MP Election 2023मध्यप्रदेश

विंध्य की सियासत: आठ सीटों में त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा-कांग्रेस की नजर इन पर

रीवा। मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी? किसे चखना होगा हार का स्वाद, कौन पहनेगा जीत का हार? इस सब का फैसला आज से पांच दिन बाद यानि तीन दिसम्बर को होगा, लेकिन सत्तारूढ़ दल भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आगे की रणनीति यानि प्लॉन – बी पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत अब तीसरे मोर्चा के प्रत्याशी जो संभावित जीत की कतार पर हैं, उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है। दोनों दलों का वास्तविक अनुमान यह है कि सीटों में कांटे की टक्कर है। पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो मैनेजमेंट क्या होगा इस पर सक्रियता बढ़ गई है।

विंध्य की इन सीटों पर है त्रिकोणीय मुकाबला
विंध्य क्षेत्र की बात करें तो यहां की तीस में से 8 सीटें ऐसी मानी जा रही हैं जहां गैर भाजपा- कांग्रेस प्रत्याशी मुकाबले में हैं तथा कम मतों से हार- जीत का फैसला संभावित है। जीत के संभावित प्रत्याशियों को घेरने की भी तैयारी शुरू हो गई है। जिन आठ सीटों में भाजपा,कांग्रेस के अलावा अन्य उम्मीदवार मुकाबले में हैं वे सीटें विंध्य की छह जिले में शामिल हैं। इनमें सतना और रीवा जिले की दो- दो विधानसभा सीटें तो मैहर, शहडोल, मऊगंज और सिंगरौली जिले की एक- एक विधानसभा सीट शामिल है।

सतना और रैगांव में बसपा बिगाड़ सकती है खेल
सतना विधानसभा सीट को लेकर भाजपा- कांग्रेस दोनों में संशय बरकरार है। सांसद गणेश सिंह की यहां न सिर्फ प्रतिष्ठा बल्कि सियासी भविष्य भी दांव पर लगा है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा को लेकर यह चर्चा है कि जीत गए तो प्रदेश में ओबीसी का बड़ा चेहरा बन जाएंगे लेकिन हार मिली तो फिर उबर नहीं पाएंगे। इन दोनों का तनाव बढ़ाने वाले बसपा ्रप्रत्याशी रत्नाकर चतुर्वेदी शिवा इस चुनाव को नफा -नुकसान से परे यह मान कर चल रहे हैं कि उनको राजनीतिक अनुभव एवं आम जनता के बीच जाने का अवसर मिला है। फैसला जो भी होगा स्वीकार्य है। कुछ यही हाल रैगांव का भी है, 2013 में रैगांव विधानसभा सीट जीत चुकी बहुजन समाज पार्टी ने इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रैगांव से लगी नागौद विधानसभा में कांग्रेस से बगावत कर चुनाव लड़ रहे यादवेन्द्र सिंह के प्रभाव वाले कुछ गांवों के रैगांव विधानसभा में होने की वजह से यहां बसपा को भाजपा -कांग्रेस के साथ लड़ाई में माना जा रहा है।

मैहर में भी असमंजस्य की स्थिति
नवगठित जिला मैहर की जिला मुख्यालय वाली मैहर सीट पर भी कांग्रेस, भाजपा और विंध्य जनता पार्टी के प्रत्याशियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा के कब्जे वाली इस विधानसभा सीट को पार्टी जहां अपने कब्जे में बनाए रखना चाहती है वहीं कांग्रेस और विंध्य जनता पार्टी चुनाव के समय मैहर में जीत के लिए पूरा जोर लगाए नजर आई। कांग्रेस 2013 के बाद मैहर सीट पर अपना कब्जा फिर से जमाना चाह रही है। तो विंध्य जनता पार्टी को सबसे ज्यादा उम्मीद मैहर विधानसभा सीट से ही है। पार्टी को उम्मीद है कि विंध्य जनता पार्टी का जहां खाता खुल सकता है तो वह है मैहर विधानसभा सीट। मैहर में सत्तारूढ़ दल भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा अपना अस्तित्व तलाश रही विंध्य जनता पार्टी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जिस प्रकार की रिपोर्ट मतदान के बाद आ रही हैं ऐसे में मैहर में असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है हालांकि तीनों ही राजनीतिक दलों द्वारा अपनी- अपनी जीत का दावा किया जा रहा है।

