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युवक की मौत का मामला: शिवराज ने कहा- प्रदेश सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं, पुलिस हुई निरंकुश

शिवराज सिंह ने पुलिस की पिटाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "युवक की कार बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग से टकरा गई थी। ये ऐसी घटना ऐसी नहीं थी कि पुलिस युवक को पीट-पीटकर मार डाले। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ सस्पेंशन के बजाए इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि, "मध्य प्रदेश में गरीबों को सताया जा रहा है, विरोध करता है तो झोपड़ी को आग लगा दी जाती है। उस आग में कूदकर एक बहन ने जान दे दी। क्या गरीबों को ऐसा जताया जाएगा, आदिवासियों को सताने का भी मामला सामने आया है। गरीबों के कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं। अन्याय की अति हो गई है।  आगे पढ़ें

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अब जिद छोड़ों भी वैराग्यानंद जी महाराज...

वैसे वैराग्यानंद की जल समाधि अब जन आंदोलन का विषय है। कारण भी है, लोग फोन पर वैराग्यानंद को परेशान कर रहे हैं। किसी को रालेगांव सिद्धी जाकर अन्ना हजारे साहब से मिलना चाहिए। बुजुर्गवार को बताना चाहिए कि लोकपाल-वोकपाल बहुत हो गया। अब तो समाधि आंदोलन समय की पुकार बन चुका है। जो इसे लेना चाह रहे हैं, उनके लिए इसकी अनुमति का बिल पारित कराया जाए और जो जिंदा दफनाने के लायक होने के बाद भी समाज में पद तथा प्रतिष्ठा से नवाजे जा रहे हैं, उन्हें जबरिया समाधि देने संबंधी बिल को भी मंजूरी दी जाए। अपने भारत कुमार..नहीं-नहीं, मनोज कुमार की आखिरी सुपर हिट फिल्म क्रांति में गुलाम भारत के लिए कहा गया था, इस पर जो आंख उठायेगा, जिंदा दफनाया जाएगा। आजाद भारत के सच्चे शुभचिंतकों के भीतर भी उस क्रांति का ज्वार उमड़ रहा है, जो इस-इस पर जो आंख उठाएगा, जिंदा दफनाया जाएगा वाला इंकलाबी गीत गाने को बेताब हैं। इस-इस का मतलब, देश की एक-एक बच्ची, एक-एक ईमानदार नागरिक, एक-एक सच्चा राष्ट्रभक्त, एक-एक मेहनतकश मजदूर और ममता बनर्जी के राज्य का एक-एक सरकारी डॉक्टर, है। इस फेहरिस्त में और भी कई इस-इस शामिल हैं, किंतु सभी का वर्णन करने में बहुत समय लगेगा। सो सुधी पाठक अपने हिसाब से आगे तय कर लें, किसे और जोड़ना है।  आगे पढ़ें

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प्रदेश में भाजपा का संकट

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जिस तरह के परिणाम आए हैं, उसमें यह भी संभव नहीं है कि शिवराज दिल्ली में कोई बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। केंद्र में सरकार का काम गति पकड़ चुका है। राष्ट्रीय नेतृत्व का मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा। इसके बाद जो होगा, उसकी एक तयशुदा प्रक्रिया यह हो सकती है कि शिवराज को दिल्ली तक सीमित कर दिया जाए। इससे विजयवर्गीय या फिर जिसे भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगे बढ़ाना चाहे उसे अपने भावी कदम तय करने में सुविधा हो। इसके अलावा अब राकेश सिंह और सुहास भगत के लिए भी शिवराज की छाया से मुक्त होकर खुलकर काम करने का अवसर प्रकट हो जाना तय है। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में अपनी मार्कशीट में फर्स्ट डिवीजन पास हैं तो उनका भी कोई तो प्रतिफल तय होना ही है। हालांकि हो सकता है कि वे 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तक वहां के दायित्व को संभालते रहें। शिवराज की अगली भूमिका क्या तय की जाएगी? पहले से भी अधिक ताकत से केंद्र में सरकार बना चुकी भाजपा के संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं रहेगा। लेकिन बहुत कुछ करने का सुअवसर विजयवर्गीय के पास है। अब वह शोले के कटे हाथ वाले ठाकुर नहीं हैं। बल्कि उस शक्तिशाली पुरुष की तरह दिखने लगे हैं, जिसके पास खुद के सहित मोदी और शाह जैसे हाथ भी हैं।  आगे पढ़ें

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प्रदेश की कमलनाथ सरकार को घेरने में लगे रहते हैं भाजपा दिग्गज नेता

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से लेकर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव तक कमलनाथ सरकार के खिलाफ जमकर बयानबाजी में जुटे हुए हैं। सरकार गिराने के दावों के बीच कोई उन्हें कलंकनाथ कह रहा है तो कोई सड़कनाथ बनाने की धमकी दे रहा है। विजयवर्गीय ने तो यहां तक बोल दिया कि कमलनाथ ने अपनों को ही डस लिया, सबको खत्म करने अपने बेटे नकुलनाथ को खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी मुझे मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के लिए बुला रहे थे, लेकिन 99 पाप माफ, अभी हम सरकार नहीं गिराएंगे।  आगे पढ़ें

