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इस भारी भरकम मतदान के मायने

तो क्या यह मान लें कि मध्यप्रदेश में हो रही यह बम्पर वोटिंग राज्य सरकार के खिलाफ विशेषत: किसानों के गुस्से का नतीजा है? या फिर यह कमलनाथ सरकार ने जैसा वो दावा कर रही है कि संकल्प पत्र के जिन वचनों को उसने पूरा कर दिया है यह उसके प्रति लोगों का समर्थन है। लोगों में आक्रोश तो दनादन हो रही बिजली कटौती को लेकर भी है। भोपाल में जहां पांच दशक बाद मतदान प्रतिशत ने साठ का आंकडा पार किया है, वहां तो माना जा सकता है कि दिग्विजय सिंह और हिंदू आतंकवाद की प्रतीक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक विषय हो सकती हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भोपाल लोकसभा के भी ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान ज्यादा बढ़ा है। खेती किसानी से ज्यादा वास्ता ग्रामीण आबादी का ही होता है।एकतरफा सोचना ठीक नहीं है। इसलिए यह तथ्य भी नहीं बिसराया जा सकता कि यह प्रतिशत मोदी सरकार के खिलाफ जनादेश वाला मामला भी हो सकता है। अनेकानेक मोर्चों पर यह सरकार भी असफल रही है। लेकिन मोदी की प्रति नाराजगी या समर्थन तो देश भर में एक जैसा ही होता, इसमें मध्यप्रदेश क्यों अलग जाता दिख रहा है? दिमाग पर बहुत अधिक जोर डालने के बावजूूद मामला नाथ या गांधी के बराबरी वाली नाराजगी का प्रतीत नहीं हो पाता। मध्यप्रदेश के संदर्भ में इसकी एक वजह नजर आती है। यहां पंद्रह साल बाद बनी कांग्रेस की सरकार से भाजपा-विरोधियों की अपेक्षाएं अनंत तक पहुंच गयी थीं। खासतौर पर दस दिन में कर्ज माफी की बात ने जनमत को सर्वाधिक प्रभावित किया था। read more  आगे पढ़ें

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नाथ का गुस्सा शिवराज से या राहुल से?

इस लोकसभा चुनाव के बीच पेशागत और कुछ निजी कारणों से भी कई बार देहाती इलाकों में जाना हुआ। हर जगह एक शिकायत मिली। कर्ज माफ न होने की। किसान इससे परेशान दिखे। मेरे कांग्रेसी मित्र भी आॅफ द रिकॉर्ड बातचीत में इस स्थित से शर्मिंदा और उलझन में भरे नजर आये। इसकी वजह केवल और केवल दो रहीं। पहली, राहुल गांधी की नादानी-मिश्रित व्यग्रता और दूसरी, कांग्रेस में उनके खिलाफ बोलने के साहस का अभाव। राहुल जानते थे कि दस दिन में कर्ज माफी किसी भी सूरत में संभव नहीं है। खासतौर से तब तो कतई नहीं, जब इस ऐलान को चट मंगनी, पट ब्याह की तर्ज पर किया जाए। कांग्रेसी हरकारों के सुर ऐसे ही थे, जैसे कि दस दिन में कर्ज माफी का प्रमाण पत्र हर किसान के हाथ में होगा। हरकारे मुतमईन थे कि राहुल गांधी ने कहा है तो यकीनन ऐसा करने के लिए उनके पास योजना भी होगी। लेकिन योजना तो केवल यह थी कि किसी तरह नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाया जाए।  आगे पढ़ें

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सरकार के कर्ज माफी के दावों की पोल खोलती खबर

बैंक का कर्जा नही चुकाने पर 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कुर्की का नोटिसबेटे को कैंसर होने पर महिला ने इलाज के लिए बैंक से 60 हजार का लोन लिया था। बेटे प्रेमचंद के इलाज में मोटी पूंजी खर्च करने के बाद भी अक्टूबर 2015 में उसकी मौत हो गई। इसके चलते कर्ज की राशि समय पर नहीं चुका पायी। नई सरकार ने वादा किया था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ करेंगे। फिर भी सोमवार को बैंक ने कर्ज की राशि चुकाने के लिए नोटिस दे दिया। 15 दिन में 1 लाख 11 हजार रुपए नही चुकाने पर एफआईआर दर्ज कर संपत्ति की नीलामी की जाएगी।  आगे पढ़ें

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आर्थिक बोझ से छत्तीगसढ़ की वित्तीय स्थिति डगमगाई, सरकार ने निर्माण कार्यों पर लगाई रोक

छत्तीसगढ़ की सत्ता में आई कांग्रेस ने राज्य में रोजगार आयोग की स्थापना का वादा किया है। सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले कॉलेजों के लिए प्रोफेसर समेत कुछ और पदों पर भर्ती की घोषणा भी की, लेकिन अभी इनमें से ज्यादातर की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। उधर, लोकसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र में भी पार्टी ने 22 रिक्त पड़े सरकारी पदों को भरने का वादा किया है। राज्य में नई सरकार का शपथ ग्रहण 17 दिसंबर 2018 को हुआ था। शुरूआती 99 दिनों में सरकार ने 10400 करोड़ का कर्ज लिया है। यानी सरकार रोज औसत 105 करोड़ का कर्ज, जबकि इस वर्ष लोकसभा चुनाव शुरू होने के पहले तक 26 मार्च तक 85 दिनों के हिसाब से देखा जाए तो यह आंकड़ा 122 करोड़ का है।  आगे पढ़ें

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जयवर्धन सिंह का बड़ा बयान: कहा- किसान कर्ज में गड़बडी के लिए भाजपा जिम्मेदार

मंत्री ने बताया कांग्रेस जल्द से जल्द योजना का लाभ किसानों को देना चाहती है, जिसके लिए उन्होंने हरे, सफेद और गुलाबी रंग के फॉर्म भरवाए हैं। सरकार जल्द ही एक सूची जारी करेगी, जिसमें उन किसानों के नाम होंगे जिनका कर्ज माफ कर दिया गया है। इस सूची को आॅनलाइन कर दिया जाएगा। आगामी 22 तारीख तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 22 तारीख से किसानों के पैसे उनके खाते में आने शुरू हो जाएंगे।  आगे पढ़ें

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किसान कर्ज माफी के बाद सरकार का खजाना खाली, सरकारी विभागों में वेतन का संकट

कमल नाथ सरकार चुनाव के दौरान किए गए अपने वादों को पूरा करने में व्यस्त है, लेकिन सरकार के ही कारिंदे अब मासिक वेतन के लिए परेशान हो रहे हैं। कई विभागों के कर्मचारियों की तनख्वाह एक, दो नहीं बल्कि तीन-तीन माह से नहीं आ रही है। मामले में भाजपा सांसद आलोक संजर का कहना है कि सरकार में आना तो आसान है, लेकिन सरकार चलाना कठिन है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब विपक्ष में थी तो शिवराज सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगाए, लेकिन प्रदेश में कभी वेतन नहीं मिलने का मामला सामने नहीं आया। उन्होंन कहा कि कांग्रेस रूहाने सपने दिखाकर सत्ता में तो आ गई है, लेकिन इन्हें सरकार चलाना नहीं आता।  आगे पढ़ें

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तूने पहन तो लिए कपड़े मेरे मगर...

किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा काम कर गयी। तीन राज्यों में अन्नदाता ने कांग्रेस की सरकार बनवा दी। छत्तीसगढ़ में तो उसने कांग्रेस के पक्ष में वोटों की लहलहाती फसल खड़ी कर दी। इससे उत्साहित गांधी ने बीते दिनों गरीबों को न्यूनतम आय की गारण्टी दे दी और अब कह दिया है कि उनकी पार्टी के आम चुनाव जीतते ही महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराया जाएगा। निश्चित ही तीनों घोषणाएं उनके दायरे में आने वालों के कल्याणकारी नजर आती हैं। इनके पीछे राहुल की जो रणनीति छिपी है, वास्तव में उसने नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे घुटे हुए राजनीतिज्ञों की भी नींद उड़ा दी होगी। read more  आगे पढ़ें

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किसानों का कर्ज करने से पहले फर्जी मामलों की जांच करेगी सरकार, हर जिले में बनाए जाएंगे कंट्रोल रूम

सीएम कमलनाथ ने इन आपत्तयों को गंभीरता से लिया और वहीं से आदेश दिया कि इस धांधली की जांच की जाए। सीएम के निर्देश पर सहकारिता विभाग के प्रमुथ सचिव ने बैठक बुलायी। इसमें फैसला लिया गया कि हर जिÞले में कंट्रोल रूम बनाए जाएं जिसमें जय किसान फसल ऋण माफी योजना के फर्जी मामलों की आपत्तियों की सुनवाई की जाए।  आगे पढ़ें

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सरकार के गले की हड्डी बनी कर्जमाफी, जिन किसानों ने नहीं लिया कर्ज, वह भी बने कर्जदार

देवरी के गौरझामर केन्द्रीय बैंक मर्यादित में एक सूची चस्पा की गई जिसमें किसानों के लाखों के कर्जा माफी के आदेश हुए हैं। जब महका, जनकपुर, नाहरमउ, गुगवारा चरगंवा गांव के किसानों इस बात का पता लगा की उनका कर्जा माफ हो गया हैं तो वो हक्के बक्के रह गए। एक किसान ने बताया कि उसने कभी कर्ज नहीं लिया लेकिन सूची में उसका नाम है। इसके अलावा ऐसे ही कुछ किसानों ने जब अपना नाम सूची में देखा तो उन्होंने सूची को फर्जी बताते हुए गौझामर में चक्काजाम कर दिया।  आगे पढ़ें

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मप्र किसान कर्ज माफी: ऋण खाते से आधार लिंक कराना है जरूरी, तभी मिलेगा लाभ

एमपी आनलाइन द्वारा 15 जनवरी से लाइव पोर्टल चालू किया जा रहा है, जिस पर किसानों से मिलने वाले आवेदन आॅनलाइन अपडेट किए जाएंगे। किसानों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा। किसान जिस श्रेणी में आएगा उसे उस रंग का फॉर्म भरना होगा, फार्म किसान को निशुल्क मिलेगा। योजना से जिले के लगभग 70 हजार किसान लाभान्वित होंगे।  आगे पढ़ें

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