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सिंघार के आरोप लगाने के 5 दिन बाद सामने आए दिग्गी, कहा- अनुशासन में रहें नेता, भाजपा को न दें मौका

भोपाल में मीडिया से बातचीत में सिंह ने मंत्री उमंग सिंघार पर कार्रवाई के जवाब में कहा कि अब इस मामले में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया जी निर्णय लेंगे। क्या आप सिंघार के आरोपों से आहत हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे राजनीति में 50 साल हो गए। ऐसे आरोपों से आहत होने का सवाल ही नहीं। भाजपा मेरे खिलाफ 15 साल प्रकरण ढूंढती रही, लेकिन कुछ नहीं कर पाई।  आगे पढ़ें

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प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया मिले सोनिया गांधी, प्रदेश के घटनाक्रम की सौंपी रिपोर्ट

मध्यप्रदेश के ताजा घटनाक्रम (दिग्विजय-उमंग सिंघार विवाद), नए प्रदेश अध्यक्ष और संगठन में बदलाव को लेकर प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने शुक्रवार को नईदिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को रिपोर्ट सौंप दी है। सिंघार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर लगाए गए आरोपों से आलाकमान ने नाराजगी जताई है। रिपोर्ट में नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति और संगठन में बदलाव का भी जिक्र है। इस सब के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सोनिया से मुलाकात कर रहे हैं।  आगे पढ़ें

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कांटे से कांटा निकालने का खेल

सियासी वन में तब्दील हो चुके प्रदेश में सिंघार किसी युवा शेर की तरह दहाड़ रहे हैं तो सिंह इसी प्रजाति के बुजुर्ग की भांति पूरी शांति के साथ बैठे हैं। लेकिन उनकी निगाह सिंघार से हट नहं रही। ठीक उसी तरह, जिस तरह जंगल में आखेट के समय शेर अपने शिकार से नजर नहीं हटाता है। चुपचाप उसकी ओर सरक कर उसे निशाना बना लेता है। शिकार बनने और करने, दोनो मामलों में सिंघार का बायोडाटा अभी खाली है। दिग्विजय सिंह ने आज कहा कि पचास सालों में वे बहुत से हमले देख चुके हैं। जाहिर है, कमलनाथ और कांग्रेस की सरकार को ये तलवार की नोक वाला बहुमत नहीं मिला होता तो शायद फिर उमंग को जवानी की उमंग और बुजुर्गीयत के धैर्य का अंतर पता चलता। इधर, अच्छे-अच्छों को सियासी निवाला बनाने के दृष्टिकोण से सिंह की कर्म कुंडली तमाम प्रहसनों से रंगी हुई है। इसलिए यह तय है कि दोनो पक्षों के बीच सफेद रुमाल लहराये जाने की संभावना फिलहाल नहीं है। जीत और हार का फैसला समय ही करेगा। तब तक यह घमासान देखना बेहद रोचक एवं यादगार अनुभव बन जाना तय है।  आगे पढ़ें

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वन मंत्री ने अपने इरादों को किया जाहिर, अब सिंघार ने दिग्गी को मिलने का दिया समय

कमलनाथ सरकार के मंत्रियों को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा पत्र भेजकर समय मांगने के जिस मुद्दे पर कांग्रेस की अंदरुनी सियासत गरमाई थी, उसके लिए अब वन मंत्री उमंग सिंघार ने सिंह को समय दे दिया है। शुक्रवार को सुबह दस से मध्यान्ह 12 बजे तक के लिए समय आरक्षित किया गया है। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने मंत्री को छह या आठ से 10 सितंबर के लिए अपनी उपलब्धता बताई थी और समय देने का आग्रह किया था।  आगे पढ़ें

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न थकने वाले ऐसे करामाती

उस सरकार की सोचिए, जिसके हिस्से ही यह शोर मचा रहे हों कि इसके तमाम लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। मध्यप्रदेश ने ऐसे बदलाव वाले वक्त की कभी भी कामना नहीं की थी। क्योंकि मामला वक्त के बदलाव का नहीं, बल्कि बदला लेने वाले वक्त में तब्दील होकर रह गया है। यह सब देखकर जनता पार्टी की उस सरकार का कार्यकाल और हश्र याद आ गया, जो अंतत: अपने नेताओं के आपसी घमासान में ही खत्म हो गयी थी। ऐसा उदाहरण सामने होने के बावजूद राज्य की सरकार एवं कांगे्रस संगठन गुटाधीशों के हाथ का खिलौना बनकर रह गये हैं। क्या यह स्थिति उस समय किसी भी लिहाज से ठीक कही जा सकती है, जब प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव तेजी से नजदीक आते जा रहे हैं। सरकार बनने के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद निकाय चुनाव ही कमलनाथ की इज्जत और राज्य में पार्टी की ताकत में कुछ इजाफा कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल जो चल रहा है, उसे देखते हुए यह आशंका जतायी जा सकती है कि यहां भी मामला लोकसभा चुनाव जैसा ही हो सकता है।  आगे पढ़ें

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दिग्गी के खिलाफ उठी को आवाज को शांत करने सामने आए सीएम, कहा- उनके अनुभवों का लाभ लेने ली जाती है सलाह

दिग्विजय पर कमलनाथ सरकार के वन मंत्री उमंग सिंघार ने परदे के पीछे से सरकार चलाने समेत अनेक गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सिंह को शैडो सीएम तक कहा। इससे भाजपा को भी दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुखर होने का मौका मिल गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा द्वारा जारी बयान में कमलनाथ ने कहा कि दिग्विजय सिंह प्रदेश के 10 वर्ष मुख्यमंत्री रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे हैं। उनके अनुभव का लाभ प्रदेश हित में लेने के लिए उनसे भी वह समय-समय पर सलाह-मशविरा करते रहते हैं। नाथ ने कहा कि अकेले सिंह से नहीं, वे तमाम पूर्व मुख्यमंत्रियों व पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से भी सलाह-मशविरा करते रहते हैं।  आगे पढ़ें

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मप्र में सियासी घमासान के बीच सिंधिया ने सिंघार का किया समर्थन, कहा- सीएम को उमंग की बात सुनना चाहिए

सिंधिया दो दिवसीय प्रवास पर ग्वालियर में हैं। वह बुधवार को शहर के मेला क्षेत्र में अनुसूचित जाति सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। सिंधिया ने यह भी कहा कि प्रदेश में 15 साल बाद बड़ी मुश्किल से सरकार बनी है और अभी छह महीने भी नहीं हुए हैं। विकास और प्रगति को लेकर सरकार से लोगों को आशाएं और अभिलाषाएं हैं। कमलनाथ जी को उमंग सिंघार जी की बात को सुनना चाहिए और जो मुद्दे उठाए हैं, वह भी समझना जरूरी है। आरोप गंभीर हैं, इनकी जांच भी होना चाहिए।  आगे पढ़ें

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सिंघार के बाद सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों ने दिग्गी पर बोला हमला, कहा- किसी को भी सरकार में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं

उमंग सिंघार के आरोपों को दो मंत्रियों ने भी आगे बढ़ा दिया है। इस मामले में फिलहाल दिग्विजय सिंह की ओर से कोई कमेंट सामने नहीं आया है। इधर, अंबाह से विधायक कमलेश जाटव और गोहद से विधायक रणवीर जाटव ने स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट पर गंभीर आरोप लगाते हुआ कहा है कि उनके बेटे बंकिम नर्सों के ट्रांसफर में पैसे ले रहे हैं। सिंधिया गुट में भी खींचतान- रणवीर जाटव बोले- मंत्री सिलावट का बेटा हर काम के पैसे मांगता है, ऐसा ही होता रहा तो जल्द ही भाजपा में चला जाऊंगा स्वास्थ्य मंत्री सिलावट को सिंधिया समर्थक माना जाता है। अंबाह से कांग्रेस विधायक कमलेश जाटव और गोहद से विधायक रणवीर जाटव भी सिंधिया गुट से ही हैं। दोनों ने मंत्री सिलावट पर ट्रांसफर में लेन-देन के आरोप लगाए हैं।  आगे पढ़ें

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अपनी ही सरकार में मंत्री जी की नहीं हो रही सुनवाई, आईएफएस अफसर ने फोन पर की बदसलूकी

मंत्री शर्मा होशंगाबाद के प्रभारी हैं। इस नाते उन्होंने 5 फरवरी 2019 को वनपाल सुरेंद्र कुमार पटेल के तबादले की अनुशंसा की थी। यह तबादला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर एसके सिंह को करना था। जब पटेल मंत्री की अनुशंसा के साथ आफिस पहुंचे, तो डायरेक्टर ने उनके इस कृत्य पर नाराजगी जताते हुए उन्हें सिविल सेवा नियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यह बात मंत्री शर्मा तक पहुंची, तो मंत्री ने डायरेक्टर सिंह से फोन पर बात की। मंत्री का आरोप है कि इस दौरान डायरेक्टर सिंह ने उनसे बदसलूकी की है। डायरेक्टर से नाराज मंत्री शर्मा ने जून 2019 में मामले की शिकायत वनमंत्री उमंग सिंघार से की। शर्मा ने बाकायदा नोटशीट लिखकर अपनी नाराजगी का इजहार किया।  आगे पढ़ें

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सियासत: मंत्री और विधायक की धमकी के बाद सीएम के निर्देश पर विवादित आबकारी अफसर को हटाया

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और वन मंत्री उमंग सिंघार के बीच चल रहे हाईवोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामे के बीच वायरल हुए एक आॅडियो से सियासत तेज हो गई। वन मंत्री उमंग सिंघार, विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और हीरालाल अलावा ने मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास पहुंचकर धमकी दे दी कि कथित आडियो में जो सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे शराब ठेकेदारों से 20 या 15 लाख रुपए लेन-देन की बात कह रहा है, उसे संरक्षण मिला हुआ है।  आगे पढ़ें

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