खुशखबरी: आरबीआई ने घटाया रेपो रेट, होमलोन हो सकता हे सस्ता



नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट में 0.25% कटौती का फैसला किया। इसके साथ ही, अब रेपो रेट 6.50% से घटकर 6.25% हो गया। एमपीसी के छह में से चार सदस्योंं ने रेपो रेट में कटौती का समर्थन किया जबकि दो अन्य सदस्यों, विरल आचार्य और चेतन घाटे रेट कट के पक्ष में नहीं थे। बहरहाल, नई मौद्रिक नीति के तहत रिवर्स रीपो रेट घटकर 6 प्रतिशत जबकि बैंक रेट 6.50 प्रतिशत पर आ गया है।  एमपीसी ने उम्मीद के मुताबिक नीतिगत रुख को 'नपी-तुली कठोरता' बरतने को बदल कर 'तटस्थ' कर दिया।


साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और राजकोषीय चुनौतियों के चलते नीतिगत दर में बदलाव नहीं किए जाने की संभावना है। 5, 6 और 7 फरवरी को चली छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की। आरबीआई गवर्नर बनने के बाद यह उनका पहली एमपीसी बैठक थी।  समिति ने कहा है कि ये फैसेल मीडियम टर्म में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर को 4 प्रतिशत (2 प्रतिशत कम-ज्यादा) तक रखने के लक्ष्य के मद्देनजर लिए गए हैं। बता दें कि यह चालू वित्त वर्ष की छठी और आखिरी मौद्रिक नीति समीक्षा है।


पिछले तीन बार से अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रीपो रेट को लेकर स्थिति पहले जैसी बरकरार रखी है। उससे पहले चालू वित्त वर्ष की अन्य दो समीक्षाओं में प्रत्येक बार उसने दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की थी।  विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई थी कि एमपीसी मौद्रिक स्थिति के संबंध में अपने मौजूदा 'सोच-विचार' वाले रुख को 'तटस्थ' कर सकती है क्योंकि मुद्रास्फीति दर नीचे बनी हुई है। इससे पहले दिसंबर 2018 में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में परिवर्तन नहीं किया था, लेकिन वादा किया था कि अगर मुद्रास्फीति का जोखिम नहीं हुआ तो वह दरों में कटौती करेगा। खाद्य कीमतों में लगातार गिरावट के चलते खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2018 में 2.19 प्रतिशत रही जो 18 माह का निचला स्तर है।  

loading...



प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति