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एमक्यूएम के निर्वासित नेता हुसैन लंदन में गिरफ्तार, राष्ट्र विरोधी भाषण देने का है आरोप

हुसैन (65 साल) ने 1990 के दशक में शरण दिए जाने का अनुरोध किया था और बाद में उन्हें ब्रिटेन की नागरिकता प्रदान की गई थी। हुसैन की अब भी पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची औैर पार्टी पर पकड़ बरकरार है। उनकी गिरफ्तारी के बाद कराची के पुलिस प्रमुख अमीर अहमद शेख ने नगर में दंगा-रोधी दस्तों के साथ गश्त और सतर्कता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी किए।  आगे पढ़ें

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भारत के कड़े रुख से परेशान पाक पीएम ने पीएम मोदी से जताई बातचीत की इच्छा

पाक पीएम इमरान ने यह पत्र मीडिया में आई उस खबर के बाद लिखा है जिसमें कहा गया था कि एससीओ सम्मेलन के दौरान बिश्केक में पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुलाकात से भारत ने इन्कार कर दिया है। बिश्केक में मोदी और इमरान भाग लेने जाएंगे। शुक्रवार को ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को पत्र लिखकर सभी मसलों पर बातचीत की इच्छा का इजहार किया और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता जताई।  आगे पढ़ें

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बालाकोट के बाद पाकिस्तान सुधरा लेकिन डरा नहीं, क्या भारत पड़ोसी देश के होश ठिकाने लगा सकता है!

भारतीय तोपखाने के पास 90 किमी तक मार करने वाले स्मर्ज रॉकेट लॉन्चर भी हैं। इंडियन नेवी पिछले 10 वर्षों में आधुनिक जंगी जहाजों से लैस हुई है। नेवी के पास 2 न्यूक्लियर सबमरीन हैं, जबकि इस मामले में पाक का खाता तक नहीं खुला है। भारत के पास एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रमादित्य है। स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत आ रहा है। पाकिस्तान का स्कोर यहां भी जीरो है। इसी तरह हमारी वायु सेना सुखोई-30 जैसे जेट से लेस है। राफेल से मारक क्षमता और बढ़ जाएगी।  आगे पढ़ें

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बालाकोट पर बोले सेना प्रमुख, कहा- आतंकी घटनाओं को रोकने किया गया था हमला

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि फरवरी में किए बालाकोट हवाई हमले का मुख्य उद्देश यह सुनिश्चित करना था कि सीमा पार प्रशिक्षण पा रहे आतंकी भारत पर हमला करने के लिए जिंदा न बचें। जनरल रावत ने एझीमाला नेवल एकेडमी 264 प्रशिक्षु कैडिटों की पासिंग आउट परेड के बाद कश्मीर में आतंकवाद पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि विभिन्न सरकारी एजेंसियां सीमा पार आतंकवाद से अपने स्तर पर निपट रही हैं। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच अब एनआइए ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आतंकियों को मिलने वाली वित्तीय मदद के रास्ते बंद करना शुरू कर दिए हैं।  आगे पढ़ें

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साध्वी प्रज्ञाा ने दिगी से लिया भगवा आतंकवाद का बदला, तो उधर केपी यादव ने भी सिंधिया से हिसाब किया बराबर

वैसे तो देश की 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहा था लेकिन सभी की नजर भोपाल के चुनाव पर टिकी थी। इसकी वजह साफ थी कि यहां दो नेताओं या दो दलों के बीच लड़ाई नहीं हो रही थी बल्कि दो विचारधाराओं की लड़ाई थी। एक विचारधारा के केंद्र में हिंदुत्व था तो दूसरी तरफ हिंदुत्व की गलत व्याख्या करने पर दिग्विजय सिंह निशाने पर थे। पूरे चुनाव में मुद्दे गायब रहे,चर्चा सिर्फ इस बात की थी कि हिंदुत्व को जिंदा रखना है या उसकी खिलाफत करने वालों को जिताना है। दिग्विजय सिंह भी पूरे चुनाव में खुद को सबसे बड़ा हिंदू साबित करने में जुटे रहे। मंदिर-मंदिर घूमने के अलावा उन्होंने साधु-संतों का भी सहारा लिया। यज्ञ-हवन से लेकर एक-एक समाज की बैठकें ली, पर आरोपों को धो पाने में सफल नहीं हुए।  आगे पढ़ें

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विदेश मंत्री स्वराज जाएंगी विश्केक, एससीओ की दो दिवसीय बैठक में लेंगी हिस्सा

मंत्रालय ने कहा, भारत पिछले एक साल से अधिक समय से किर्गिज गणराज्य की अध्यक्षता में संपन्न एससीओ के विभिन्न वार्ता व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी करता रहा है। आगे मंत्रालय ने कहा कि बिश्केक में सुषमा स्वराज एससीओ के विदेश मंत्रियों के साथ किर्गिज राष्ट्रपति सूरनबाय जीनबेकोव से संयुक्त मुलाकात भी करेंगी। पिछले माह रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिश्केक में एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था।  आगे पढ़ें

