मध्यप्रदेश

इंदौर में लॉकडाउन का असर: पुलिस की हिदायत के बाद भी नहीं रहे लोग, बेवजह घूमने वालों पर बरसाए जमकर डंडे

इंदौर। मार्च 2020 के बाद मार्च 2021 में भी लॉकडाउन ने हर इंदौरी को टेंशन में ला दिया है। रविवार की सुबह दूध वाले की आवाज तो आई, लेकिन सब्जी के ठेले गायब दिखे। सुबह चाय-नाश्ते के स्टॉल भी नहीं लगे। हालांकि सड़कों पर आवाजाही बनी रही। पुलिस के अनाउंस के बाद भी लोग सड़कों पर बेवजह की आवाजाही नहीं बंद की। इसके बाद सुबह 10 बजे के बाद पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी। रीगल चौराहे पर पुलिस ने बेवजह घूमने वालों को डंडे से मार कर भगाया।

शाम को आॅफिस से लौटते समय पेट्रोल पंप का किया था रुख
लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद शुक्रवार सुबह मंडी में जरूर थोड़ी भीड़ रही, लेकिन बाकी पूरा दिन आम दिनों की तरह ही बीता। सियागंज से लेकर हर छोटी बड़ी किराना समेत अन्य दुकान पर आम दिनों की तरह ही ग्राहक पहुंचे। शाम को जरूर आॅफिस से लौटते समय लोगों ने सब्जी की दुकान और पेट्रोल पंप की ओर रुख किया। हालांकि उन्होंने लिमिट में ही पेट्रोल डीजल भरवाया। बात करने पर कहा कि एक दिन का लॉकडाउन है, पिछले का बहुत लंबा लॉकडाउन का अनुभव है, सामान सहित हर चीज उपलब्ध हो जाती है, इसलिए स्टॉक करने से क्या फायदा।

इसलिए आई लॉकडाउन की नौबत
कोरोना रिटर्न के साथ ही लॉकडाउन भी रिटर्न हो गया है। आखिर इसकी नौबत क्यों आई? नवंबर-दिसंबर 2020 के दौरान इंदौर में कोरोना का पीक था, जब इन दो माह में ही 21 हजार मरीज इंदौर में आ गए थे। इस दौरान सौ सैंपल की जांच करने पर 8 मरीज पॉजीटिव मिल रहे थे और पॉजिटिव दर 8 फीसदी थी। जनवरी-फरवरी माह के दौरान 4600 मरीज सामने आए और पॉजिटिव दर गिरकर 3 फीसदी के करीब आ गई, लेकिन मार्च में अचानक फिर से संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है।

मरीज एक बार फिर 8.29 फीसदी पॉजिटिव दर के साथ सामने आ रहे हैं। संक्रमण की रफ्तार के साथ ही अस्पतालों में मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ठीक एक माह पहले 20 फरवरी को अस्पतालों में मात्र 210 मरीज भर्ती थे, तो वहीं, 20 मार्च को यह संख्या पांच गुना बढ़कर 1097 हो गई। 12 फरवरी को तो एक्टिव मरीज मात्र 280 बचे थे, जो अब बढ़कर 2 हजार के पार हो गए हैं।

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