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सिंधिया की चुप्पी...

सिंधिया सयाने हैं। सयानों की खासियत में अतीत से सबक लेना शामिल है। लेकिन यहां भी ज्योतिरादित्य के लिए भ्रम की स्थिति है। भूतकाल में उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया आज वाले हालात की तर्ज पर ही राज्य में कांग्रेस का तख्ता पलट कर गुजरी थीं। ज्योतिरादित्य संविद सरकार वाले उस अध्याय की पुनरावृत्ति करने का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन यह सफलता कितनी लंबी चलती है यह सिंधिया और भाजपा के अलावा संघ परिवार भी निर्भर करेगा। सिंधिया निश्चित तौर पर चौधरी राकेश सिंह या फिर प्रेमनारायण ठाकुर नहीं हैं। रही बात नया दल बनाने की, तो उनके सामने अपने पिता की मध्यप्रदेश विकास कांग्रेस की विफलता का दृष्टांत मौजूद है। खतरा यह भी है कि विधायकों को बगावत के लिए तैयार करने की सूरत में महल के कई समर्थकों की विधानसभा की सदस्यता खत्म होगी ही और इन्हें फिर से निर्वाचित करने की जवाबदारी भी सिंधिया पर ही होगी। इसलिए इस मसले पर फिलहाल तेल की धार देखने जैसी स्थिति है। readmore  आगे पढ़ें

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दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद हुड्डा की परिवर्तन महारैली लेंगी सोनिया की परीक्षा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से रैली का आयोजन किया जाना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है, जैसे क्या यह उनकी तरफ से अक्टूबर में होनेवाले विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस को तोड़कर एक क्षेत्रीय दल बनाने का पूर्व संकेत है या महज चुनाव से पहले सौदेबाजी का महौल बनाने की कवायद है। अभी कांग्रेस में जिस कदर भगदड़ मची है और कई राज्यों की पार्टी यूनिट में उथल पुथल मच रही है, उसको देखते हुए पार्टी सर्किल में सबकी नजर इस पर होगी कि सोनिया गांधी और उनकी टीम हुड्डा की तरफ से पेश की जा रही चुनौती को किस तरह लेती है, क्योंकि इससे यह भी पता चलेगा कि वह अपनी दूसरी पारी में सौदेबाजी करनेवालों के साथ किस तरह निपटती हैं- क्या वह उन्हें जाने देंगी या उनकी बात मानेंगी।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर नेताओं के बीच बैठक जारी, ज्यादातर कांग्रेसी राहुल को ही पद पर बनाए रखना चाहते हैं

सोनिया-राहुल गांधी भी सीडब्ल्यूसी की बैठक के दौरान पार्टी दफ्तर पहुंचे, लेकिन थोड़ी देर बाद चले गए। जबकि प्रियंका गांधी पूरे समय मौजूद रहीं। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा, ''मैं और राहुल अध्यक्ष पद के लिए हो रहे विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। सीडब्ल्यूसी के सदस्य देशभर से आए नेताओं से चर्चा करेंगे।'' इससे पहले शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जल्द ही पार्टी अध्यक्ष का चुनाव कर लिया जाएगा। अध्यक्ष पद की दौड़ में मल्लिकार्जुन खड़गे और मुकुल वासनिक सबसे आगे चल रहे हैं।  आगे पढ़ें

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थरूर के बाद कैप्टन ने प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने का किया समर्थन, कहा- मिलेगा पूरा सहयोग

प्रियंका गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ में कहा कि अगर प्रियंका गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए हां करती हैं, तो उन्हें हमारा पूर्ण सहयोग मिलेगा। राहुल गांधी को इस पर विचार करना चाहिए। अमरिंदर के अनुसार- प्रियंका गांधी इस पद के लिए बेहतर हैं। वे पार्टी की पसंद हैं। सबकुछ कांग्रेस कार्य समिति पर निर्भर करता है। समिति ही इस पर फैसला लेगी। उन्होंने कहा- भारत युवाओं का देश है। किसी युवा नेता को ही पार्टी की कमान संभालनी चाहिए।  आगे पढ़ें

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राहुल के फैसले का प्रियंका ने किया बचाव, कहा- ऐसा साहस बहुम कम लोगों में होता है

कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा देने के एक दिन बाद पार्टी की महासचिव और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाई के फैसले का बचाव किया है। प्रियंका ने राहुल के फैसले को साहसिक बताया है। प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, 'राहुल गांधी जैसा करने का साहस बहुत कम लोगों के पास होता है। मैं आपके फैसले का आदर करती हूं।' बता दें कि राहुल गांधी ने बुधवार को सभी सस्पेंस खत्म करते हुए चार पेज का इस्तीफा ट्वीट कर कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था।  आगे पढ़ें

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पार्टी के वफादार खड़गे को मिल सकता है अध्यक्ष का पद, शिंदे भी हैं रेस में

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। खड़गे पार्टी के वफादार होने के साथ ही दलित चेहरा भी हैं। पिछली लोकसभा में खड़गे पर भरोसा जताते हुए उन्हें कांग्रेस पार्टी के नेता भी बनाया गया था। हालांकि, 2019 में खड़गे कर्नाटक में अपने मजबूत गढ़ माने जानेवाले गुलबर्ग से चुनाव हार गए हैं। पार्टी के एक और वरिष्ठ और दलित नेता सुशील कुमार शिंदे भी सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद की रेस में हैं।  आगे पढ़ें

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नए पीसीसी चीफ को लेकर बढ़ी सरगर्मी, सिंघार के बाद सक्रिय हुए मरकाम

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष पर फैसले के बाद यह समझा जा रहा था कि मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला भी एक या दो दिन में हो जाएगा, लेकिन हाईकमान मप्र को लेकर फिलहाल जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहता। मप्र की स्थिति छत्तीसगढ़ की तुलना में अलग है, क्योंकि मध्यप्रदेश में गुटीय संतुलन बनाने में हाईकमान को सामान्य परिस्थितियों में ही पसीना छूट जाता है तो ऐसे हालात में जोखिम लेने को कोई भी तैयार नहीं है। प्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी जैसे दिग्गजों की सहमति से ही नया पीसीसी अध्यक्ष बनाने की कवायद होगी और इनमें से कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए मनाने में लगे हैं।  आगे पढ़ें

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राहुल गांधी के फैसले पर अब भी संदेह, कांग्रेस के सीनियर नेताओं की अहम बैठक आज

कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर राहुल गांधी आगे भी बने रहेंगे या फिर नहीं, इस पर अब भी संदेह है। इस बीच बुधवार को कांग्रेस के सीनियर लीडर मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए मीटिंग करेंगे। इस मीटिंग को राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष के भविष्य के तौर पर अहम माना जा रहा है। यह मीटिंग दोपहर 12 बजे शुरू होगी। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी अब भी अध्यक्ष पद से इस्तीफे के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।  आगे पढ़ें

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पीसीसी चीफ पद के लिए लामबंद हुए नेता, सिंधिया समर्थक भी हुए सक्रिय

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद देशभर में कांग्रेस संगठन में फेरबदल के लिए इस्तीफों का दौर चल रहा है। वहीं, विधानसभा चुनाव के बाद मप्र कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने पर अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव तक उन्हें हाईकमान ने जिम्मेदारी संभालने को कहा था। मगर लोकसभा चुनाव में पांसा पलट गया और अब नए चेहरे को पीसीसी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने की मांग उठने लगी है। प्रदेश में कांग्रेस के विभिन्न् गुटों के नेताओं के नाम चर्चा में आ गए हैं। यही नहीं, मंत्रालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री नाथ और दिग्विजय सिंह के बीच बंद कमरे में चर्चा भी हुई।  आगे पढ़ें

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राहुल के खिलाफ मीनाक्षी की याचिका दायर करने वाली वकील को गहलोत ने हटाया

सुप्रीम कोर्ट में कुछ वकीलों को ही ऐडवोकेट-आॅन-रिकॉर्ड का दर्जा प्राप्त है। इसके लिए उन्हें कठिन परीक्षा से गुजरना होता है। वे वादी की तरफ से याचिका दायर कर सकते हैं। जब मामले में सुनवाई होती है तो उन्हें कोर्ट में दलील दे रहे वकील के साथ मौजूद होना होता है। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने 12 अप्रैल को सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने लेखी की याचिका का जिक्र करते हुए इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। देरी से अपलोड किए गए कोर्ट के आदेश से पता चला कि रुचि कोहली ऐडवोकेट-आन-रिकॉर्ड थीं।  आगे पढ़ें

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