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शिवराज की मायनाखेज दिल की बात

विद्यार्थी परिषद के मामूली छात्र नेता से लेकर सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे शिवराज की यही यूएसपी है कि चेहरे के भावों से वे जितना समझ में आते हैं, उतना उनके भीतर की बात को समझना टेढ़ी खीर से कम नहीं है। अब इस यूएसपी को आप चाहे अच्छा कहें या बुरा, लेकिन सच यही है कि भाजपा के इस नेता ने पेट में दाढ़ी वाले हुनर को चेहरे पर दाढ़ी न हुए बगैर भी खूबसूरती से खुद में कायम रखा है। और मुझे लग रहा है कि अब वे एक नहीं, बल्कि दो-दो दाढ़ी वालों से हिसाब चुकता करने की मुद्रा में आ गये लगते हैं।read more  आगे पढ़ें

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राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर उमा भारतीय ने कहा-यह गर्व और खुशी का दिन, बोलीं- हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण पर कहा कि ये बेहद गर्व और खुशी का दिन है। हम भव्य राम मंदिर को बनते देखना चाहते हैं। अब मुझसे और आडवाणी जी से जुड़े 2 ट्रायल के लिए हम तैयार हैं। हम जो कर सकते हैं, करेंगे। मैंने शुरू से ही यह कहा है कि हम इसके लिए फांसी पर चढ़ने को भी तैयार हैं।  आगे पढ़ें

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कौन लेगा उस ढोंग का जिम्मा?

कांग्रेस और कमलनाथ अगर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो यह बिल्कुल उलटा मामला है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व वही लोग कर रहे हैं, जिनके हाथों राज्य की कानून-व्यवस्था को संभालने का जिम्मा है। जिनके जिम्मे राज्य में शांति एवं व्यवस्था कायम रखने की जवाबदारी है। क्या वे यह जता रहे हैं कि बात पार्टीगत निष्ठा की हो तो फिर समाज तथा कानून विरोधी किसी भी कदम को गलत नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे शासकों के चलते 25 तारीख के परिदृश्य की कल्पना की जा सकती है। हो सकता है कि कल से वचनबद्धता शपथ पत्र भरवाने का काम शुरू कर दिया जाए। जो लोग वचन दें कि वे राज्य सरकार के इस कृत्य के विरोध में उफ तक नहीं करेंगे, उन्हें निषेधाज्ञा के हर किस्म के उल्लंघन के खिलाफ कानूनी संरक्षण दिया जाए। ऐसा करने में मौजूदा शासन को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए। इसमें उसके कर्ताधर्ताओं का पुराना रियाज काम आएगा। उस समय की गतिविधियों का प्रशिक्षण मदद करेगा, जब आपातकाल के समय गिरफ्तारियों से बचने की एक अहम शर्त वह शपथ पत्र भरकर देना हो गयी थी, जिसमेें आपातकाल का समर्थन एवं इंदिरा गांधी के बीस सूत्रीय कार्यक्रम को स्वीकार करने की लिखित कसम खिलावाई जाती थी। अब आपातकाल के समय संजय गांधी के हमकदमों में कमलनाथ कितना खास मुकाम रखते थे, यह किसी से छिपा नहीं है। तो उस दौर की यह बाजीगरी अब 25 तारीख को भी आजमा ली जा सकती है।  आगे पढ़ें

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पीएम मोदी ने राजघाट पर बापू और विजयघाट पर लालबहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 150वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट जाकर गांधीजी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे विजयघाट पहुंचे और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन किया। वहीं, गांधी जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री दिल्ली और गुजरात में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी भी राजघाट पहुंचकर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राजघाट जाकर गांधीजी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राजघाट पहुंचकर गांधी जी को नमन किया।  आगे पढ़ें

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पीएम- राष्ट्रपति समेत कई नेताओं ने दी सुषमा को श्रद्धांजलि, परिवार से मिलकर भावुक हुए मोदी और आडवाणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और गृह मंत्री अमित शाह ने सुषमा को उनके जंतर-मंतर स्थित आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। इनके अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, बाबा रामदेव, भाजपा सांसद हेमा मालिनी, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी, दिल्ली के ले.गवर्नर अनिल बैजल, बसपा प्रमुख मायावती, कैलाश सत्यार्थी समेत कई हस्तियां उनके आवास पर पहुंचीं।  आगे पढ़ें

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अब माफ भी करों शिवराज....

माननीय, हमने तो भोपाल के जम्बूरी मैदान पर वह दृश्य भी देखा है, जब आपने नरेन्द्र मोदी की तुलना में लालकृष्ण आडवाणी को अधिक तवज्जो दी थी। हाय! आंखें फूट जाएं , जो आज यह देखना पड़ रहा है कि इन्हीं मोदी ने आपको जम्बूरी मैदान वाले भोपाल से दूर करने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। ईमान से कहता हूं, ये सदस्यता-फदस्यता अभियान जैसे खालिस शाकाहारी काम आपको शोभा नहीं देते। न लच्छेदार बातें करने का मौका। न ही सरकारी खजाने का गला घोंटकर योजनाओं के जरिये वोट पकाने की जुगाड़। ले-देकर वही पार्टी की रीति-नीति वाली बातें। आप इस सबके लिए नहीं बने हैं। आग लगे ऐसे मतदाता को, जो आपको चार या छह सीट और देने की उदारता नहीं दिखा सका। ठठरी बंधे उस वोटर की भी, जिसने मोदी को स्पष्ट बहुमत देकर उन्हें आपकी दुर्गति करने के लिए एक बार फिर पूरी तरह सक्षम बना दिया। बताइये जरा, आप चीखते रहे माफ करो महाराज और एक ये मोदी हैं, बगैर चीखे कर दिया, माफ करो शिवराज।  आगे पढ़ें

