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युवक कांग्रेस का ट्रेनिंग कैंप शुरू: अरुण यादव ने कार्यकर्ताओं को दिए टिप्स, कहा- मैं दिलवाऊंगा युवाओं को नगर निगम का टिकट

युवक कांग्रेस का 3 दिन का ट्रेनिंग कैंप धार के मोहनखेड़ा में रविवार को शुरू हो गया। इसे बुनियाद नाम दिया गया है। कांग्रेस उप चुनाव हारने के बाद अब नगरीय निकाय चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है, स्थानीय निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर बुनियाद मजबूत करना चाहती है। कैंप भी इसी का हिस्सा है।  आगे पढ़ें

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दिग्गी फिर हुए सक्रिय: पीसीसी चीफ के लिए अरुण यादव का नाम किया आगे, ठाकुर लाबी में असंतोष के स्वर

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर आने लगे हैं। युवक कांग्रेस में आदिवासी कोटे से डॉ विक्रांत भूरिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब पीसीसी पर उनकी नजर है। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष के लिए पिछड़े वर्ग के कोटे से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का नाम आगे बढ़ाया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यादव के नाम राजनीतिक गलियारों में आने के बाद ठाकुर लाबी में असंतोष की प्रतिध्वनि सुनाई देने लगी है।  आगे पढ़ें

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सरकार को घेरने की तैयारी: 28 को कृषि कानूनों का विरोध करेगी कांग्रेस, सभी विधायक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचेंगे विधानसभा, सरकार की भी तैयारी

कांग्रेस ने कृषि कानूनों के विरोध में और किसान आंदोलन के समर्थन में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा को घेरा। पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव और पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने स्थापना दिवस 28 दिसंबर पर काले कानूनों का पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस के सभी विधायक ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ विधानसभा पहुंचेंगे। इधर, सरकार ने उन्हें रोकने की तैयारी भी कर ली है, जिसके तहत विधानसभा से 5 किलोमीटर के दायरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बैलगाड़ी आदि की एंट्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है।  आगे पढ़ें

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कृषि कानूनों का विरोध करने कांग्रेस ने की रणनीति: शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधायक ट्रैक्टर से आएंगे विधानसभा, अरुण यादव को मिली कमान

कृषि कानूनों का विरोध करने की कांग्रेस ने नई रणनीति बना ली है। 28 दिसंबर को शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक ट्रैक्टर पर सवार होकर विधानसभा जाएंगे। सदन के अंदर भी इन कानूनों को लेकर हंगामा होने के पूरे आसार हैं। इस पूरे आंदोलन की कमान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को सौंपी गई है।  आगे पढ़ें

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अरुण यादव के ट्वीट पर मंत्री इमरती देवी का बड़ा बयान, कहा- कांग्रेस में नाग ही नाग है, दिग्गी और कमलनाथ नाग हैं और अरुण यादव खुद नाग हैं जो एक-दूसरे को डस रहे हैं

कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव के भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के फोटो के नागपंचमी की शुभकामनाएं दिए जाने के बाद प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस में तो नाग ही नाग हैं। दिग्विजय सिंह नाग हैं, कमलनाथ नाग हैं और अरुण यादव खुद भी नाग हैं। कांग्रेस में इतने नाग हैं कुछ कहा नहीं जा सकता। सब एक दूसरे को डसे जा रहे हैं।  आगे पढ़ें

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आरोह से अवरोह तक बेवकूफी

राहुल की परेशानी दोहरी है। न उनका खुद की वाणी पर नियंत्रण है और न ही बिगड़ैल बोल वाले पार्टी नेताओं के बीच उनका खास डर दिखता है। गांधी के श्रीमुख से बहुधा मूर्खता का संचारण ही होता है। लिहाजा यह परम्परा नीचे तक उतर आयी है। किसी परनाले की तरह खुले में बह रही है। भोपाल में कल हुई कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक को ही लीजिए। कहने को तो इसमें कांग्रेस के दिग्गज शामिल हुए। कहा गया कि लोकसभा चुनाव के नतीजों की इसमें समीक्षा होगी, लेकिन मामला वही ईवीएम को कोसने तक सिमट कर रह गया। भाई लोगों ने ईवीएम को हार की वजह बताया। फिर इस महान आविष्कार से राहुल गांधी को अवगत कराने की बात तय की। मामला खत्म। ऐसे आविष्कारकों से यह तो पूछ लें कि यदि ईवीएम में ऐसा ही खेल हुआ तो कमलनाथ और उनके बेटे कैसे चुनाव जीत गये? तथ्य यह है कि कांग्रेस की राज्य में बेहद शर्मनाक हार का कम से कम प्रदेश स्तरीय नेताओं की सेहत पर कोई असर हुआ ही नहीं है। नाथ के लिए यही बहुत रहा कि मोदी की आंधी के बावजूद छिंदवाड़ा सीट पर उनके परिवार का कब्जा कायम है। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना के सियासी अखाड़े में चाटी गयी धूल थूकते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद पाने के लिए जुट गये हैं।  आगे पढ़ें

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ये किस्मत के धनी कांग्रेसी...