देवतालाब में रोचक मुकाबला
तीन माह पहले जिला के रूप में अस्तित्व में आए मऊगंज के विधानसभा क्षेत्र देवतालाब में इस बार भाजपा, कांग्रेस एवं बसपा के बीच रोचक मुकाबला देखा जा रहा है। भाजपा के उम्मीदवार विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम से जहां लोगों की नाराजगी थी, वहीं कांग्रेस पार्टी ने ऐन वक्त पर पैराट्रूपर के रूप में उनके भतीजे पद्मेश गौतम को मैदान में उतार दिया था। खास बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी ने अमरनाथ पटेल को टिकट देकर भाजपा और कांग्रेस के गणित को बिगाड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। यहां पर यह बता दें कि देवतालाब विधानसभा क्षेत्र पटेल बाहुल्य है, जहां पर उनकी संख्या 55 हजार बताई गई है। ऐसी स्थिति में अगर जातिगत समीकरण को देखा जाए तो पटेल एवं हरिजन वर्ग बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत वोटर होते हैं ऐसी स्थिति में यहां से बसपा के उम्मीदवार अमरनाथ पटेल भी लड़ाई में आ गए हैं। माना यह जा रहा है कि जहां भाजपा विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस परिवर्तन को आधार बना रही है। ऐसे में जातिगत समीकरण के हिसाब से बसपा के उम्मीदवार भाजपा, कांग्रेस पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

बीडी ने बिगाड़ी सिरमौर की गणित
विधानसभा चुनाव की मतगणना 3 दिसम्बर को होनी है। ऐसी स्थिति में भाजपा, कांग्रेस एवं बसपा के समर्थक अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत-हार का दावा पेश कर रहे हैं। पुलिस विभाग की सेवा से सेवानिवृत्त हुए बीडी पाण्डेय ने क्षेत्र की राजनीति में कदम रखा और जनपद पंचायत के चुनाव में वह अपनी पत्नी को चुनाव जिताकर जनपद अध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे। खास बात यह है कि इस दौरान उन्होंने किसी पार्टी की सदस्यता नहीं ली थी। हाल ही में वह हाथी की सवारी कर विधानसभा के चुनाव मैदान में आए और भाजपा तथा कांग्रेस की गणित बिगाड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। दो बार के भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह को एक बार फिर से भाजपा ने टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि क्षेत्रीय जनता इनसे काफी नाखुश बताई जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व विधायक रामगरीब बनवासी को टिकट देकर चुनावी समर में उतारा था। खास बात यह है कि श्री बनवासी त्योंथर विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी की टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। जातिगत समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस ने इन्हें टिकट देकर बसपा एवं भाजपा की गणित बिगाड़ने की कोशिश की है। हालांकि सिरमौर में पहली बार ब्राम्हण मतदाताओं के एकजुट होकर मतदान करने की चर्चा है। अगर यह सही है तो बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे बीडी पाण्डेय की स्थिति काफी मजबूत कही जा सकती है।

सिंगरौली में चतुष्कोणीय मुकाबला
सिंगरौली विधानसभा सीट में अपना लगातार वर्चस्व बनाए रखने वाले रामलल्लू वैश को अपने क्रिमिनल बेटे के कारण टिकट गंवानी पड़ी। रामलल्लू ने खुली बगावत तो नहीं की लेकिन उनका कुनवा पूरी तरह आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी रानी अग्रवाल के साथ जुड़ा रहा। भाजपा ने यहां से रामनिवास शाह को तो कांग्रेस ने रेनू शाह को मैदान में उतारा। वहीं बसपा के चन्द्र प्रताप विश्वकर्मा भी लड़ाई में माने जा रहे हैं। यहां का चुनाव परिणाम चौकाने वाला हो सकता है। आप प्रत्याशी रानी अग्रवाल को जहां रामलल्लू के समर्थकों का साथ मिला तो वहीं भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता बिखरे नजर आए। भाजपा में जो जूतम पैजार गत दिनों हुई उसका सीधा फायदा मेयर रानी अग्रवाल ने उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

जयसिंह नगर में कड़ा मुकाबला
जयसिंह नगर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम चौकाने वाला हो सकता है। यहां भाजपा ने जैतपुर से विधायक मनीषा सिंह को सीट बदलकर मैदान में उतारा है क्योंकि जैतपुर में उनका विरोध बहुत था। भाजपा से टिकट की प्रबल दावेदार रहीं फूलमती सिंह ने टिकट न मिलने से बगावत का रुख करते हुए नारायण त्रिपाठी की पार्टी विंध्य जनता पार्टी से मैदान में उतर गर्इं। कांग्रेस ने यहां से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह मरावी को प्रत्याशी बनाया। भाजपा की अंदरूनी कलह ने यहां त्रिकोणीय मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। चुनाव के मैदान असंतुष्ट भाजपाई फूलमती के साथ हो गए। वहीं कांग्रेस में भी एकजुटता नहीं दिखी लिहाजा चुनाव कड़े टक्कर का माना जा रहा है।

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