होम कटौती
cm-nath-who-is-suffering-from-criticism-on-power-c

बिजली कटौती पर आलोचना झेल रहे सीएम नाथ ने कहा-खुफिया रिपोर्ट मेरे पास इसे खारिज मत करो

बैठक में मुख्यमंत्री ने बिजली सरप्लस है और कटौती भी हो रही है, यह बात समझ में नहीं आती है। कटौती को लेकर तमाम रिपोर्ट हमारे पास हैं, इसे खारिज मत करो। इस पर बिजली इंजीनियर और कर्मचारियों ने कहा कि सर, हम इंकार नहीं कर रहे हैं। स्टाफ की कमी है। कई समस्याएं हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि मांग और आपूर्ति आपस में समान क्यों नहीं दिख रही है। इस पर एक पदाधिकारी ने कहा कि 2010 में पूर्ववर्ती सरकार हम पर दबाव डालती थी कि मांग बढ़ाकर रखो, ताकि बिजली खरीद सकें। दरअसल, प्रदेश में उत्पादित बिजली और आपूर्ति में जो बड़ा अंतर था उसे निजी बिजली कंपनियों के साथ हुए करार और अन्य जगहों से खरीदकर पूरा किया जाता था। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि सरकार लगभग 15 हजार करोड़ रुपए की सबसिडी बिजली कंपनियों को देती है। इसके बाद भी घाटा बना हुआ है। आखिर यह राशि जाती कहां है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असंतोष है।  आगे पढ़ें

vayaral-adiyo-mein-sarakar-ko-badanam-karane-ke-li

वायरल आडियो में सरकार को बदनाम करने के लिए बिजली कटौती बढ़ाने के निर्देश

सूत्रों के मुताबिक सरकार को बिजली संकट को लेकर शुरूआत से ही यह आशंका है कि इसके पीछे किसी न किसी का हाथ है। दरअसल, बिजली सरप्लस है और एक-दो घटनाओं को छोड़कर प्राकृतिक तौर पर ऐसे कुछ नहीं हुआ, जिसकी वजह से बिजली गुल हो। इसके बावजूद शहर हो या कस्बा या फिर गांव, सब जगह हर दिन बिजली जा रही है। कुछ जगह घोषित तौर पर मेंटेनेंस के लिए शट डाउन लिया जा रहा है तो कुछ जगह फाल्ट या ट्रिपिंग को बिजली जाने की वजह बताया जा रहा है। इसी बीच सरकार के पास एक ऐसी फोन रिकार्डिंग पहुंची है, जिसमें दो व्यक्ति बिजली काटकर सरकार को बदनाम करने की बात कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

this-work-of-kamal-nath-is-the-work-of

कमलनाथ की ये सख्ती किस काम की.....

बिजली को लेकर कमलनाथ के अतीत को जो लोग जानते हैं, वे उनकी इसमें रूचि को भी समझते ही होंगे। खासकर उर्जा विभाग से जुड़े अफसर तो जरूर जानते ही होंगे। दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रीत्व काल में कमलनाथ के खास हूकुम सिंह कराड़ा लंबे समय तक बिजली विभाग से संबंधित रहे थे। तो सरकारी कामकाज की एक विशिष्टि शैली यह भी होती है कि पहले समस्या पैदा करों और फिर उसे दूर करने के लिए भरपूर पैसा खर्च करों। अब कांग्रेस के कुछ राजनेताओं के बिजली के ट्रांसफार्मर, केबल या अन्य उपकरण बनाने के कारखाने हैं तो ऐसा होना लाजिमी भी है। समस्या का एक कारण यह भी है कि लोकसभा चुनाव के दौरान बिजली अफसरों को निर्देश थे कि बिजली किसी भी कीमत पर नहीं जानी चाहिए,भले ही इसके लिए मेंटेनेंस को टाला जाए। अब अगर गर्मियों पर लाइनों पर लोड़ बढ़ रहा है तो बिजली ट्रेप होगी ही।  आगे पढ़ें

as-soon-as-shivraj-got-the-light-asked-in-the-elec

शिवराज ने चुनावी सभा में जैसे ही पूछा लाइट मिलती है क्या उसी समय बत्ती हो गई गुल, मंगाना पड़ा जनरेटर

शिवराज सिंह ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तथा लोगों से हाथ खड़े कर पीएम मोदी को दोबारा से काबिज करवाने के लिए वोट देने का संकल्प भी लोगों को दिलवाया। उन्होंने कहा कि हमने किसान हो चाहे मजदूर सभी की चिंता की थी। किसानों को कभी भावांतर तो कभी सूखा, कभी बोनस तो कभी बीमा राशि देकर कुछ न कुछ देने का बहाना ढूंढ़ा। देते वक्त कभी राशि की कमी आड़े नहीं आने दी। दूसरी ओर कमलनाथ सरकार है जो कभी खजाने की कमी तो कभी समय का अभाव बताकर न देने के कारण ही खोजती रहती है। इस सरकार ने मजदूरों के घर में बच्चे के जन्म के दौरान लड्डुओं के लिए दी जाने वाली राशि हो या फिर मृत्यु के वक्त कफन के लिए दी जाने वाली अंत्योष्टि सहायता सभी को छीन लिया है।  आगे पढ़ें

bjp-led-by-former-chief-minister-shivraj-singh-lan

बिजली कटौती के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने निकाली लालटेन यात्रा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में बिजली संकट की स्थिति यह थी कि ग्रामीण इलाकों में कई घंटों तक बिजली नहीं आती थी। भाजपा द्वारा दिग्विजय सिंह पर "मिस्टर बंटाधार" का आरोप लगाने में भी बिजली कटौती को एक बड़ा कारण माना जाता रहा है। राजधानी में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा आज निकाली गई लालटेन यात्रा नए इस विवाद को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।  आगे पढ़ें

cm-overhauled-company-officials-on-power-cut-said-

बिजली कटौती पर सीएम ने कंपनी के अधिकारियों को घेरा, बताया षड्यंत्र

भोपाल लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की सुरक्षा बढ़ाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई घटना हम नहीं चाहते कि जहां सुरक्षा की कमी के आरोप लगाए जाएं। प्रज्ञा को काले झंडे दिखाए जाने की घटना पर मुख्यमंत्री नाथ ने कहा कि देश-प्रदेश और भोपाल की जनता बहुत समझदार है। सब सच्चाई जानते हैं। मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं की बयानबाजी पर कहा कि भाजपा किस तरह की राजनीति करना चाहती है, यह उनकी सोच और रणनीति है। उन्होंने कहा कि मगर जनता समझदार है और वो उनकी बातों में नहीं आने वाली है। वो सब समझती है।  आगे पढ़ें

nath-government-strict-conspiratorial-list-ready-f

आघोषित बिजली कटौती पर नाथ सरकार सख्त, षड्यंत्र रचने वालों की लिस्ट तैयार

सफाई में कहा गया कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं है, लेकिन यह कोई षड्यंत्र है। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने यहां तक कह दिया कि भाजपा के साथ मिलकर अधिकारी षड्यंत्र रच रहे हैं। भाजपा चुनाव में कटौती को मुद्दा बनाना चाहती है। इसके बाद सरकार ने प्रदेश में इंटेलीजेंस के माध्यम से उन अधिकारियों की तलाश की, जो भाजपा से जुड़े रहे हैं। 22 जिलों के अधिकारी व लाइनमैनों की सूची तैयार कर शासन को भेजी गई है। ग्वालियर में दो अधिकारियों के संबंध पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से बताए गए हैं। इसके अलावा और जानकारी खंगाली जा रही है।  आगे पढ़ें

shivrajs-string-on-power-cuts-if-the-situation-is-

बिजली कटौती पर शिवराज का तंज, अगर स्थिति नहीं संभल रही तो मंत्रियों को कुर्सी से हट जाना चाहिए

रविवार को मीडिया से चर्चा के दौरान शिवराज सिंह ने कहा कि यहां के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी संभवत हार से बौखलाए हुए है। एक कहावत प्रचलित है नाच ना जाने आंगन टेढ़ा। संभालना आ नहीं रहा, स्थिति संभल नहीं रही और कर्मचारियों पर लट्ठ चला रहे है। आउटसोर्स वालों को देख लेंगें , सारे के सारो को निकाल देंगें। सस्पेंड कर देंगे, नौकरी से बर्खास्त कर देंगें। यह आतंकित करने की राजनीति है। शिवराज यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा यहां यह सरकार कर रही है। अगर नियंत्रण नहीं है तो किसलिए कुर्सी पर बैठे हो। शर्म आनी चाहिए ऐसे मंत्रियों को जो कह रहे है कि बीजेपी षड़यत्र कर रही है।  आगे पढ़ें

state-government-cm-resentful-of-power-cuts-resent

बिजली कटौती से घबराई प्रदेश सरकार, सीएम ने दिखाई नाराजगी, विभागीय अफसरों से मांगा जवाब

चंबल-ग्वालियर के चार जिले श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, दतिया में तो 15 घंटे तक बिजली काटी गई। बिजली कंपनियों का मानना है कि ग्वालियर जिले में 1 लाख 48 हजार मीटर खराब हैं, जिनसे रीडिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे हालात में बिजली कटौती के अलावा कंपनी के पास कोई विकल्प नहीं है। इधर, अपर मुख्य सचिव आईसीपी केसरी ने मंगलवार को सभी जिलों के अधीक्षण यंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी की है।  आगे पढ़ें

khushakhabari-rbi-ne-ghataya-repo-ret-homalon-ho-s

खुशखबरी: आरबीआई ने घटाया रेपो रेट, होमलोन हो सकता हे सस्ता

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट में 0.25% कटौती का फैसला किया। इसके साथ ही, अब रेपो रेट 6.50% से घटकर 6.25% हो गया। एमपीसी के छह में से चार सदस्योंं ने रेपो रेट में कटौती का समर्थन किया जबकि दो अन्य सदस्यों, विरल आचार्य और चेतन घाटे रेट कट के पक्ष में नहीं थे। बहरहाल, नई मौद्रिक नीति के तहत रिवर्स रीपो रेट घटकर 6 प्रतिशत जबकि बैंक रेट 6.50 प्रतिशत पर आ गया है। एमपीसी ने उम्मीद के मुताबिक नीतिगत रुख को 'नपी-तुली कठोरता' बरतने को बदल कर 'तटस्थ' कर दिया।  आगे पढ़ें

Previous 1 2 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति