होम कमलनाथ
the-issue-of-murder-of-ganguly-innocent-in-the-ass

विधानसभा में गूंजा मासूम की हत्या का मुद्दा, विपक्ष ने कमलनाथ सरकार से मांगा इस्तीफा

सत्ता पक्ष की ओर से सभी मंत्रियों ने विपक्ष के हमलों पर पलटवार करते हुए कहा कि, बीते 15 साल में मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद खराब थी। दुष्कर्म के मामलों में देश भर में प्रदेश अव्वल था। मध्य प्रदेश लगातार अपराध हो रहे थे, तब क्यों किसी ने चिंता नहीं ? अब श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। इस कारण सदन में हंगामा किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि प्रश्नकाल को चलने दें बजट के दौरान स्थगन प्रस्ताव सामान्यतया नहीं लिए जाते हैं।  आगे पढ़ें

bjps-allegation-insult-of-hindus-doing-government-

भाजपा का आरोप: श्रीलंका में सीता मंदिर निर्माण से पहले तथ्यों की जांच कराकर सरकार कर रही हिन्दुओं का अपमान

श्रीलंका में प्रस्तावित सीता मंदिर के निर्माण से पहले उसके तथ्यों की जांच कराकर कमलनाथ सरकार हिंदुओं का अपमान कर रही है। ये आरोप भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने लगाए। मंगलवार को भोपाल में मीडिया से बातचीत में चौहान ने कहा कि सारा देश और दुनिया जानती है कि सीताजी को श्रीलंका की अशोक वाटिका में रखा गया था। यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है, लेकिन प्रदेश सरकार इस तथ्य की जांच की बात कह रही है कि सीताजी लंका गई भी थीं या नहीं।  आगे पढ़ें

nath-governments-confusion-over-the-issue-of-grade

शिक्षकों के समान बाबुओं को ग्रेड-पे देने के मामले में अफसरों ने बढ़ाई नाथ सरकार की उलझनें

कांग्रेस के वचन पत्र में 47(20) में कहा गया है कि 'लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को शिक्षकों के समान ग्रेड-पे और वेतन देंगे। सत्ता में आने के बाद कमलनाथ सरकार ने चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए सभी विभागों को वचन पत्र की कॉपी भेजी थी। विधानसभा में मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने जवाब दिया सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित इस वचन से जुड़ा सवाल विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने पूछा था कि लिपिकों का ग्रेड-पे बढ़ाने का आदेश कब तक जारी किया जाएगा। विभागीय मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने जवाब दिया कि सहायक ग्रेड-3 का ग्रेड-पे 1900 की जगह 2400 करने का प्रस्ताव वित्त विभाग अमान्य कर चुका है। इसलिए आदेश जारी करने का सवाल नहीं है।  आगे पढ़ें

the-union-minister-said-tribal-people-and-anti-far

केन्द्रीय मंत्री ने कहा- आदिवासियों और किसान विरोधी है कमलनाथ सरकार

इस दौरान सिवनी तहसील में वर्ष 2018 में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों ने फसल बीमा की राशि दिलाए जाने व शिकारा से रामटेक तक नई रेलवे लाइन बिछाने स्थानीय लोगों ने केन्द्रीय राज्य मंत्री को ज्ञापन सौंपा। कुलस्ते ने क्षेत्र की दोनों मांगों पर जल्द ही कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को दिए गए ऋण माफी प्रमाण पत्रों को फर्जी बताते हुए कहा कि किसान परेशान हैं। किसानों को सहायता मिलनी चाहिए। यदि किसानों को सहायता राशि नहीं दी गई तो प्रदेश में भाजपा आंदोलन करेगी।  आगे पढ़ें

congress-leaders-protesters-on-the-eviction-and-fi

आदिवासियों की बेदखली और फायरिंग की घटना पर विरोध में आए कांग्रेस नेता, दोषियों के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

