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मप्र में सीएम चेहरे पर अभी असमंजस: आज हो सकती है पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, रेस में हैं कई नाम

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर असमंजस अब भी बना हुआ है। दरअसल भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व पांच दिन बाद सीएम का नाम तय नहीं कर सका है। इतना ही नहीं, सीएम फेस को लेकर चारों ओर चर्चा हो रही कि मप्र का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इन सब के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आज मुख्यमंत्री चयन को लेकर पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर सकता है। इसके बाद शनिवार या रविवार को विधायक दल की बैठक हो सकती है। बता दें कि मप्र में मुख्यमंत्री की रेस कई नेता शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि राजधानी दिल्ली में आज शाम 4 बजे भाजपा की अहम बैठक होगी। बैठक में मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम दिग्गज नेता शामिल होंगे। इसी बैठक में मप्र के लिए पर्यवेक्षक के नाम का ऐलान हो सकता है। मध्यप्रदेश की बात करें तो मुख्यमंत्री की रेस में सबसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे है। उनके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, नरेन्द्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय महा सचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम सीएम को लेकर सामने आ रहा है। वहीं केन्द्रीय ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी चर्चा में हैं।

गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान को बदलने की स्थिति में मुख्यमंत्री के पद के प्रबल दावेदार में प्रहलाद पटेल का नाम सबसे आगे है। इसका कारण उनका ओबीसी वर्ग से होना है। राहुल गांधी ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने को लेकर मुद्दा बना दिया है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से आने वाले शिवराज को हटाकर किसी अन्य वर्ग से मुख्यमंत्री बनाने पर विपक्ष को मुद्दा मिल जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा आलाकमान कोई रिस्क नहीं लेना। पटेल मोदी और शाह के विश्वास पात्र भी बने हुए हैं। वहीं प्रहलाद पटेल के नहीं होने पर नरेंद्र सिंह तोमर भी सीएम पद के दावेदार हैं। तोमर को कुशल संगठक भी माना जाता है। वह मोदी कैबिनेट में बड़ा मंत्रालय भी संभाल रहे थे। इससे पहले तोमर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके है। हालांकि नकारात्मक पक्ष यह है कि तोमर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करते है। यहां से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी आते हैं। ऐसे में दोनों के बीच क्षेत्र में पार्टी का श्रेय लेने को लेकर टकराव की आशंका पार्टी को हमेशा सताएगी।

सिंधिया और वीडी का नाम भी चर्चा में
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी चर्चा है। 2018 में चुनाव हारने के बाद भाजपा की सरकार बनाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी भूमिका रही है। अभी वह केंद्रीय नेतृत्व के करीब और विश्वासपात्र है। हालांकि उनके सीएम बनने से भाजपा में गुटबाजी का डर है। बाजी मार सकते हैं वीडी भी वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी किसी के चेहरे पर सहमति नहीं बनने पर बाजी मार सकते है। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के बाद विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के लिए संगठन की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। संगठन को मजबूत करने के साथ ही रणनीति के सफल क्रियान्वयन में शर्मा की अहम भूमिका है। प्रधानमंत्री भी प्रचार के दौरान शर्मा की पीठ ठोकर उनकी प्रशंसा कर चुके हैं। वहीं, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले सांसद के अलावा नए चेहरे पर भी विचार कर रहा है। इस बीच गुरुवार को कैलाश विजयवर्गीय ने संकेत दिए है कि रविवार तक प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस खत्म हो जाएगा।

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