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मुख्यमंत्री ने वनाधिकार-पत्रों का किया वितरण, कहा- विकास के अवसर बराबरी से पाना आदिवासियों का अधिकार, आदिवासी विकास का बढ़ा बजट

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उन्होंने बचपन से ही आदिवासी भाई-बहनों की पीड़ा और संघर्ष को देखा है। उनकी स्थिति में सुधार के लिये मन में बचपन से ही तड़प रही है। हमने हमेशा सुनिश्चित किया कि प्रदेश के आदिवासी भाई-बहनों का कभी कोई नुकसान न हो। उनके मान-सम्मान से कोई समझोता न हों। हमारी यह विचारधारा है कि जो समाज में सबसे नीचे है,सबसे गरीब है,वही हमारा भगवान है और उसे आगे लाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।  आगे पढ़ें

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मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों से की चर्चा, कहा-आपकी जिंदगी में खुशियां आएं, यह हमारे जीवन का लक्ष्य है

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार आदिवासी भाई-बहनों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य का रही है। एक ओर जहां तेंदूपत्ता संग्रहण, लघु वनोपज संग्रहण आदि के माध्यम से उन्हें वनोपजों का अच्छा लाभ दिलाया जा रहा है, वहीं उचित मूल्य राशन, संबल योजना आदि के माध्यम से उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं तथा प्रदेश के सभी अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में उन्हें साहूकारों के चंगुल से मुक्त करने के लिए अवैध रूप से दिए गए ऋण को शून्य कर दिया गया है।  आगे पढ़ें

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अधिकारी माइंडसेट बना लें, गरीब के अधिकार को मैं छिनने नहीं दूंगा, कोई पात्र आदिवासी पट्टे से न रहे वंचित

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अधिकारी माइंडंसेट बना लें, गरीब के अधिकारों को मैं छिनने नहीं दूंगा। कलेक्टर एवं वनमंडलधिकारी ध्यान से सुन लें, कोई भी आदिवासी जो 31 दिसम्बर 2005 को या उससे पहले से भूमि पर काबिज है, उसे अनिवार्य रूप से भूमि का पट्टा मिल जाए। कोई पात्र आदिवासी पट्टे से वंचित न रहे। काम में थोड़ी भी लापरवाही की, तो सख्त कार्रवाई होगी।  आगे पढ़ें

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वाकई अजीत थे जोगी

राज्यसभा के सदस्य से लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद तक जोगी ने फिर पलट कर नहीं देखा। हां, मध्यप्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री की आड़ में दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोशिशों में वह कामयाब नहीं हो सके, लेकिन यह कहना गलत होगा कि उनकी यह कोशिस फुस्स हो गई थी। बल्कि सच तो यह है कि जोगी की इन कोशिशों को काउंटर करने के लिए दिग्विजय सिंह को सारे पैंतरे अपनाने के लिए मजबूर हो जाना पड़ गया था। जिस शख्स ने राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अर्जुन सिंह को भी धता बता दी, उसे ही जोगी के विरुद्ध दांतों तले पसीना बहाने के लिए विवश होना पड़ गया था। और जोगी की कामयाबी यह कि इतना सब होने के बाद भी दिग्विजय सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी राह का रोड़ा नहीं बन सके। read more  आगे पढ़ें

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कमलनाथ ने माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना का किया शिलान्यास, कहा- आदिवासी समाज के साथ मिलकर लिखेंगे विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने धार जिले के विकासखण्ड डही में 1085 करोड़ 20 लाख रुपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना का शिलान्यास करते हुए कहा कि यह योजना आदिवासी समाज के नायक टंट्या भील के नाम से जानी जाएगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सहज, सरल और मेहनतकश है। इस समाज को वर्षों तक छला गया है किन्तु अब ऐसा नहीं होगा। कमल नाथ ने कहा कि आदिवासी समाज के साथ मिलकर हम सब प्रदेश में विकास का नया अध्याय लिखेंगे। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि हम विरासत में मिली प्रदेश की बिगड़ी अर्थ-व्यवस्था को सुव्यवस्था में बदलने के लिये कृत-संकल्पित हैं।  आगे पढ़ें

