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शांत पंजाधारी कमलनाथ...शांत

हनी ट्रैप मामले पर कुंभकर्णी नींद से जागकर मुख्यमंत्री ने जिस स्वरूप का परिचय दिया है, उस पर प्रतिक्रिया के लिए न तो पर्याप्त शब्द मिल पा रहे हैं और न ही सही मनोभाव। छिंदवाड़ा, दिल्ली दरबार के बाद अब भोपाल स्थित मंत्रालय नाथ की राजनीतिक परिक्रमा का तीसरा पड़ाव बन चुका है। यहां अपने चैंबर में बैठे-बैठे नाथ पूरे प्रदेश की स्थिति पर तीखी नजर होने का भ्रम जीवित रखे हुए हैं। ठीक वैसे ही, जैसे राग दरबारी उपन्यास में शिवपालगंज की निकम्मी पुलिस को लेकर गलतफहमी थी। पूरी तरह साधन तथा क्षमता-विहीन उस पुलिस से आशा की जाती थी कि आसपास के ढाई से तीन सौ गांवों की हर हलचल पर उसकी नजर है। उसकी क्षमता इतनी कि अपराध होने के बाद तो दूर, वह ऐसा होने से पहले ही घटना स्थल तक पहुंच जाएगी।  आगे पढ़ें

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सोम के ठेकों पर संकट, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा, काली सूची में हो तो ठेकों का नवीकरण कैसे हुआ?

शराब निर्माता और विक्रेता कंपनी सोम समूह की शराब दुकानों को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि जब इस समूह पर करोड़ों का राजस्व बकाया है, यह विभाग की काली सूची में दर्ज है तो फिर इसकी शराब दुकानों का नवीनीकरण कैसे हो गया? एक्टिंग चीफ जस्टिस आर एस झा और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने आबकारी आयुक्त, कलेक्टर धार और सोम डिस्टलरी को नोटिस जारी कर इसका जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इसके लिए 20 अगस्त तक का समय दिया है।read more  आगे पढ़ें

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