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आलोक खरे पर कार्रवाई की उम्मीद नहीं, भोपाल उड़न दस्ते में हो सकती है पोस्टिंग, भ्रष्टाचार को लेकर कमलनाथ सरकार का ढीला रवैया

लगता है कमलनाथ सरकार में भ्रष्टाचार कोई बहुत बड़ा विषय नहीं है। लिहाजा, इंदौर में लोकायुक्त छापे की जद में आए सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त छापे से सामने आई दौलत के बाद भी विभाग ने अब तक निलम्बन जैसी साधारण कार्रवाई तो दूर इंदौर से आलोक खरे की पदस्थापना में भी परिवर्तन नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्दी ही आलोक खरे को उड़न दस्ता भोपाल में पदस्थ कर सकती है। विभाग के एक पूर्व कमिश्नर और रिटायर्ड आईएएस अफसर इस मामले में रूचि ले रहे हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव से लेकर विभाग के प्रमुख सचिव और कमिश्नर तक इस मामले में किसी बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार नहीं है। हाल ही में आईएएस विवेक अग्रवाल के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत के बाद आईएएस एसोसिएशन के रवैये से भी यह साफ है कि भ्रष्टाचार के मामलों में इस सरकार के आला अफसरों का रवैया क्या है।read more  आगे पढ़ें

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भागर्व ने कहा- कमलनाथ सरकार हर मोर्चे पर फेल, झाबुआ जीते तो शिवराज फिर बन सकते हैं सीएम

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा- मप्र सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है। अगर वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं तो जनता खुद अपना फैसला सुना देगी। झाबुआ सीट जीतते हैं तो फिर से शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बन सकते हैं। भार्गव ने मंगलवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार हर मोर्चे पर फेल है।  आगे पढ़ें

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मेग्निफिशिएंट मध्यप्रदेश के लिए सोम डिस्टलरी बड़ा उदाहरण, सजा के बाद भी लायसेंस निरस्त करने के लिए कदम नहीं उठा रही सरकार

उद्योगों के लिए शानदार (मेग्नीफिशियेन्ट) मध्यप्रदेश बनाने का दावा कर रही कमलनाथ सरकार अन्य उद्योगपतियों को क्या सुविधाएं देगी, यह 18 अक्टूबर के बात पता चलेगा। लेकिन सोम डिस्टलरी के उदाहरण को देख कर उद्योगपति कमलनाथ सरकार पर भरोसा कर सकते हैं कि नियम-कानूनों से परे जाकर भी उद्योग यहां तरक्की कर सकते हैं। लगता कुछ ऐसा ही है। हाल ही में शराब तस्करी के मामले में सजायाफ्ता हुए सोम डिस्टलरी और उसके मालिक जगदीश अरोरा पर अब तक सरकार ने इस आसवनी का लायसेंस रद्द करने की कोई पहल नहीं की है। ये तो खेर एक एक ताजा मामला है, सोम को प्रदेश की सभी सरकारों ने नियमों से परे जाकर कई बार बचाया भी है और नवाजा भी है। 1990 के बाद से इसके ढेरों उदाहरण भरे पड़े हैं।read more  आगे पढ़ें

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कमलनाथ सरकार ने देर रात पुलिस प्रशासन में किया बड़ा बदलाव, 15 आईपीएस अफसरों का किया तबादला

लंबे समय से परिवहन आयुक्त पद पर पदस्थ शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव को अध्यक्ष पुलिस हाउसिंग कापोर्रेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परिवहन आयुक्त अब वी मधु कमार होंगे। भोपाल आईजी योगेश देशमुख को पुलिस मुख्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आदर्श कटियार को पदस्थ किया गया है। माना जा रहा है कि भोपाल में खटलापुरा घाट (छोटा तालाब) में गणेश मूर्ति के विसर्जन के दौरान हादसे में 11 युवकों की डूबने से मृत्यु की घटना के बाद देखमुख को हटाने की कार्रवाई की गई है। इसको लेकर लगातार मांग भी उठ रही थी।  आगे पढ़ें

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वनमंत्री फिर लगाया गंभीर आरोप, कहा- दिग्गी देश में धु्रवीकरण और कमलनाथ सरकार को करते हैं ब्लैकमेल

सिंघार ने यह भी कहा कि दिग्विजय संभागीय स्तर पर मीटिंग करते हैं। ट्रांसफर पोस्टिंग कराते हैं और मंत्रियों को चिट्ठी लिखकर उसे वायरल करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह ने उनसे मिलने का समय मांगा है। इसलिए वे सारे काम छोड़कर उनके इंतजार में बैठे हैं। वह इस मामले में कमलनाथ से भी मुलाकात करेंगे।  आगे पढ़ें

