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अयोध्या में मन्दिर मस्जिद के बाद अब 'राष्ट्र मन्दिर' के निर्माण की बारी

अयोध्या में मंदिर निर्माण जल्द से जल्द प्रारंभ किए जाने के लिए साधु संतों के जमावड़े ने सरकार से कई बात कानून बनाने अथवा अध्यादेश जारी करने की मांग की गई थी। तब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सरकार न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद भी अपने रुख को दोहराया। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी भूरी -भूरी प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने देश की जनता, साधु संतों और राजनीतिक दलों को इस फैसले की धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा करने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया।  आगे पढ़ें

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राम मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार ट्रस्ट बनाने की जल्द शुरू करेगी प्रक्रिया, कोर्ट के आदेश का होगा अमल

अयोध्या विवाद में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी। यही ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण और संचालन करेगा। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय सहित दूसरे विभागों के अधिकारी इसके लिए शुरूआती तकनीकी बिंदु तैयार करने में जुटे हैं। यह काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल किया जा सके।  आगे पढ़ें

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीएम ने कहा- अयोध्या के फैसले को देश ने खुले मन से स्वीकार किया

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि दशकों तक चली न्याय प्रक्रिया आज खत्म हुई। इससे दुनिया को हमारे जीवंत लोकतंत्र के बारे में पता चला है। अयोध्या के फैसले को देश ने खुले दिल से स्वीकार किया। यह विविधता में हमारी एकता है। इससे पहले मोदी ने ट्वीट किया था कि फैसले को किसी की हार या जीत के लिहाज से न देखा जाए। न्याय के मंदिर ने दशकों साल पुराने विवाद को सुलझा दिया है। सभी नागरिकों को राष्ट्र भक्ति की भावना को बनाए रखने पर बल देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर ट्रस्ट के जरिए मंदिर बनाने और मस्जिद के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।  आगे पढ़ें

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अयोध्या विवाद पर 2010 में जजों ने कहा था- यह जमीन का छोटा सा टुकड़ा है, जहां देवदूत भी पैर रखने से डरते हैं

30 सितंबर 2010। यही वह दिन था, जब अयोध्या विवाद पर पहली बार कोई बड़ा अदालती फैसला आया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन जजों की बेंच ने अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में मुस्लिमों, रामलला और निमोर्ही अखाड़े में बराबर बांट दिया था। इसी फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला सुनाने वाले जस्टिस एसयू खान ने 285 पेज के अपने फैसले में टिप्पणी की थी, यह जमीन का छोटा-सा टुकड़ा है, जहां देवदूत भी पैर रखने से डरते हैं। हम वह फैसला दे रहे हैं, जिसके लिए पूरा देश सांस थामें बैठा है।  आगे पढ़ें

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अयोध्या विवाद: 17 नवंबर से पहले से आ सकता है फैसला, 1990 के बाद पहली बार विहिप ने पत्थर तराशने का काम रोका

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले आने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैसले से पहले देश के सभी राज्यों को अलर्ट पर रहने को कहा है। केंद्र ने अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवान भी उत्तर प्रदेश के लिए रवाना कर दिए हैं। अयोध्या में प्रशासन ने 10 दिसंबर तक धारा-144 लागू कर दी है। पड़ोसी जिले अंबेडकर नगर में 8 अस्थायी जेल बनाई गई हैं। ये सभी जेल, कॉलेजों में बनाई गई हैं। इधर, विहिप ने राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम रोक दिया। 1990 के बाद से यह पहली बार है कि विहिप ने काम रोका है।  आगे पढ़ें

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संघ ने कहा- अयोध्या विवाद पर न्यायालय का फैसला सभी को मन स्वीकार करना चाहिए

हिंदू संगठन ने एक अन्य ट्वीट में कहा, अयोध्या विवाद पर अदालत के फैसले के बाद बनने वाले हालात पर चर्चा के लिए, राजधानी में वरिष्ठ पदाधिकारियों की 2 दिवसीय बैठक बुलाई गई है। आरएसएस के प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। जो भी फैसला हो, सभी को उसे खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। देश में सामाजिक समरसता बनी रहे, ये सभी की जिम्मेदारी है। बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है।  आगे पढ़ें

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अयोध्या विवाद: मध्यस्थता कमेटी पहुंची अयोध्या, आज से शुरू करेगी सुनवाई

अयोध्या विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमिटी के सदस्य मंगलवार को अयोध्या पहुंच गए। बुधवार से इस मामले में सुनवाई शुरू हो रही है और मध्यस्थता से विवाद का हल निकालने की कोशिश होगी। बुधवार को 25 लोगों को बातचीत के लिए बुलाया गया है। अवध यूनिवर्सिटी के इंजिनियरिंग कैंपस स्थित गेस्ट हाउस में कमिटी के ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। कमिटी के सदस्यों के रुकने और मध्यस्थता के लिए अलग-अलग कमरे बने हैं। कमिटी के सदस्य श्री श्री रवि शंकर, रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला और वकील श्रीराम पंचू शुक्रवार तक अयोध्या में रहेंगे। अयोध्या को छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया है। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पुलिस फोर्स तैनात है।  आगे पढ़ें

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अयोध्या केस: तीन सदस्यीय टीम पैनल में श्री श्री मध्यस्थ बनाए जाने पर ओवैसी को आपत्ति

ओवैसी ने आगे कहा कि बेहतर होता कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी न्यूट्रल व्यक्ति को मध्यस्थ बनाया होता। उन्होंने कहा, 'श्री श्री का 4 नवंबर 2018 का आॅन रिकॉर्ड स्टेटमेट हैं, जिसमें वह सीरिया बनने की मुसलमानों को धमकी दे रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थ बनाया है तो उन्हें न्यूट्रल रहना होगा। एआईएमआईएम चीफ ने कहा कि मेरी पार्टी का स्टैंड यह है कि एक मध्यस्थ का विवादित बयान है तो उसे मध्यस्थ नहीं बनाया जाना चाहिए था लेकिन अब हम उम्मीद करते हैं कि श्री श्री अपने पुराने बयान को अपने दिमाग से निकाल देंगे।  आगे पढ़ें

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फिर याद आए राम, क्या होगा अंजाम?

वाकई रामजी एक बार फिर भाजपा का बेड़ा पार लगाने की स्थिति में आ गए लगते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर सुनवाई अगले साल तक टाल दी है। ऐसा होते ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और खुद भाजपा के कई नेताओं और मोदी सरकार के मंत्रियों ने भी इस बात के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया कि मोदी सरकार अध्यादेश ला कर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। यह दबाव भाजपा की मर्जी के खिलाफ नहीं बनाया गया। इसकी रचना पूरी सहमति से की गई है। इसलिए यह तय मानकर चलिए कि विधानसभा चुनावों के दौर के बाद किसी भी समय मंदिर के लिए अध्यादेश लाने का कदम उठाया जा सकता है। read more  आगे पढ़ें

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