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कमलनाथ का डर

1984 के सिख विरोधी दंगे कांग्रेस पर एक ऐसा दाग है जिससे उसका उबरना हमेशा मुश्किल होगा। इसके कारण हैं। जब यह दंगे फैले तब सेना की तैनाती में देर की गई। दिल्ली में तो पुलिस ने दखल देने से इंकार किया। संजय सूरी की किताब, 1984 दि एंटी-सिख वायलेंस एंड आफ्टर, में जिन कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें कमलनाथ भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस किताब में कमलनाथ की उन दिनों की संदिग्ध भूमिका पर विस्तार से बात की गई है। इस किताब में दावा किया गया है कि दंगाई साफ तौर पर किसी के इशारों पर काम कर रहे थे और संगठित थे। जाहिर है, कमलनाथ भले ही संजय गांधी के खास दोस्त रहे हों और इंदिरा गांधी के तीसरे पुत्र भी कहलाते रहे हों लेकिन कांग्रेस में राकेट की तरह ऊपर उठे वे राजीव गांधी के शासनकाल में ही। कांग्रेस की सरकारों के दौरान जिस तरह जगदीश टायटलर, एचकेएल भगत, सज्जन कुमार को बचाने की कोशिश की गई, उसे पूरे देश ने ही देखा है। कांग्रेस इन नेताओं को चुनाव में उतारती रही और वे महत्वपूर्ण पदों पर भी काबिज रहे।  आगे पढ़ें

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