विगत मंगलवार को बुरहानपुर के सिवल गांव में पुलिस, जिला प्रशासन व वन विभाग के अधिकारी खेत में जेसीबी से फसल उखाड़ने पहुंचे तो वहां के आदिवासियों विरोध किया। सरकारी अमले ने फायरिंग की, जिसमें गोखरिया बड़ोले, भूरालाल अचाले, राकेश अचाले और वकील को छर्रे लगे। इस घटना के बाद जयस संगठन नेता डॉ. अलावा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने वन अधिकार के लिए खारिज हुए व लंबित दावों के पुन: निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक मई 2019 को सभी कलेक्टरों को आदेशित किया जा चुका है कि वे प्रक्रिया पूरी होने तक किसी को बेदखल न करें, दूसरी तरफ वन विभाग का आतंक जारी है।  आगे पढ़ें

seeing-the-campaign-to-break-the-legislators-congr

विधायकों के टूटने का अभियान देख दूसरे किले बचाने में जुटी कांग्रेस, मप्र और राजस्थान में पार्टी हुई अलर्ट

आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार समाजवादी पार्टी, बीएसपी और कुछ निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर है। वहीं, राजस्थान में कांग्रेस सरकार को करीब एक दर्जन निर्दलीय विधायकों ने इस शर्त पर समर्थन दिया है कि अशोक गहलोत ही राज्य के मुख्यमंत्री बने रहें। वैसे, कांग्रेस की स्टेट लीडरशिप अब तक अपनी पार्टी को एकजुट रखने में सफल रही है लेकिन कई नेताओं को लगता है कि आनेवाले दिनों में उनकी चुनौती बढ़ सकती है। कांग्रेस ने यह समझ लिया है कि कर्नाटक और गोवा दोनों राज्यों में उसके विधायकों को जिस अंदाज में तोड़ा जा रहा है, वह पुराने आॅपरेशन लोटस में अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों से बहुत आगे की चीज है।  आगे पढ़ें

ab-kya-cs-bachaenge-som-samooh-ko-musibat-se-sat-k

अब क्या सीएस बचाएंगे सोम समूह को मुसीबत से, सात करोड़ का बकाया दो सौ चौसठ करोड़ में बदला, आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकार को करना चाहिए संपत्ति की नीलामी

सोम डिस्टलरी ने एमपीएसआईडीसी से 1998 से 2000 के बीच कुल दस करोड़ से ज्यादा की राशि कर्ज के तौर पर ली थी। उस दौर में निगम के प्रबंध संचालक आज के मुख्य सचिव एस आर मोहंती ही थे। उस समय निगम द्वारा बांटे गए कर्जों को लेकर उन्हें कई विवादास्पद स्थितियों का सामना भी करना पड़ा। अब मौका है कि वे अदालतों से कर्ज वसूली के जो फैसले आ गए हैं, उन पर अमल करवा सकते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रही सरकार में भी ऐसे कड़े कदम उठाए जाएंगे या नहीं? सोम के मामले में देश की सबसे ऊंची अदालत भी दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखे हुए है। इस मामले में अदालती प्रक्रियाओं के दौरान शराब कंपनी ने ऊंट के मुंह में जीरे जैसी कुछ राशि तो जमा करवाई है। उसका प्रयास था कि उसने जो रकम ली है, उसी पर निगम समझौता कर लें, लेकिन जाहिर है भारी भरकम ब्याज को निगम भी नहीं छोड़ना चाहता है। पर शराब कंपनी के राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के कारण निगम या उद्योग विभाग कोई कड़ा कदम नहीं उठा सका है।  आगे पढ़ें

sach-chor-chor-ke-shor-ka

सच चोर-चोर के शोर का

गजब ही चल रहा है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि वक्त है बदलाव से नाथ सरकार का आशय शासन व्यवस्था के अहम अंग पुलिस एवं खूफिया तंत्र को बहुत पीछे धकेल देने से रहा होगा। महीने भर से ज्यादा हो गया, जब कानून मंत्री पीसी शर्मा एक आडियो क्लिप लेकर अवतरित हुए। दावा किया कि इसमें कोई भाजपाई किसी बिजलीकर्मी को ज्यादा से ज्यादा बिजली कटौती करने के लिए कह रहा है। लेकिन आज तक पता नहीं चल पाया कि वह कौन था। यकीनन वह भी कल वाले आचार्यजी की तरह ही छलिया निकला। न वो मिला और न अब तक पुलिस आचार्यजी की गिरेहबान तक पहुंच सकी है। तो फिर यही उपाय शेष बचता है कि मुनादी करके उसकी तलाश की जाए। हो सकता है कि राज्य की जनता ही हाकीमों से बेहतर निकले।  आगे पढ़ें

finance-minister-bhanot-who-came-to-present-the-bu

बजट पेश करने पहुंचे वित्तमंत्री भनोत, सदन में उठा महंगाई का मुद्दा

मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री तरुण भनोत ने अपना बजट भाषण शुरू कर दिया है। बजट से पहले ही सदन में महंगाई का मुद्दा उठा। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने टेक्सेशन का मुद्दा उठाया, जिस पर सीएम कमलनाथ और सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने इसका जवाब दिया। इसके पहले मंत्री भनोत जूट के फोल्डर में बजट लेकर पहुंचे, उन्होंने कहा इसी के अंदर जनता का भरोसा है। उन्होंने संकेत दिए कि बजट में कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा, जनता की जेब पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। हर वर्ग को फोकस करते हुए बजट बनाया गया है। सरकार अपने हर वादे को पूरा करेगी।वित्तमंत्री भनोत विधानसभा में बजट पेश करने के लिए करीब 10:30 बजे बंगले से रवाना हुए। इसके पहले पत्नी मालविका ने उन्हें तिलक लगाकर और काजू कतली खिलाकर आल द बेस्ट कहा।  आगे पढ़ें

is-bedee-ke-maayane-kya-hain

इस बेड़ी के मायने क्या हैं ?

पर मजेदार बात यह है कि मध्यप्रदेश की हुकूमत खबरनवीसों की उस नस्ल से भी डर रही है, जो मुख्यमंत्री, मंत्रियों और राजनेताओं के साथ सेल्फी लेने को जीवन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करते हैं! सरकार को उनसे भी खौफ हो गया है, जो खुद सरकार से खौफ के चलते मीडिया को मंडी में तब्दील कर चुके हैं! विधानसभा में मीडिया की स्वतंत्र चहलकदमी पर लगी रोक से वाकई हैरत हो रही है। सवाल उठ रहा है कि वास्तव में पत्रकारिता करने वालों के किए की सजा समूचे मीडिया को क्यों दे दी गयी? विधानसभा में पत्रकार अब हर उस जगह नहीं जा सकता, जिस-जिस जगह जाने की उसे मिले कार्ड में अनुमति दी जाती है। गनीमत है कि पत्रकारों के कक्ष और दीर्घा को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। वरना तो जिस तरह के तेवर दिख रहे हैं, उससे यही डर लगता है कि अगला कदम विधानसभा के परिसर में भी मीडिया की मौजूदगी पर रोक वाला न हो जाए। हुकूमत की ताकत के चलते यूं ही मीडिया के कई अंग पक्षघात के शिकार हो चुके हैं। हालांकि कुछ मट्ठर टाईप पत्रकार हर दौर में ऐसे होते हैं, जो सियासत से नहीं डरते। सच को सच लिखते हैं। गलत को गलत बताते हैं। जाहिर है कि ऐसे बची खुची पत्रकारों की ब्रीड किसी भी शासन व्यवस्था की आंख की किरकिरी बन सकती हैं। सत्ता ऐसे लोगों से डरे। तो यह समझ आता है। किंतु ऐसे जिंदा लोगों के साथ-साथ ही मरे को भी मारने की बात गले से नीचे नहीं उतर पा रही है।read more  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10  ... Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति