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एक खुला खत शिवराज सिंह चौहान के नाम

आप अपने दल और उसके मुख्य संगठन की नस-नस जानते हैं। इसलिए कोई मुगालता आपको नहीं होगा। दरअसल, हुआ केवल यह है कि जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, वहां आपका चेहरा आज भी कारगर साबित हो सकता है। जिनकी सरकार आपके कहे अनुसार अपने ही बोझ से गिरी उन कमलनाथ ने इस सवा में जनता में खुद यह माहौल बना दिया कि इससे तो अच्छा शिव राज ही था। हुआ यह भी है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने के बाद भाजपा इसलिए नरेंद्र सिंह तोमर को आगे नहीं ला सकती, क्योंकि उस पर ग्वालियर-चंबल संभाग के मुकाबले शेष प्रदेश की उपेक्षा करने का आरोप लग जाएगा। वीडी शर्मा भी तो वहीं से है और नरोत्तम मिश्रा भी। गणित आपके पक्ष में है। राजनीति में मेहनत के साथ किस्मत की महत्वपूर्ण योगदान है। अब किस्मत आपके साथ है। इसलिए कहता हूं कि फिसलन से भरी इस राह पर संभल कर चलिए। गलत सलाहकार और अफसर, दोनों से परहेज करें। ध्यान रखें कि समय यदि मार्च, 2020 की तरह करवट ले सकता है तो फिर वह घूम-फिरकर दिसंबर, 2018 जैसे अतीत को भी दोहराने में पूरी तरह सक्षम है। read more  आगे पढ़ें

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भाजपा संगठन को सत्ता से ऊपर मानती है, मध्यप्रदेश को संगठन का राज्य माना जाता है: उमा भारती

उमा भारती ने कहा, नए प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को 25 साल से जानती हूं। वह एक कुशल संगठक है। इससे हमारी पार्टी नई ऊंचाइयों को हासिल करेगी। उमा भारती ने कहा कि राज्य की कांग्रेस द्वारा जनता से किए गए वादे पूरे कराना हमारे लिये एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से प्रदेश अध्यक्ष शर्मा सक्षम नेता हैं। उन्होंने कहा कि हम सत्ता से बाहर हैं तो क्या हुआ हम कांग्रेस सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे कि वह जनता से किए गए वादे पूरे करे।  आगे पढ़ें

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राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर उमा भारतीय ने कहा-यह गर्व और खुशी का दिन, बोलीं- हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर कहा कि ये बेहद गर्व और खुशी का दिन है। हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं। अब मुझसे और आडवाणी जी से जुड़े 2 ट्रायल के लिए हम तैयार हैं। हम जो कर सकते हैं, करेंगे। मैंने शुरू से ही यह कहा है कि हम इसके लिए फांसी पर चढ़ने को भी तैयार हैं।  आगे पढ़ें

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गिरगिट माफ करें मुझे

उमा भारती ने दैनिक वेतन भोगियों के लिए जो जंग शुरू की, वह उस भाजपा के हित में थी, जो उस समय दिग्विजय के येन-केन-प्रकारेण हासिल प्रभाव (उस समय के लिहाज से आतंक भी कह सकते हैं) से निपटने का बहुत बड़ा जरिया साबित हो सकता था। राघौगढ़ के राजा के लिए तब यह सर्वविदित था कि मध्यप्रदेश के लिहाज से उनका पंजा जब चाहे तब कमल को मर्जी के अनुरूप खिलने या मुर्झाने के लिए विवश कर सकते हैं। दिग्विजय, दिग्विजयी थे। लेकिन क्या ऐसा हुआ कि कमलनाथ भी ऐसे शक्तिशाली हो गये कि कमल की पंखुडियां इस कल्पना मात्र से कुम्हलाने लगीं कि उनके किसी विधायक के खिलाफ भी बात गयी तो यह गुनाहे-अजीम हो जाएगा? क्या गलती थी प्रज्ञा की? यह कि उन्होंने खुद को नैना साहनी के अंजाम के तौर पर परिवर्तित करने की वहशी इच्छा रखने वाले के खिलाफ पुलिस से संरक्षण मांगा? जिंदा जलाने की बात कहते समय दांगी दम्भ से भरे हुए थे। सत्ता का नशा उनके सिर चढकर बोल रहा था। मीडिया ने उनके होश हिरण किए तो किसी लोमड़ी की तरह पैतरा बदलकर वह माफी मांगने लगे। गलती स्वीकारना अच्छी बात है, लेकिन गलती यदि अपराध के स्तर की हो तो फिर यह तय है कि मामला कानून वाला हो जाता है। यकीनन ऐसे हालात में साध्वी प्रज्ञा को पूरा हक था कि वह कानून की मदद लेतीं।  आगे पढ़ें

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नरोत्तम के बचाव में आए राकेश सिंह, बोले- जानबूझकर परेशान कर रही है सरकार

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान के बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह भी पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बचाव में उतर आए। सिंह ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मध्य प्रदेश की कांग्रेस की सरकार कैसी भी जांच करे, हमें कोई परेशानी नहीं है। हमने पहले ही कहा है कि जांच से भाजपा को कोई डर नहीं है पर नरोत्तम मिश्रा को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।  आगे पढ़ें

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महाकाल दर्शन के लिए गई उमा के ड्रेसकोड पर हुआ विवाद, कहा- पुजारी बहन समझकर उपहार में दे देते साड़ी

उमा ने ड्रेस कोड होने की जानकारी नहीं होने की बात पुजारियों से कही। हालांकि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा - मुझे पुजारियों द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड पर कोई आपत्ति नहीं है, मैं अगली बार दर्शन के लिए आऊंगी तो मैं साड़ी पहनकर आऊंगी। उन्होंने ट्वीट कर कहा- मुझे साड़ी पहनना बहुत पसंद है तथा मुझे और खुशी होगी यदि पुजारीगण मुझे अपनी बहन समझकर मंदिर प्रवेश के पहले साड़ी भेंट कर दें। मैं बहुत सम्मानित अनुभव करूंगी।  आगे पढ़ें

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खजुराहो लोकसभा सीट: 1957 से लेकर अब तक कांग्रेस ने 5 तो भाजपा ने दर्ज की जीत

वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद से खजुराहो लोकसभा सीट के इलाके में परिवर्तन हो गया। वर्ष 2009 के चुनाव में इस सीट में छतरपुर जिले के चंदला, राजनगर विधानसभा, पन्नाा जिले के पवई, गुनौर, पन्नाा और कटनी जिले के विजयराघवगढ़, मुड़वारा, बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के इलाकों को शामिल किया गया।  आगे पढ़ें

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संघ के समझाइश के बाद साध्वी प्रज्ञा प्रति नरम हुईं उमा भारती, अब भोपाल में करेंगी प्रचार

भोपाल में एबीवीपी नेता राजकुमार भाटिया ने भाजपा नेताओं से इस बात की चर्चा भी की कि एबीवीपी और संघ के नेताओं को कहां-कहां तैनात करना है और उनका क्या उपयोग करना है। गौरतलब है कि सोमवार को हुए मतदान के बाद भारी संख्या में संघ और एबीवीपी के कार्यकर्ता भोपाल आ रहे हैं। लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह से भी उन्होंने इस बारे में बातचीत की है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कार्यकतार्ओं की तैनाती पर भी भाटिया ने बातचीत की।  आगे पढ़ें

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कतई मूर्ख नहीं हैं साध्वी उमा

तो साहब घोषित-अघोषित बोधिसत्व का यह क्रम वर्तमान तक बरकरार है। साध्वी उमा भारती को आत्मबोध हुआ है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के मुकाबले वह मूर्ख हैं। प्रज्ञा की तुलना में वह खुद बेहद साधारण हैं। उमा के ज्ञान चक्षु उस समय खुले हैं, जब उन्हें विवश होकर चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान करना पड़ गया। सच कहें तो इस विवशतानुमा इस निर्णय की पटकथा उस दिन ही लिख दी गयी थी, जब भारती से गंगा संरक्षण मंत्रालय छीन लिया गया था। खांटी हिंदूवादी नेत्री ने इस निर्णय की कठोरता को मोदी मेरे मोटापे को लेकर नाराजगी जताते हैं वाली आत्मीयता से ढंकने का जतन किया। लेकिन मोदी ने हाल ही में गंगा की सफाई न हो पाने को लेकर अपने ही दल यानी उमा भारती की नाकामी की बात स्वीकार कर सारा मामला फिर उघाड़कर सामने रख दिया है। यह समीक्षा तो की ही जा सकती है कि उनके और प्रज्ञा के कद में वाकई कितना अंतर है। क्योंकि भाजपा की ओर से विधायक से लेकर सांसद, केंद्र में मंत्री और मुख्यमंत्री पद तक हासिल कर चुकी किसी नेत्री द्वारा राजनीति की पहली सीढ़ी पर कदम जमाने की कोशिश कर रही प्रज्ञा के लिए ऐसी बातें करना चौंकाता है। एक अखबार ने उमा के इस कथन को कटाक्ष कहा है। कोई इसे प्रज्ञा की आड़ में भाजपा से नाराजगी का प्रतीक बता रहा है। सच जो भी हो, मामला बेहद अजीब है।  आगे पढ़ें

शिवराज और उमा की ना के बाद प्रज्ञा सिंह को मिला भोपाल से टिकट

भोपाल सीट पर शिवराज सिंह और उमा भारती के इंकार के बाद एक मात्र विकल्प प्रज्ञा सिंह ही थी। मौजूदा सांसद आलोक संजर और भोपाल महापौर आलोक शर्मा का नाम भी आरंभ में चर्चाओं में आया था वहीं विष्णुदत्त शर्मा का नाम भी सुर्खियों में रहा था। प्रज्ञा सिंह को जहां प्रखर प्रवक्ता के तौर पर जाना जाता है वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी उनकी खासी पकड़ है। साधारण, सहज व सरल छवि वाली प्रज्ञा सिंह पार्टी का हिन्दुत्व चेहरा हैं। उनकी स्थानीय नेताओं में भी पकड़ है। यह बात और है कि इस चुनाव के जरिए उनका सक्रिय राजनीति में पहली बार प्रवेश होगा। जाहिर है चुनाव प्रबंधन की कमी के साथ इससे पहले वे मतदाताओं के बीच नहीं रहीं हैं और उनके पास राजनैतिक अनुभव भी नहीं हैं। वहीं अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कमजोर पकड़ रहने की बात भी कही जा रही है।  आगे पढ़ें

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