सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण पर बोली सपाक्स, कहा- यह चुनावी लॉलीपॉप



भोपाल। देश में पहली बार सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया गया है। इसे लोकसभा चुनाव को देखते हुए सियासी कदम बताया जा रहा है। अनारक्षित वर्ग की राजनीति कर रही सपाक्स पार्टी ने इसे चुनावी लॉलीपॉप बताया है तो आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की राजनीति करने वाले संगठन अजाक्स ने सवर्णों के साथ पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में 52 फीसदी आरक्षण देने की मांग रख दी है। अब तक आरक्षण के नाम से बचती आ रही कांग्रेस ने भी इस मसले पर अपने विचार रखे हैं। कांग्रेस के नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि पार्टी हमेशा से सवर्ण वर्ग के गरीबों को सुविधाएं देने के पक्ष में है, लेकिन सिंह ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए संविधान में संशोधन किए बगैर इसे महज जुमला बताया।


एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन के चलते मध्य प्रदेश सहित तीन राज्यों की सत्ता गंवा चुकी भाजपा ने मई में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव की तैयारी के चलते सवर्ण आरक्षण कार्ड खेला है। केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया है। जिसकी प्रदेश के कर्मचारी वर्ग में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इस फैसले से जहां कुछ लोग खुश दिखाई दे रहे हैं तो कुछ इसे चुनावी लॉलीपॉप बता रहे हैं। सपाक्स पार्टी के अध्यक्ष डॉ. हीरालाल त्रिवेदी का कहना है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए जनता को लुभाने की कोशिश की है। जनता सब जानती है, जबकि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के संगठन अजाक्स के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर श्रवण केंद्र सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हैं।


वे कहते हैं कि सवर्ण वर्ग में भी गरीब हैं, जिन्हें लाभ मिलना चाहिए, लेकिन सरकार सवर्णों को आरक्षण का लाभ दे ही रही है, तो पिछड़ा वर्ग को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 52 फीसदी आरक्षण का लाभ भी दे दे। दोनों फैसले एक साथ हो जाएं तो बेहतर होगा, क्योंकि सरकार ने संवैधानिक मामलों को ध्यान में रखकर कदम बढ़ाया है तो इसका फायदा पिछड़ा वर्ग को भी मिलना चाहिए। वर्तमान में पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। आरक्षण पर एक नजर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को सबसे ज्यादा 27 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। जबकि अनुसूचित जाति वर्ग को 16 और जनजाति वर्ग को सात फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या एक करोड़ 13 लाख 42 हजार से ज्यादा और अनुसूचित जनजाति वर्ग की जनसंख्या एक करोड़ 53 लाख 16 हजार से ज्यादा है। 

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