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मप्र में कोरोना का कहरः भोपाल में बढ़ते मरीजों के साथ संसाधन हुए कम, ऑक्सीजन न मिलने से 5 मरीजों की गई जान

  • 20 से ज्यादा अस्पतालों में परेशानी, कह रहे मरीजों को दूसरी जगह ले जाएं

भोपाल। मप्र में कोरोना लगातार बेकाबू होता रहा है, तमाम बंदिशों के बाद भी कोरोना की रफ्तार काबू नहीं हो रही है। लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या के साथ ही संसाधन भी खत्म होते जा रहे हैं। भोपाल में 24 घंटे में ऑक्सीजन न मिलने से 5 मरीजों की मौत हो गई है। यहां के 20 से ज्यादा अस्पतालों में ऑक्सीजन को लेकर अफरा-तफरी रही। अस्पताल ऑक्सीजन की कमी का बता कर मरीजों के परिजन को छुट्टी कराने का बोल रहे हैं। परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। उधर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। चिताएं ठंडी होने से पहले ही दूसरे शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

कोरोना संक्रमण इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में ज्यादा है। 24 घंटे में यहां डेढ़ गुना ज्यादा मरीज मिले हैं। इन 4 बडे शहरों में 4136 नए केस और 21 मौतें हुई हैं। इंदौर में सबसे ज्यादा 1552 संक्रमित आए हैं, जहां 6 मौतें हुई हैं। भोपाल में 1456 नए केस और 5 मौत हुई है। ग्वालियर में 576 संक्रमित मिले, 6 की जान गई है। जबलपुर में 552 नए मरीज आए, 4 की मौत हो गई। ग्वालियर में सबसे ज्यादा संक्रमण दर 33 फीसदी और भोपाल में 28 फीसदी है।





अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिल रही जगह
जबलपुर के चैहानी श्मशान घाट में प्रशासन के दावे के उलट सोमवार को 30 कोरोना प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार किया गया। प्रशासन के रिकॉर्ड में 2 दिन में 8 मौतें हुई हैं। वहीं दो स्पेक्टेड शवों का अंतिम संस्कार किया गया। कई शवों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में रोकना पड़ा। मोक्ष संस्था के आशीष ठाकुर के मुताबिक एक चिता जलाने के बाद उसे ठंडा होने में वक्त लगता है, पर चैहानी शमशान घाट में एक चिता की लपटें बुझते ही दूसरी की चिता सजानी पड़ती है। यही स्थिति भोपाल के भदभदा विश्राम घाट की है। यहां सोमवार को 41 कोरोना संक्रमितों के शव पहुंचे। जलाने के लिए जगह ही नहीं थी। जलती चिताओं के बीच बेहद नजदीक दूसरी चिताएं सजाई जा रही थीं।

भोपाल में सरकार का दावा ऑक्सीजन पर्याप्त, फिर अस्पतालों से छुट्टी क्यों
रविवार को सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश में ऑक्सीजन पर्याप्त है और अगले ही दिन सोमवार को भोपाल में 5 लोगों की ऑक्सीजन न मिलने से मौत हो गई। पहला मामला एमपी नगर के सिटी अस्पताल का है। वहां एक दिन में चार मरीजों की ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत हो गई। मरने वालों में 30 साल के सौरभ गुप्ता, 35 साल के तुषार, 60 साल की उर्मिला जैन और आशा पटेल हैं। अस्पताल संचालक डॉक्टर सब्यसाची गुप्ता के मुताबिक उन्होंने कई जगह फोन लगाए, जब तक ऑक्सीजन जुटाई चार मरीजों की मौत हो गई।

दूसरा मामला करोंद के पीजीबीएम अस्पताल का है, जहां भर्ती एक महिला को ऑक्सीजन खत्म होने के कारण छुट्टी दे दी गई। बेटे एंबुलेंस से उन्हें लेकर आरोग्य निधि अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। वहीं, हमीदिया के पास बने एविसेना अस्पताल में प्रबंधन ने ऑक्सीजन सपोर्ट वाले तीन कोविड मरीजों को यह कहकर छुट्टी दे दी कि यहां अब ऑक्सीजन नहीं है, कहीं और ले जाओ। इसके पहले इंदौर के गुर्जर अस्पताल में भी ऐसी ही नौबत आई थी। यहां 24 घंटे में 5 मरीजों की मौत हो गई। परिजनों को सिलेंडर बाइक, कार में लेकर आना पड़ा था।





इंदौर में पिछले साल पूरे अप्रैल में 1400 मरीज और अब एक दिन में 1552
अब तक एक दिन में सबसे ज्यादा 1552 नए कोरोना मरीज मिले और छह लोगों की मौत हो गई। पिछले साल पूरे अप्रैल महीने में करीब 1400 मरीज मिले थे, लेकिन इस बार एक दिन में ही उससे ज्यादा मरीज सामने आ गए हैं। हालांकि सोमवार को रिकॉर्ड सैंपल जांचे गए। अब तक एक दिन में सर्वाधिक 8553 सैंपल की जांच हुई। पॉजिटिव रेट बढ़कर 18 फीसदी पर पहुंच गया है। 5 से 12 अप्रैल के सात दिनों का औसत पॉजिटिव रेट 15 फीसदी हो गया है। इस दौरान 7762 मरीज मिले हैं। देश के करीब 20 शहरों में एक दिन में 1500 से ज्यादा मरीज मिले हैं। अब इंदौर भी इस सूची में शामिल हो गया है। मौतें भी ज्यादा हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भले ही 11 दिन में कोरोना से 43 मौतें बता रहे, लेकिन हकीकत में शहर के तीन मुक्तिधामों में ही 24 घंटे में 23 कोविड शव पहुंचे हैं।

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ग्वालियर में सबसे ज्यादा संक्रमण दर
यहां सैंपल देने वाला हर तीसरा व्यक्ति पॉजिटिव मिला है। 24 घंटे में 576 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं, जबकि 1741 सैंपल की जांच हुई थी। प्रदेश में सबसे ज्यादा संक्रमण दर 33 फीसदी यही पर है। 6 संक्रमितों की मौत हुई। सिर्फ पांच दिन में कोरोना संक्रमित का आंकड़ा 20 हजार से बढ़कर 22 हजार के पार हो गया है। एक्टिव केस 2939 हो गए हैं। सोमवार को 50 जगहों पर माइक्रो कंटेनमेंट जोन और 3 वार्डों के 25 मोहल्ला व कॉलोनियों में 19 अप्रैल तक कंटेनमेंट जोन बना दिया गया। सोमवार शाम को जिला प्रशासन ने सभी धार्मिक स्थलों व संस्थानों में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। कोचिंग क्लासेस बंद करने का आदेश दे दिया है।

जबलपुर में शवों के अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग
लॉकडाउन और कर्फ्यू लगाने का भी कोई फायदा नहीं हो रहा है। 552 नए केस मिले। सरकारी आंकड़ों में एक बार फिर चार ही मौत दिखाई गई, लेकिन चैहानी श्मशान की हकीकत आंसू लाने वाली थी। यहां लाशों को जलाने के लिए जगह तक नहीं बची थी। घंटों लोगों को इंतजार करना पड़ा। यहां 30 संक्रमितों की लाशें जली। चार सस्पेक्टेड भी पहुंचे थे और इतनी ही लाशें मेडिकल व निजी अस्पतालों में वेटिंग में हैं। अब उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को हो पाएगा।

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