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सरकार के खिलाफ आंदोलन को लेकर श्रेय लेने भाजपा नेताओं में मची होड़, अपने-अपने इलाकों में शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के खिलाफ आंदोलन करने को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची है। पानी-बिजली और कानून व्यवस्था पर सूबे के नेता अपने-अपने इलाकों में ही शक्ति प्रदर्शन कर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में कानून-व्यवस्था बिगड़ने को लेकर आंदोलन हुआ और कैंडल मार्च निकाला गया तो इंदौर में मंगलवार को किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने किसान आक्रोश रैली निकाली।  आगे पढ़ें

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कमलनाथ सरकार को शिवराज की चेतावनी, कहा- बच्चियों पर अत्याचार नहीं रुके तो भाजपा उतरेगी सड़क पर

चौहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की स्थिति बदतर होती जा रही है। सरकार ट्रांसफर और पोस्टिंग के उद्योग में व्यस्त है और कानून व्यवस्था पर उसका ध्यान ही नहीं है। बार-बार तबादलों से पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का मनोबल भी गिरा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।  आगे पढ़ें

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तौबा...क्या एक ही परिसर में छह नई डिस्टलरी और बढ़ा देगी कमलनाथ सरकार,प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना छह गुना शराब उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश में ब्लेक लिस्टेड शराब समूह

मामला सेहतगंज स्थिति आसवनी का है। जिस शराब समूह की यह डिस्टलरी है, वो कई मामलों में विवादास्पद और यहां तक कि 2007 से लेकर 2019-20 तक के लिए जारी आबकारी विभाग की काली सूची में दर्ज है। इस डिस्टलरी ने हाल में सीधा राज्य मंत्रालय में अपनी डिस्टलरी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसकी वर्तमान में उत्पादन क्षमता एक साल में तीन करोड़ साठ लाख लीटर मदिरा बनाने की है। अब यह डिस्टलरी साल में अट्ठारह करोड़ लीटर मदिरा उत्पादन क्षमता इसी केम्पस में हर साल बढ़ाना चाहती है। इसे अगर अनुमति मिलती है तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि सरकार कम से कम छह नई डिस्टलरी प्रदेश में बढ़ा रही है। read more  आगे पढ़ें

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किसानों को नहीं मिल रहा भावांतर योजना का लाभ, प्याज-लहसुन के भाव पर घिरी नाथ सरकार

सरकार की प्याज,लहसुन प्रोत्साहन योजना पर भी किसान विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। जब शिकायत बढ़ी तो सीएम कमलनाथ ने इंदौर कलेक्टर को मुख्यमंत्री प्याज लहसुन कृषक प्रोत्साहन योजना की समीक्षा के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश के किसानों को प्याज और लहसुन का सही दाम दिलाने के लिए नई सरकार ने मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना की शुरूआत की है। इसमें 1 जून से 9 रुपए प्रति किलो के हिसाब से प्याज खरीदी जाना है। राज्य के बाहर मंडियों में प्याज बेचने व परिवहन और भंडारण के लिए 75 फीसदी अनुदान मिलने की बात कही जा रही है। लेकिन पहले से अपने आपको ठगा महसूस कर रहे किसान इस नयी योजना पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस समर्थित विधायकों ने किया एकजुटता का प्रदर्शन, कहा- 5 साल तक रहेंगे सरकार के साथ

सूत्रों के मुताबिक डॉ. अशोक मर्सकोले और कुछ अन्य आदिवासी विधायकों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जिन डेढ़ दर्जन विधानसभा सीटों पर जीती है, उनमें 13 आदिवासियों के क्षेत्र की हैं। कांग्रेस सरकार बनाने में भी 114 में से 31 विधायक आदिवासी क्षेत्र के हैं। इन आंकड़ों को बताते हुए उन्?होंने सरकार में इस अनुपात में जगह नहीं मिलने की शिकायत रखी। दूसरी तरफ कुछ विधायकों ने लोस चुनाव में संगठन की कमजोर स्थिति के बारे में भी बात रखी। कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्र की पानी की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर की तो मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  आगे पढ़ें

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कई राज्यों पर पड़ा एग्जिट पोल का असर, बढ़ी धड़कनें, सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने में अब चंद घंटे बाकी हैं। इससे पहले जारी एग्जिट पोल में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने की संभावना जताई गई है। एग्जिट पोल के इस अनुमान का असर कई राज्य सरकारों पर पड़ा है। मध्यप्रदेश में तो भाजपा दावा कर चुकी है कि मौजूदा कमलनाथ सरकार अल्पमत में है। राजस्थान में बसपा के समर्थन से कांग्रेस की सरकार चल रही है। वहीं तमिलनाडु में 22 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजा 23 मई को आएगा। गोवा की 4 सीटों की तस्वीर भी इसी दिन साफ होगी। कुल मिलाकर एक तरफ जहां पूरा देश यह जानने के लिए 23 मई का इंतजार कर रहा है कि एक बार फिर मोदी सरकार बनेगी या नहीं, वहीं इन राज्यों पर भी खास नजर रहेगी।  आगे पढ़ें

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