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सिंधिया ने कमलनाथ सरकार पर बोला बड़ा हमला, कहा- प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं रुक पाना दुर्भाग्यपूर्ण

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अवैध रेत खनन को लेकर प्रदेश सरकार का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि अवैध खनन का नहीं रूक पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बता दें कि इससे पहले कमलनाथ सरकार के मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने भी अवैध खनन को लेकर सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि रेत खनन के लिए एक-एक थाने से 50 से 60 लाख रूपए तक लिए जाते हैं और ये रुपए ऊपर तक जाते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान के बाद से सियासत तेज हो गई है। उन्होंने कहा- मुझे दुख है कि अभी भी अवैध उत्खनन हो रहा है। जबकि हमने चुनाव प्रचार में साफ तौर पर कहा था अवैध उत्खनन कांग्रेस सरकार में नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।  आगे पढ़ें

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भाजपा की उजागर होती दरारें.....

भाजपा के कई लोग तर्क दे रहे हैं कि यह पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। अब सुरेन्द्रनाथ ने खुद के स्वार्थ के लिए तो यह आंदोलन नहीं किया। वे जनता के एक बड़े वर्ग के हित की लड़ाई लड़ रहे हैं। फिर ऐसा क्या हुआ कि चुनाव के समय जनता की सेवा की दुहाई देने वाले तमाम भाजपाइयों ने सिंह के संघर्ष से दूरी बना ली है? क्या यह इस बात की ईर्ष्या है कि तमाम निकम्मों के बीच सिंह ने ऐसे कदमों के जरिए अपने विपक्षी नेता होने के तेवर जल्दी दिखा दिए। बाकी भाजपाईयों को तो शायद लग रहा है कि सत्ता से दूरी का यह उनका अल्पविराम ही है। वापस सत्ता में आना ही है तो फिर काहे का विरोध। वैसे भी विधानसभा में बटी हुई भाजपा एकदम साफ दिख ही रही है। हतप्रभ कर देने वाली बात यह कि सिंह के ताजा तेवरों के भाजपा की नीतियों के प्रति सकारात्मक होने के बावजूद भाजपा की ही ओर से नकारात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। read more  आगे पढ़ें

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कर्जमाफी घोटाले की कमलनाथ सरकार ने कराई जांच, दोषियों के खिलाफ शिवराज सरकार ने बरती थी नरमी

सहकारिता मंत्री ने जय किसान फसल ऋण माफी मुक्ति योजना में किसानों के नाम पर चढ़े कर्ज में गड़बड़ियां सामने आने पर वर्ष 2008 में हुई कर्ज माफी की जांच कराने की घोषणा की थी। प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी को उन्होंने इसके आदेश दिए थे। केसरी ने आयुक्त सहकारिता को निर्देश दिए और उन्होंने अपेक्स बैंक से जांच करवाई। बैंक ने दस्तावेजों की पड़ताल करवाई तो खुलासा हुआ कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में भेदभाव किया गया।  आगे पढ़ें

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क्या हम अभिशप्त हैं?

बात केवल एक प्लेटिनम प्लाजा की नहीं है। गड्ढों के तौर पर शहर के चेहरे पर उगी चेचक हर ओर देखी जा सकती है। कोलार के इलाके में चले जाइए। किस जगह पानी के नीचे मौत आपका इंतजार कर रही है, कोई नहीं जानता। छोटे तालाब से लेकर रेलवे स्टेशन और बस स्टेंड तक की सड़क तो जैसे सामूहिक दुराचार की शिकार बना दी गयी है। वाहन चलाना तो दूर, उस पर पैदल चलना तक जन्म-मरण का प्रश्न बन गया है। स्मार्ट सिटी वाले निमार्णाधीन हिस्से के पास से गुजरते समय यही आशंका लगी रहती है कि वहां भी कहीं कोई गड्ढा बांहे पसारे इंतजार न कर रहा हो। यकीन न हो तो टी टी नगर स्टेडियम के दोनों छोर पर देख सकते हैं।read more  आगे पढ़ें

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भाजपा विधायक ने कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप, कहा- मुझे पैसों का दिया जा रहा लालच

भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी ने कहा कि, कांग्रेस के कुछ लोगों ने मुझसे संपर्क साधा और कहा कि वो मुझे जो चाहें दे देंगे। लेकिन मैंने साफ कर दिया कि मैं आदिवासी और गरीब जरूर हूं, लेकिन बिकाऊ नहीं हूं। मैं भाजपा के साथ ही रहूंगा। बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में अपराध कानून(मध्य प्रदेश संशोधन) बिल 2019 पर विधानसभा में मत विभाजन की नौबत आ गई थी। वोटिंग के दौरान भाजपा के दो विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समर्थन में वोट किया था। इसके बाद दोनों ही कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही प्रदेश में सियासत गरमाई हुई है।  आगे पढ़ें

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