एलपीजी बिजनेस में आ सकती है क्रांति, जरूरत के हिसाब से खरीद सकेंगे गैस, सरकार कर रही विचार



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने देश के अधिकतर गरीबों के घर में एलपीजी कनेक्शन तो पहुंचा दिया, लेकिन इन गरीबों के लिए एक सिलेंडर के लिए 800-900 रुपए का भुगतान करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई एजेंसियों से बात की है। हाल ही में टाटा इनोवेशन ने इसका एक बेहतरीन विकल्प सरकार के सामने पेश किया है, जो आने वाले दिनों में एलपीजी बिजनेस में क्रांति ला सकता है


यह सुझाव है कि ग्राहक को उसकी जेब के मुताबिक एलपीजी दिया जाए। अभी 14.2 किलो का बड़ा या पांच किलो का छोटा सिलेंडर ही ग्राहकों को लेना पड़ता है। लेकिन, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ग्राहक जितना चाहेगा, उतना एलपीजी दिया जाएगा। इस बात की जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को उज्ज्वला पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर दी।


उन्होंने कहा कि टाटा इनोवेशन के प्रोत्साहन से भुवनेश्वर के आईआईटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी विकसित की है, जिससे जो जितना चाहे उतना गैस उसे देना संभव हो सकेगा। अब यह तेल कंपनियों के ऊपर है कि वह इस तकनीक को अपनाए और बड़े पैमाने पर इसे लागू करे। प्रधान ने कहा कि यह उज्ज्वला योजना का अगला कदम हो सकता है।


हालांकि, उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि क्या ग्राहकों के मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या कोई दूसरी व्यवस्था होगी। लेकिन, उन्होंने यह जरूर कहा कि व्यवस्था ऐसी होगी, जिसमें तेल कंपनियों को नए गैस सिलेंडर तैयार करने की जरूरत न हो। प्रधान की घोषणा के बाद तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा।


पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायो मास का इस्तेमाल उज्ज्वला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा, बल्कि इससे तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्ज्वला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे। उस संदर्भ में उन्होंने बताया कि गांव-गांव व घर-घर एलपीजी पहुंचने से बड़ी संख्या में महिलाओं के पास अतिरिक्त समय बच रहा है। तेल कंपनियों को इन महिलाओं की श्रम-शक्ति के इस्तेमाल की बड़ी योजना बनानी चाहिए। इस अवसर पर प्रधान ने आईआईएम (अहमदाबाद) के पूर्व निदेशक एसके बरुआ ने उज्ज्वला पर अपना अध्ययन प्रधान को भेंट किया। 

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