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आतंकवादी यासीन भटकल की बदली गई जेल, अब रहेगा अफजल वाली सेल में

बताया जाता है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भटकल की सेल बदली गई है। पहले इसे जेल नंबर-4 में कुछ और कैदियों के साथ रखा गया था लेकिन अब उसे जेल नंबर-3 में अफजल वाले सेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके सेल से चंद कदमों की दूरी पर फांसी का तख्ता भी है। इस हाई सिक्यॉरिटी वॉर्ड में 10 सेल हैं। इसमें से ब्लॉक-1 के सेल नंबर-1 में भटकल को शिफ्ट किया गया है। भटकल को 28 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया गया था। तिहाड़ जेल में उसे लंबे समय तक जेल नंबर-4 में रखा गया लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसके बारे में तेज हुई हलचलों को देखते हुए इसकी जेल को बदल दिया गया है।  आगे पढ़ें

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मणिशंकर अय्यर पर एक लघु शोध

वह मनोचिकित्सक आज भी सक्रिय हैं। कई बार मन होता है कि मणिशंकर अय्यर को उनके पास लेकर जाऊं। पता लगाऊं कि बेहद पढ़े-लिखे और ज्ञानी इस शख्स की समस्या क्या है। क्योंकि अय्यर के साथ कुछ तो भारी गलत हुआ है। वह पाकिस्तान के गुण गाते हैं। उस देश पर उन्हें इतना भरोसा है कि वहां की सरकार से नरेंद्र मोदी को अपदस्थ करने में सहयोग मांग चुके हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा पांच भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या पर लोकसभा में चर्चा कराने से इनकार कर दिया था। वह पाकिस्तान जाकर आतंकवादियों की मेहमानी कबूल कर चुके हैं। बीते साल ही उन्होंने कहा था कि उन्हें भारत में नफरत और पाकिस्तान में प्यार मिलता है। पहले उन्होंने नरेंद्र मोदी को नीच कहा और अब इस बात को फिर सही बताकर विवाद खड़ा कर दिया है। तो इस सबकी पड़ताल किया जाना तो बनता है। बात लाहौर से शुरू करें। अय्यर वहां पैदा हुए थे। विभाजन के बाद उन्हें भारत आना पड़ गया। मुझे लगता है कि लाहौर में उनका कुछ ऐसा छूटा कि वह उसकी पीड़ा से अब तक मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। ऐसा क्या हो सकता है?  आगे पढ़ें

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नाथूराम गोडसे को हिंदू आतंकवादी कहने पर कमल हासन को मिली जान से मारने की धमकी

अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि गोडसे का नाम लेकर कमल हासन गंदी राजनीति कर रहे हैं और अपना वध करवाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले कमल हासन, फारुख अब्दुल्ला, नवजोत सिंह सिद्धू और महबूबा मुफ्ती जैसे लोग हैं। ये आतंकियों के रक्षक हैं।  आगे पढ़ें

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इस भारी भरकम मतदान के मायने

तो क्या यह मान लें कि मध्यप्रदेश में हो रही यह बम्पर वोटिंग राज्य सरकार के खिलाफ विशेषत: किसानों के गुस्से का नतीजा है? या फिर यह कमलनाथ सरकार ने जैसा वो दावा कर रही है कि संकल्प पत्र के जिन वचनों को उसने पूरा कर दिया है यह उसके प्रति लोगों का समर्थन है। लोगों में आक्रोश तो दनादन हो रही बिजली कटौती को लेकर भी है। भोपाल में जहां पांच दशक बाद मतदान प्रतिशत ने साठ का आंकडा पार किया है, वहां तो माना जा सकता है कि दिग्विजय सिंह और हिंदू आतंकवाद की प्रतीक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक विषय हो सकती हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भोपाल लोकसभा के भी ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान ज्यादा बढ़ा है। खेती किसानी से ज्यादा वास्ता ग्रामीण आबादी का ही होता है।एकतरफा सोचना ठीक नहीं है। इसलिए यह तथ्य भी नहीं बिसराया जा सकता कि यह प्रतिशत मोदी सरकार के खिलाफ जनादेश वाला मामला भी हो सकता है। अनेकानेक मोर्चों पर यह सरकार भी असफल रही है। लेकिन मोदी की प्रति नाराजगी या समर्थन तो देश भर में एक जैसा ही होता, इसमें मध्यप्रदेश क्यों अलग जाता दिख रहा है? दिमाग पर बहुत अधिक जोर डालने के बावजूूद मामला नाथ या गांधी के बराबरी वाली नाराजगी का प्रतीत नहीं हो पाता। मध्यप्रदेश के संदर्भ में इसकी एक वजह नजर आती है। यहां पंद्रह साल बाद बनी कांग्रेस की सरकार से भाजपा-विरोधियों की अपेक्षाएं अनंत तक पहुंच गयी थीं। खासतौर पर दस दिन में कर्ज माफी की बात ने जनमत को सर्वाधिक प्रभावित किया था। read more  आगे पढ़ें

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