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राहुल गांधी के खिलाफ आरोप पर चुप रही आडवाणी की अगुआई वाली कमिटी

सूत्रों ने बताया कि कमिटी ने राहुल की नागरिकता के मुद्दे पर विचार नहीं किया और कुछ सदस्यों का कहना था कि इसमें कोई दम नहीं है। कमिटी में शामिल सदस्यों ने बताया कि मीटिंग बुलाने का फैसला कमिटी के अध्यक्ष आडवाणी को करना था। कमिटी की अंतिम मीटिंग 3 दिसंबर, 2015 को हुई थी। ईटी ने इस बारे में लोकसभा सेक्रेटरी जनरल, स्पीकर के कार्यालय और आडवाणी को प्रश्न भेजे, लेकिन उनका उत्तर नहीं मिला।  आगे पढ़ें

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बचें ‘जगह मिलने पर ही साइड दी जाएगी’ से

एक सवाल इस सब पर सवाल उठाने वाली प्रक्रिया के लिए है। कह सकते हैं राहुल गांधी कभी-कभी ‘बक्की’ की श्रेणी में आ जाते हैं। यूपी के कानपुर वाले बेल्ट में यह शब्द उनके लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बेवजह और कुछ भी बोल जाते हैं। यदि गांधी बक्की नहीं होते तो वह दो में से एक काम कतई नहीं करते। या तो यह नहीं कहते कि सियासत में रिटायरमेंट की आयु साठ साल होना चाहिए। या फिर आडवाणी के नाम पर बेहूदा विधवा प्रलाप करने से बचते। गांधी ने जिस दिन पुणे में छात्रों से साठ साल वाली बात कही, उसी दिन वह आडवाणी प्रसंग पर भाजपा को कोसते दिख गये। आखिर इस में गलत क्या है? बाबूलाल गौर लम्बे समय, दस बार विधायक रहे। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनाये गये। सरताज केंद्र में मंत्री बने। राज्य में भी वे मंत्री पद से नवाजे गए। कलराज मिश्रा 75 की आयु तक आते-आते हर किस्म का सम्मान तथा तमाम वरिष्ठ ओहदे से सुशोभित होते रहे।  आगे पढ़ें

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आडवाणी का ब्लॉग वार, लिखा- हमने कभी भी राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन या देशविरोधी नहीं मान

आडवाणी ने ब्लॉग में अपने अबतक के राजनीतिक सफर को याद किया कि कैसे वह 14 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़े और किस तरह वह पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में रहे और पार्टी के साथ करीब 7 दशकों तक जुड़े रहे। ब्लॉग में आडवाणी ने पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों पर जोर देते हुए सभी राजनैतिक दलों से आत्मनिरीक्षण की अपील भी की। आडवाणी ने लिखा है कि भारतीय लोकतंत्र का सार उसकी विविधता और अभिव्यक्ति की आजादी है। उन्होंने लिखा, 'अपने जन्म के बाद से ही, बीजेपी ने खुद से राजनीतिक तौर पर असहमति रखने वालों को कभी 'दुश्मन' नहीं माना, बल्कि उन्हें हमसे अलग विचार वाला माना है। इसी तरह, भारतीय राष्ट्रवाद की हमारी अवधारणा में, हमने राजनीतिक तौर पर असहमत होने वालों को कभी 'देश-विरोधी' नहीं माना।'  आगे पढ़ें

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भाजपा में युवाओं को तवज्जों देने से पार्टी के भीतर बढ़ा असंतोष, कानपुर से लेकर बेंगलुरु तक मची हलचल

जोशी का टिकट कटने पर सीनियर लीडर सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, 'यह दुखद ट्रेंड है।' बेंगलुरु में भी टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष की स्थिति है। बीजेपी ने दक्षिण बेंगलुरु सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी की बजाय 28 साल के युवा तेजस्वी सूर्या को मैदान में उतारा है। इसके चलते इस सीट पर भी बगावत के आसार हैं। स्थानीय नेताओं का एक धड़ा इस फैसले को हजम नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि प्रदेश यूनिट ने भी तेजस्विनी के नाम की सिफारिश की थी। हालांकि तेजस्विनी ने स्वयं कहा कि टिकट मेरे और समर्थकों के लिए झटके की तरह है, लेकिन हम अलग तरह की पार्टी हैं। पटना में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद पहुंचे तो हवाई अड्डे पर ही टिकट की दावेदारी जता रहे आर.के सिन्हा के समर्थकों ने उनका विरोध किया। उन्हें काले झंडे तक दिखाए गए, हालांकि पार्टी का कहना है कि यह ऐसे व्यक्ति का काम है, जो बीजेपी से निकाला जा चुका है। यही नहीं आर के सिन्हा ने पार्टी की जीत के लिए काम करने का वादा किया है।  आगे पढ़ें

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