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शबरी जयंती पर कमलनाथ ने कहा- आदिवासी क्षेत्रों में पलायन रोकने और रोजगार देने बनेगी सुनियोजित योजना

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि आदिवासी इलाकों के विकास के लिए जो योजनाएं बनी थीं और वर्षों से धूल खा रहीं हैं, ऐसी योजनाओं को लागू कर आदिवासी भाईयों तक उनका लाभ पहुँचाया जाएगा। कमल नाथ ने यह बात बरगी बाँध निर्माण के समय डिण्डौरी जिले को भी नर्मदा नदी का लाभ देने की योजना के संदर्भ में कही। यह योजना दस हजार करोड़ लागत की है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की शान आदिवासी समाज का सर्वांगीण विकास हो। उन्हें काम की तलाश में बाहर ना जाने पड़े। घर में, गाँव में ही, उनके पास रोजगार हो, सरकार इसके लिए प्रयासरत है।  आगे पढ़ें

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जनसंख्या के आधार पर बजट आवंटन करने की तैयारी में कमलनाथ सरकार, विधानसभा में पेश हेगा एक्ट

आदिवासी उपयोजना की राशि अनिवार्यत: खर्च करने और जनसंख्या के आधार पर बजट का आवंटन करने संबंधी एक्ट विधानसभा में लाया जाएगा। कमल नाथ ने यह जानकारी मंत्रालय में हुई मध्यप्रदेश आदिम जाति मंत्रणा परिषद की बैठक में दी। बैठक में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 में संशोधन पर परिषद के सदस्यों ने सर्व-सम्मति से अपनी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में आदिम जाति कल्याण मंत्री ओंकार सिंह मरकाम, गृह मंत्री बाला बच्चन एवं परिषद के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में परिषद सदस्यों ने आदिवासी बहुल विकासखण्डों की आँगनवाड़ियों के बच्चों को अण्डा देने के लिये राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत और समर्थन किया।  आगे पढ़ें

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विरोध के बावजूद खरगोन के आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासन ने आंगनवाड़ियों में अंडा देना किया शुरू

आंगनबाड़ियों में अंडा देने के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच बवाल मचा हुआ है। दूसरी ओर खरगोन के आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासन ने पालकों की सहमति लेकर अंडा देना शुरू कर दिया है। झिरन्या, भीकनगांव, भगवानपुरा व सेगांव इलाके में पिछले एक सप्ताह से अंडा दिया जा रहा है, जबकि जिला मुख्यालय, बड़वाह, सनावद, महेश्वर, कसरावद में विरोध व दबाव के चलते इसकी शुरूआत नहीं हो पाई है। प्रशासन के मुताबिक महिला बाल विकास विभाग से इसका आदेश जारी हुआ है, जबकि उच्च स्तर पर विभागीय अधिकारी आदेश न जारी होने की बात कह रहे हैं।  आगे पढ़ें

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आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध, कलेक्टर भी नहीं दे सकते अनुमति: कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने संबंधी जो भ्रम और अफवाह फैलायी जा रही है, वह सरासर गलत है। राज्य शासन ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। प्रदेश में आज भी आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है। आदिवासियों के सभी हितों का संरक्षण करने के लिए सरकार कटिबद्ध है।  आगे पढ़ें

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पीएम मोदी ने मन की बात में केरल के जिस आदिवासी दंपत्ति की प्रशंसा की, उसे समाज ने किया बहिष्कृत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में केरल के जिस आदिवासी बुजुर्ग दंपती की प्रशंसा की थी, उसे उसके समुदाय ने समाज से बहिष्कृत कर दिया है। इस दंपती पर आरोप था कि इसने एक ऐसी पुस्तक लिखने में मदद की जिससे उस समुदाय की छवि को धूमिल हुई। इस महीने की शुरूआत में गांव की बैठक ओरुकोट्टम ने पीवी चिन्नाथम्पी (77) और मणियम्मा (62) को एडमालकुट्टी गांव से बाहर जाने का आदेश सुनाया था। विवाद लेखक पीके मुरलीधरन की किताब एडमालकुड्डी: ओरुम, पोरुलुम को लेकर हुआ, जो उन्होंने 2014 में लिखी थी। चिन्नाथम्पी ने इस किताब को लिखने में मुरलीधरन की मदद की थी।  आगे पढ़ें

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