होम कैलाश जोशी
haarashtr-aur-kailash-joshi

महाराष्ट्र और कैलाश जोशी....

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के निधन में भला क्या साम्य हो सकता है? यूं तो कुछ भी नहीं, लेकिन मेरी निगाह में एक साम्य है। जोशी जी का निधन ठीक उस समय हुआ है, जब राजनीति में भी नैतिकता का निधन हो रहा है। कैलाश जोशी को संत राजनेता का संबोधन उनके उच्च नैतिक मानदंडों के कारण ही दिया जाता है। अब राजनीति में शायद ऐसे राजनेताओं का युग कभी लौटकर नहीं आएगा। शायद कैलाश जोशी जैसे नेता का भी दुबारा जन्म लेना मुश्किल हैं। मेरे लिए यह नितांत व्यक्तिगत अंतर्द्वंद्व का समय है। खुद को खुद से जूझता देख रहा हूं। दिमाग बता रहा है कि कैलाश जोशीजी नही रहे। दिल कहता है कि यह भ्रम है। महाराष्ट्र कह रहा है कि बस अब सच यही है।  आगे पढ़ें

shant-panjadhari-kamalanaathshant

शांत पंजाधारी कमलनाथ...शांत

हनी ट्रैप मामले पर कुंभकर्णी नींद से जागकर मुख्यमंत्री ने जिस स्वरूप का परिचय दिया है, उस पर प्रतिक्रिया के लिए न तो पर्याप्त शब्द मिल पा रहे हैं और न ही सही मनोभाव। छिंदवाड़ा, दिल्ली दरबार के बाद अब भोपाल स्थित मंत्रालय नाथ की राजनीतिक परिक्रमा का तीसरा पड़ाव बन चुका है। यहां अपने चैंबर में बैठे-बैठे नाथ पूरे प्रदेश की स्थिति पर तीखी नजर होने का भ्रम जीवित रखे हुए हैं। ठीक वैसे ही, जैसे राग दरबारी उपन्यास में शिवपालगंज की निकम्मी पुलिस को लेकर गलतफहमी थी। पूरी तरह साधन तथा क्षमता-विहीन उस पुलिस से आशा की जाती थी कि आसपास के ढाई से तीन सौ गांवों की हर हलचल पर उसकी नजर है। उसकी क्षमता इतनी कि अपराध होने के बाद तो दूर, वह ऐसा होने से पहले ही घटना स्थल तक पहुंच जाएगी।  आगे पढ़ें

Previous 1 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति