रैल 2018 से 30 दिसंबर 2018 तक 31 हजार 991 प्रकरणों में 349.68 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। वहीं एक जनवरी 2019 से 30 अप्रैल 2019 तक 46 हजार 509 प्रकरणों में 463.06 करोड़ रुपए की राशि दी जा चुकी है।  आगे पढ़ें

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गरमाई प्रदेश की सियासत, नेता प्रतिपक्ष ने विस का विशेष सत्र बुलाने की मांग, सीएम ने कहा हमें कोई दिक्कत नहीं

सोमवार को भार्गव ने पत्र भेजकर राज्यपाल से आग्रह किया कि वे विशेषाधिकार का उपयोग कर शीघ्र ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के निर्देश मुख्यमंत्री कमलनाथ को दें। उन्होंने पत्र में कहा कि नई सरकार का गठन हुए छह माह बीत चुके हैं। इस दौरान कई जनहित की समस्याओं और मुद्दों से जनता जूझ रही है। इन मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होना जरूरी है। सरकार ने गठन के बाद मात्र दो दिन का सत्र 18 फरवरी को बुलाया था, जिसमें लोकहित के मुद्दों पर बहस नहीं हो पाई थी।  आगे पढ़ें

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कश्मीर मां भारती का मुकुट है कोई छीन नहीं सकता: अमित शाह

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने देश में पांच साल में जितना विकास किया है उतना कांग्रेस की 55 साल की सरकारों ने नहीं किया। गरीबों के उत्थान के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। आज देश का गरीब अपने आपको खुशहाल महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे गरीबों को पक्के मकान दिए जाने की बात हो या धुआं से महिलाओं को बचाने की बात हो। हर तरफ तरक्की के नए आयाम गढ़े गए हैं।  आगे पढ़ें

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दमोह में बोले शिवराज, कहा- कांग्रेस जिस ई-टेंडर घोटाले की बात करती है उसकी जांच होनी चाहिए, सच आएगा सामने

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि वह भी चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार जिस ई-टेंडर घोटाले की बात कर रही है, उसकी जांच होना चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। शिवराज सिंह ने कहा कि पूरी तरह निष्पक्ष जांच होना चाहिए। वहीं भार्गव ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। जब उनकी सरकार थी, तब ये गड़बड़ी सामने आई थी। जो आरोपित थे, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्होंने नोटशीट चलाई थी, अब वह मंत्रालय में कहां हैं, ये तो वर्तमान सरकार ही बता सकती है।  आगे पढ़ें

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क्या यह वही भाजपा है...!

गोपाल भार्गव, शिवराज सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, गौरीशंकर शेजवार, गौरीशंकर बिसेन के तो किस्से आम हो ही गए हैं। अब एक किस्सा मंदसौर में वर्तमान सांसद सुधीर गुप्ता के विरोध का। सुधीर का जबरदस्त विरोध हैं। इस विरोध के कई कारण हैं। सांसद के विरोध में विधायक भी खुलकर सामने आए। तो विधायक राजेन्द्र पांडे, (यह मंदसौर से आठ बार सांसद और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रहे स्वर्गीय डा. लक्ष्मीनारायण पांडे के सुपुत्र हैं।) सुधीर गुप्ता का विरोध करने दिल्ली गए तो अपने भाई सुरेन्द्र पांडेय के लिए टिकट मांग बैठे। दूसरे विधायक ओमप्रकाश सकलेचा हैं, (ये पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरेन्द्र कुमार सखलेचा के सुपुत्र हैं,) ये भी सुधीर गुप्ता का विरोध करने गए तो अपने भाई विजय सकलेचा के लिए टिकट मांग लिया। अंदाज लगाया जा सकता है कि भाजपा में परिवारवाद की बीमारी किस कदर गहरी पैठ रही है। ये तो अच्छा है कि अमित शाह और नरेन्द्र मोदी उम्र और परिवारवाद पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। लेकिन आश्चर्य तो इस बात पर होना ही चाहिए कि कैसे एक कैडर बैस पार्टी में हर आम और खास कार्यकर्ता परिवार को तवज्जो देने लगा है। जाहिर है सत्ता के संस्कारों ने भाजपा को कांग्रेस की राह पर धकेल दिया है। और आरएसएस का नियंत्रण भाजपा पर ढीला पड़ रहा है।  आगे पढ़ें

