मध्यप्रदेश

श्योपुर: शुरू हुआ फर्जी गरीबों को तलाश कर अमीर घोषित करने का अभियान, कलेक्टर ने दिए निर्देश

श्योपुर। अगर सब कुछ ठीक रहा तो श्योपुर जिले में गरीबी का स्तर बहुत हद तक गिर सकता है। दरअसल कलेक्टर संजय कुमार ने बीपीएल सूची में दर्ज फर्जी गरीबों को तलाश कर उनके नाम सूची से हटाने का अभियान शुरू किया है। कलेक्टर के निर्देश पर गांवों में पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक व शहरी क्षेत्र में नगर पालिका कर्मचारी डोर टू डोर सर्वे कर गरीबी रेखा में शामिल हितग्राहियों की मौके पर पहुंच कर जांच करेंगे और सूची में दर्ज कोई गरीब अगर गरीबी रेखा की श्रेणी में फिट नही बैठता है तो उसे सूची से बाहर कर अमीर होने का गौरव हांसिल कराया जाएगा।

दरअसल बड़ी संख्या में जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को बीपीएल सूची में नाम जोड़े जाने के आवेदन मिल रहे हैं। अधिकतर आवेदकों की शिकायत रहती है कि पात्रता में आने के बावजूद उन्हें बीपीएल सूची से बाहर रखा गया है जबकि उनके आसपास निवास करने वाले ऐसे अनेकों लोग है जो बहुमंजिला मकानों में रहते है और कार, ट्रैक्टर के मालिक है जो फर्जी तरीके से अपना नाम बीपीएल सूची में लिखवाकर सरकार से मिलने वाली सहायता का अनर्गल लाभ ले रहे हैं। लोगों की इस शिकायत को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए बीपीएल सूची में शामिल हितग्राहियों की जांच कराने के निर्देश दिए थे इस क्रम में एसडीएम ने दल बनाकर डोर टू डोर जांच करने के निर्देश देते हुए समय सीमा में जांच उपलब्ध कराने की ताकीद की है ताकि अपात्रों के नाम बीपीएल सूची से काटे जा सके।

इस तरह करेगी टीम संबंधित के घर पहुंचकर सर्वे
एसडीएम द्वारा नियुक्त की गई टीम अपने गांव में दर्ज गरीबों की सूची लेकर उनके घरों पर पहुंचेगी और बिंदुबार जानकारियां एकत्रित करेगी। जिन हितग्राहियों के नाम बीपीएल सूची में दर्ज हैं पहले तो उनके रहने के आवास का फोटो खींचा जाएगा और फिर उस आवेदन से मिलान किया जाएगा जिसमें उन्होंनें अपना आवास कच्चा घर या झोपड़ी होना बताया है। संबंधित के पास बाईक, ट्रैक्टर अथवा चार पहिया वाहन उपलब्ध है या नही इसकी जानकारी ली जाएगी। मिली जानकारी का मिलान उस पत्रक से किया जाएगा जिस पत्रक में बीपीएल सूची में शामिल करने के लिए संबंधित ने आवेदन करते समय जानकारी भरी है।

मानक आधारित जांच हुई तो गरीब मुक्त जिला बन जाएगा श्योपुर
अगर जांच मानकों पर आधारित हुई तो पूरा जिला गरीबी रेखा से बाहर हो जाएगा। योजना आयोग के अनुसार शहरी क्षेत्र में रहने वाला परिवार 965 रुपए और गांव में रहने वाला परिवार 781 रुपए महीना खर्च करता है तो वह गरीब नही माना जाएगा। योजना आयोग ने एक और मानक गरीबी रेखा में शामिल होने का बताया गया है जिसमें बताया गया है कि शहर में रहने वाला परिवार अपने उपर रोजाना 32 रुपए और गांव में रहने वाला परिवार प्रतिदिन 26 रुपए खर्च करता है तो वह भी गरीबी रेखा से बाहर होगा। अगर इस पैटर्न पर जांच हुई तो जिले में एक भी गरीब बीपीएल सूची में नही बचेगा और श्योपुर गरीब मुक्त जिला भी बन सकता है।

ऐसे होगी फर्जी गरीबों की जांच
हर वार्ड में तीन सदस्यीय दल बनाया जाएगा यह दल अधिकारी स्तर के एक कर्मचारी के नेतृत्व में वार्ड की बीपीएल सूची के आधार पर संबंधित हितग्राही के घर पहुंचकर जांच करेंगे। इस दौरान दल सबसे पहले हितग्राही के आवास की स्थिति रिपोर्ट में लिखेगा अगर आवास कच्चा और गरीबी रेखा में पात्रता अनुसार आता है तो संबधित हितग्राही से जानकारी ली जाएगी क्या उसके पास कार, टै्रक्टर या बाईक है अगर इनमें से कोई एक भी वाहन हितग्राही के पास हुआ तो उसे अपात्र की श्रेणी में मानकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर मकान पक्का और सुविधाजनक है तो संबंधित हितग्राही से पूछा जाएगा की यह आवास पीएम आवास योजना के तहत तो नही बना। अगर मकान पीएम आवास योजना के तहत नही है तो हितग्राही को अपात्र करने वाला बिंदु दर्ज किया जाएगा। जिन हितग्राहियों पर बीपीएल से अपात्र होने के प्रमाण मिलेंगे उनसे टीम बीपीएल सूची से नाम हटवाने के लिए सहमति पत्र भरवाएगी। ऐसे हितग्राहियों से बिना सवाल जवाब किए उनके नाम सूची से हटाए जाएंगे जो लोग सहमति पत्र नही देंगे उनकी जांच अलग से कराई जाकर रिकवरी भी कराई जा सकती है।

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