मध्यप्रदेशसागर

कोल्हापुर में बंधक दमोह के 17 मजदूर हुए मुक्त, शिकायत मिलते ही फुर्ति दिखाई थी प्रशासन ने

बंधन मुक्त होने के बाद वह ट्रेन के माध्यम से दमोह के लिए रवाना हुए थे जो कि सकुशल गुरुवार को दमोह आ गए। इन मजदूरों ने यह भी बताया कि उन्हें पहचान के गोलू ठाकुर एवं विक्रम दोनों गन्ने की कटाई के लिए साथ लेकर गए थे।

दमोह। दमोह के 17 मजदूरों को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। दमोह जिला प्रशासन ने इन्हें गुरुवार को छुड़ा लिया है और दमोह लाया गया है। दमोह पहुंचे मजदूरों ने जिला प्रशासन का धन्यवाद दिया और कहा कि यदि प्रशासन उन्हें गांव में ही मजदूरी दिलाएगा तो अब कभी अन्य राज्यों में मजदूरी करने नहीं जाएंगे। बता दें कि इन्होंने दमोह जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी।

दमोह पहुंचे मजदूरों में प्रमुख रूप से राजा, दीपक, मंजू ,अरविंद, रवि, रीना आदि प्रमुख हैं। दमोह स्टेशन पहुंचने पर प्रशासन के द्वारा सभी को उनके घर तक पहुंचाया। बता दें कि मजदूरों के बंधक होने की सूचना जैसे ही कलेक्टर एस कृष्णन चैतन्य को मिली। उन्होंने तत्काल वहां के जिला प्रशासन से संपर्क किया और संबंधित थाना प्रभारी से मजदूरों को वहां से बंधक मुक्त कराने के लिए कहा। सूचना मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी द्वारा इन सभी मजदूरों को वहां से बंधन मुक्त कराया।

ज्यादा पैसे देने का दिया था लालच
इन मजदूरों ने बताया कि बंधन मुक्त होने के बाद वह ट्रेन के माध्यम से दमोह के लिए रवाना हुए थे जो कि सकुशल गुरुवार को दमोह आ गए। इन मजदूरों ने यह भी बताया कि उन्हें पहचान के गोलू ठाकुर एवं विक्रम दोनों गन्ने की कटाई के लिए साथ लेकर गए थे। दमोह पहुंचे मजदूरों में अरविंद अहिरवाल ने बताया कि वह दस नवंबर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के सांगली तहसील के गढ़वाली गांव गए थे। इन्हे मजदूरी के रूप में ज्यादा पैसे देने का लालच देकर कोल्हापुर ले जाया गया था।

ठेकेदार की धममी से घबरा गए थे मजदूर
यहां पर ठेकेदार द्वारा सभी मजदूरों से काम लिया गया, लेकिन यहां पर किसी भी प्रकार की रुकने या खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई और मजदूरी भी कम दी जा रही थी। इसके अलावा ठेकेदार से मजदूरी मांगने पर उसने परेशान करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, वह मारपीट करने की धमकी भी देता था। उसकी इस धमकी से सभी मजदूर घबरा गए थे। इस बात की जानकारी इन मजदूरों ने अपने परिजनों को दी। परिजनों ने दमोह जिला प्रशासन को अवगत कराया। इस तरह की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते ठेकेदार के चंगुल से मुक्त कराया।

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