एक हास्य प्रधान फिल्म है, चुपके-चुपके। खुद को बेहद चालाक समझने वाला पात्र अंतत: बेवकूफ साबित हो जाता है। इसकी वजह पूछने पर वह कहता है, जुकाम में लोगों की नाक बंद हो जाती है, लेकिन मेरा दिमाग बंद हो गया था। हालांकि फिलहाल मौसम भीषण गरमी का है। फिर भी कांग्रेस से जुडेÞ ऐसे निर्णय यही यकीन दिला रहे हैं कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर किसी न किसी को ऐसा जुकाम हुआ है कि उसका दिमाग बंद हो गया है। वरना कोई वजह नहीं थी कि घोरतम असफल प्रदेश अध्यक्ष रहे अरुण यादव को कांग्रेस खंडवा सीट से लोकसभा चुनाव का टिकट दे देती। पचौरी की तरह ही यादव का मामला किस्मत की खाने वाला है। पचौरी बगैर चुनाव जीते केंद्र में मंत्री बन गये। बिना जमीनी आधार के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना दिये गये। यादव अपने दिवंगत पिता सुभाष यादव के जीवित रहते उनके असर की बदौलत एक बार खरगौन और एक बार खंडवा से सांसद बनकर केंद्रीय मंत्री हो गये। बाद में संगठन के शून्य अनुभव के बावजूद प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद उन्हें दे दिया गया। विधानसभा चुनाव में बेचारे बलि का बकरा बनकर खेत रहे। शिवराज सिंह चौहान के सामने न उन्हें जीत पाना था और न ही जीत सके। फिर भी पार्टी ने उन पर फिर से यकीन जता दिया है। वाह! किस्मत हो तो ऐसी, वरना तो फिर बदकिस्मती ही अच्छी है। यादव जीत गये तो ठीक, वरना हारने की आदत को उन्हें हो ही गयी है। फिर चाहे वह बुधनी हो या हो खरगौन।  आगे पढ़ें

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मामला प्रदेशाध्यक्ष पद का

एक सवाल उठता है। नाथ ने जब जरूरत नहीं कहा तो उनका आशय नये प्रदेशाध्यक्ष से था या केवल अजय सिंह से? क्योंकि क्षमताओं से लबरेज होने के बावजूद सिंह बीते कई घटनाक्रमों में कमतर साबित हो चुके हैं। चौधरी राकेश सिंह प्रकरण से लेकर चुरहट सहित विंध्य में कांग्रेस की चुनावी पराजय ने उनकी क्षमताओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह सही है कि कई समर्थकों ने सिंह के लिए सीट खाली करने की बात कहकर उनके प्रति यकीन जताया है, लेकिन यह भी तो सही है कि जो शख्स अपने परम्परागत गढ़ चुरहट की जनता का ही विश्वास कायम नहीं रख पाया, उसे किस वजह से चुनावी साल में प्रदेशाध्यक्ष पद जैसी अहम जिम्मेदारी दे दी जाए? दोनो बार नेता प्रतिपक्ष रहते हुए सिंह ने तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ दमदार तेवर दिखाए। वे अपनी हार के कारण तो जानते हैं लेकिन विंध्य में इस हार के पीछे की साजिश समझने का आग्रह वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जरूर कर रहे हैं। लेकिन अब सरकार बन गई है तो कोई उनकी बात को शायद गंभीरता से नहीं ले रहा है। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए भी वे पार्टी में अपनी लकीर लंबी नहीं कर पाएं, ऐसे में कांग्रेस उनकी दम पर संगठन को आगे बढ़ाने का जोखिम शायद ही लेना चाहेगी।read more  आगे पढ़ें

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नेताओं की सिर-फुटौव्वल का इंतजाम कर गए राहुल

पहले से ही मजबूत जगहों पर गांधी के जाने का क्या तुक था। उन्हें वहां जाना चाहिए था, जहां पार्टी इन तीन सीटों की तुलना में कमजोर है। कांग्रेस की बीते पंद्रह साल की दशा और दिशा के चलते गांधी को ऐसी सीटें ढूंढने में कोई समय भी नहीं लगता। लेकिन आमंत्रण देने और कार्यक्रम तय करने वालों की मनमर्जी के चलते इन सभाओं का कोई खास असर होता नजर नहीं आता। अब कांग्रेस में गांधी के खिलाफ भला कोई क्या बोलेगा। इसलिए कमजोर स्थिति वाले प्रत्याशी लाठी लेकर उन कर्णधारों को ही ढूंढते रह जाएंगे, जिन्होंने गांधी को बुलाया था।  आगे पढ़ें

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बुधनी से सीएम शिवराज को टक्कर देंगे अरुण यादव, कांग्रेस के कुल 229 प्रत्याशी घोषित

बुधनी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को खड़ा किया है। कांग्रेस ने 229 प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी, जतारा सीट लोकतांत्रिक जनता दल के लिए छोड़ी है। पांच प्रत्याशियों को बदला गया है।  आगे पढ़ें

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