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भाजपा के दिग्गज नेता गोपाल भार्गव के बेटे ने वापस ली टिकट की दावेदारी, बताई ये वजह

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीस मार्च को वंशवाद को लेकर एक ब्लॉग लिखा था। जिसमें उन्होंने राजनीति में वंशवाद पर निशाना साधा था। सवाल कांग्रेस में स्थापित वंशवाद को लेकर था। इस ब्लॉग में उन्होंने यूपीए सरकार को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए लिखा कि, विपक्षी पार्टी संसद, न्यायपालिका, मीडिया और सशस्त्र बलों सहित संस्थाओं का अपमान करने में विश्वास रखती है, जबकि ठऊअ सरकार के लिए देश की संस्थाएं सबसे ऊपर है।  आगे पढ़ें

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वंशवाद की दीमक की चपेट में भाजपा

गनीमत यह है कि भाजपा में कम से कम ऐसा तो फिर भी नहीं होगा कि इन लोगों के मांगे गए टिकट पार्टी दे ही देगी। लेकिन ताज्जुब यह है कि संघ के ऐसे संस्कारी स्वयंसेवक सत्ता का सुख भोगने के बाद आखिर अपनी पार्टी और संघ के संस्कारों को कैसे भूला बैठे? ऐसे कई नाम हैं, जो बता रहे हैं कि किसी समय वंशवाद के लिए कांगे्रस को सोते-जागते कोसने वाली इस पार्टी ने कैसे इसी मामले में परम्पराएं ताक पर रखने के क्रम को बढ़ाना जारी रखा है। भाजपा में नेताओं के परिवार में कई लोग आगे आए हैं लेकिन यह तब ही संभव हुआ है जब उन्होंने लंबा राजनीतिक सफर पार्टी के भीतर तय किया है। दीपक जोशी, विश्वास सारंग, राजेन्द्र पांडे इसके उदाहरण कहे जा सकते हैं तो सुरेन्द्र पटवा को अपवाद की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि बाद में भाजपा के निर्णयों में कई बार यह साफ परिलक्षित हुआ है कि इस पार्टी ने वंशवाद को एक तरह से स्वीकार कर लिया है। किसी विधायक या सांसद की मृत्यु हुई तो टिकट परिवार में ही किसी को देने की परम्परा अब भाजपा में आम हो गई है। ऐेसे ढेर सारे उदाहरण भाजपा में है। इस ने परिवार में टिकट मांगने वाले नेताओं को प्रोत्साहित तो किया ही है। read more  आगे पढ़ें

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दिग्गी को चुनाती पेश करेंगे सपाक्स के हीरालाल त्रिवेदी, बैठक में फैसला

माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह भोपाल या इंदौर से चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में सपाक्स के अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी उनकी सफलता में रोड़ा बनने की कोशिश करेंगे। दरअसल, ऐसा कर पार्टी अपने गुस्से का इजहार करना चाहती है, क्योंकि दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में ही मध्य प्रदेश में आरक्षण विधेयक पारित किया गया था और उसके बाद ही सामान्य, पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरक्की के रास्ते बंद हो गए। इसे देखते हुए समन्वय समिति ने इस चुनाव में दिग्विजय सिंह के खिलाफ पूरी ताकत झोंकने का इरादा कर लिया है।  आगे पढ़ें

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तबादलों पर नेता प्रतिपक्ष की शिकायत के बाद सरकार की सफाई, कहा- नहीं हुए बैकडेट में स्थानांतरण

तबादलों को लेकर भाजपा और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की शिकायत का सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को जवाब दे दिया। इसमें साफ कहा गया कि बैकडेट में कोई तबादले नहीं किए गए। स्थानांतरण नीति का पूरा पालन किया गया है। सिर्फ नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा को नदी न्यास का अध्यक्ष बनाए जाने के आदेश में लिपिकीय त्रुटि से आदेश में तारीख गलत हो गई थी, जिसे संशोधित भी कर दिया गया था।  आगे पढ़ें

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